रोज 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी की जरूरत! डेटा सेंटर प्रोजेक्ट से ठाणे में गