पहले ब्लू कैप्सूल से चेताया, अब 1.20 लाख कैप्सूल पकड़े: लखनऊ में दवा के नाम पर नशे का नेटवर्क कितना बड़ा? - Lucknow News

लखनऊ18 घंटे पहले

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लखनऊ में नशीली दवाओं के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद जुलाई में जारी हुआ ब्लू कैप्सूल का अलर्ट फिर चर्चा में आ गया है। जुलाई में एफएसडीए की जांच में पता चला था कि आदत लगाने वाली दवाएं वैध दवा दुकानों और सप्लाई चैनल के जरिए अवैध बाजार तक पहुंच रही हैं।

अब सितंबर में ट्रांसपोर्ट नगर में एएनटीएफ और एफएसडीए की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की। टीम ने 1.20 लाख ट्रामाडोल एचसीएल कैप्सूल, 9.60 लाख एल्प्राजोलाम टैबलेट और कोडीन वाली कफ सिरप की 720 बोतलें बरामद कीं। बरामद दवाओं का कुल वजन करीब 228 किलो है। मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

कन्हैया फार्मा में गड़बड़ी मिली, जांच के बाद मेडिकल स्टोर सील।

कन्हैया फार्मा में गड़बड़ी मिली, जांच के बाद मेडिकल स्टोर सील।

जुलाई में अलर्ट, सितंबर में 1.20 लाख कैप्सूल की बरामदगी

लखनऊ में नशीली दवाओं के नेटवर्क को लेकर जांच एजेंसियों की सक्रियता नई नहीं है। जुलाई में एफएसडीए की जांच के दौरान सामने आया था कि आदत लगाने वाली कुछ प्रिस्क्रिप्शन दवाएं बाहर से लाकर रिटेल चैनल के जरिए शहर में पहुंचाई जा रही थीं। इसी जांच के दौरान ‘ब्लू कैप्सूल’ को लेकर खतरे की बात सामने आई थी।

अब ट्रांसपोर्ट नगर की कार्रवाई ने इस चिंता को एक बार फिर सामने ला दिया है। यहां से 1.20 लाख ट्रामाडोल एचसीएल कैप्सूल बरामद हुए हैं। इनके साथ बड़ी मात्रा में एल्प्राजोलाम और कोडीनयुक्त सिरप भी मिला।

इलाज की दवा नशे के बाजार तक कैसे पहुंच रही?

सबसे बड़ा सवाल यही है। ट्रामाडोल, एल्प्राजोलाम और कोडीनयुक्त दवाओं का चिकित्सकीय इस्तेमाल होता है। लेकिन जब इनका इस्तेमाल डॉक्टर की निगरानी से बाहर और गैरकानूनी तरीके से होने लगे तो यही दवाएं निर्भरता और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का कारण बन सकती हैं।

लखनऊ की हालिया बरामदगी में दवाओं की मात्रा इस बात को गंभीर बनाती है। 1.20 लाख कैप्सूल अकेले किसी छोटे स्तर की बिक्री का संकेत नहीं देते। इसके साथ 9.60 लाख एल्प्राजोलाम टैबलेट और 720 कोडीन सिरप की बोतलें मिलना बताता है कि जांच को सिर्फ एक गोदाम या एक आरोपी तक सीमित रखने के बजाय पूरी सप्लाई चेन तक ले जाने की जरूरत है।

इलाज की दवा जब नशे का जरिया बन जाए

एल्प्राजोलाम, ट्रामाडोल और कोडीन वाली दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सा में अलग-अलग स्थितियों के इलाज के लिए होता है। समस्या तब शुरू होती है, जब ऐसी दवाएं डॉक्टर की निगरानी और वैध मेडिकल सप्लाई चेन से बाहर निकलकर गैरकानूनी बाजार तक पहुंचती हैं।

  • एल्प्राजोलाम चिंता और नींद से जुड़ी समस्या में इस्तेमाल होने वाली दवा है।
  • ट्रामाडोल दर्द कम करने के लिए दिया जाता है।
  • कोडीन वाली दवाओं का भी इलाज में इस्तेमाल होता है।
एएनटीएफ और एफएसडीए की संयुक्त टीम ने नशीली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी है।

एएनटीएफ और एफएसडीए की संयुक्त टीम ने नशीली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी है।

गोदाम पर फर्म का बोर्ड, अंदर करोड़ों की दवाओं का स्टॉक

एएनटीएफ की जांच के मुताबिक ट्रांसपोर्ट नगर में कन्हैया फार्मा के नाम से संचालित परिसर से दवाओं का बड़ा स्टॉक मिला। रिपोर्टों के अनुसार वहां दवाओं के भंडारण और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की भी जांच की गई और पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जा सका। इसके बाद फर्म को सील किया गया।

यानी जांच का एक अहम हिस्सा अब यह पता लगाना है कि दवाएं किस चैनल से यहां पहुंचीं। इनके बिल किसके नाम बने? किस फर्म ने सप्लाई की? किसने भुगतान किया? और सबसे अहम—इन दवाओं की अगली खेप किन लोगों तक पहुंचनी थी?

टीम ने छापा मारकर 6 लोगों को गिरफ्तार किया।

टीम ने छापा मारकर 6 लोगों को गिरफ्तार किया।

बिलिंग से लेकर कमीशन तक जांच की कड़ी

जांच एजेंसियों के अनुसार पूछताछ में सप्लाई और बिलिंग से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि दवाओं की खरीद के लिए अलग-अलग लोगों और फर्मों का इस्तेमाल किया गया और इस प्रक्रिया में कमीशन भी दिया जाता था।

एएनटीएफ की जांच में छह आरोपियों किशन वासवानी, समीर अहमद, शाद इरशाद, उमेश कुमार, सतेन्द्र सिंह और विशाल चौरसिया को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने अधिक मुनाफे के लिए नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री और अलग-अलग लोगों तक खेप पहुंचाने की बात बताई है।

प्रॉक्सीमेक-एसपीएएस कैप्सूल के 1,116 डिब्बों समेत सात तरह की दवाओं का भंडारण मिला।

प्रॉक्सीमेक-एसपीएएस कैप्सूल के 1,116 डिब्बों समेत सात तरह की दवाओं का भंडारण मिला।

एक आरोपी का पुराना रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में

पूछताछ में शाद इरशाद से मिली जानकारी के आधार पर विशाल चौरसिया को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी के मुताबिक विशाल ने शाद को दवाएं उपलब्ध कराने की बात बताई। जांच में यह भी सामने आया कि कोडीन से जुड़े एक पुराने मामले के बाद उसका दवा लाइसेंस निरस्त हो चुका था।

एजेंसी के अनुसार इसके बाद भी वह दूसरी फर्मों के जरिए कारोबार करता रहा। बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप के संबंध में भी उसने एक अन्य व्यक्ति से खरीद की बात बताई है। अब जांच एजेंसियां इस कड़ी को आगे बढ़ाकर सप्लाई के मूल स्रोत तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

कार्रवाई के दौरान टीम ने सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपए नकद भी बरामद किए।

कार्रवाई के दौरान टीम ने सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपए नकद भी बरामद किए।

युवाओं तक नशा कैसे पहुंचता है, यही सबसे बड़ा खतरा

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू सिर्फ बरामद दवाओं की संख्या नहीं है। सवाल यह है कि ऐसी दवाएं वैध मेडिकल चैनल से बाहर निकलने के बाद किस बाजार तक पहुंचती हैं। नशीली दवाओं के अवैध कारोबार में सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि मेडिकल उपयोग वाली दवाएं भी नशे के लिए इस्तेमाल होने लगती हैं।

शुरुआत कई बार इसे सामान्य दवा समझकर हो सकती है, लेकिन नियमित गलत इस्तेमाल निर्भरता का रूप ले सकता है। इसके बाद नींद, व्यवहार, पढ़ाई या काम, पैसे की जरूरत और सामाजिक संबंधों में बदलाव जैसे संकेत सामने आ सकते हैं। यही वजह है कि दवाओं की अवैध बिक्री को सिर्फ ड्रग तस्करी का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का गंभीर मुद्दा भी माना जाना चाहिए।

कार्रवाई में करीब 228 किलो दवाएं बरामद हुई हैं।

कार्रवाई में करीब 228 किलो दवाएं बरामद हुई हैं।

7 मोबाइल और 11,140 रुपए भी बरामद

कार्रवाई के दौरान टीम ने सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपए नकद भी बरामद किए। सभी छह आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 8/21/22/29 के तहत कार्रवाई की गई है। बरामद दवाओं के नमूने नियमानुसार जांच के लिए लिए जा रहे हैं। कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी ई-साक्ष्य एप के जरिए की गई है।

पहले कोडीन, अब कैप्सूल-टैबलेट का नेटवर्क

लखनऊ में पिछले कुछ समय से कोडीनयुक्त कफ सिरप और अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के अवैध कारोबार पर एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं। अब ट्रामाडोल और एल्प्राजोलाम की इतनी बड़ी खेप मिलने से जांच का दायरा और बढ़ गया है।

अगस्त में भी देश के दूसरे हिस्सों में ट्रामाडोल और अन्य दर्द निवारक दवाओं की अवैध सप्लाई और गुप्त निर्माण से जुड़े मामले सामने आए हैं। इससे संकेत मिलता है कि समस्या सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं है और प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की अवैध सप्लाई पर निगरानी राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनौती बनी हुई है।

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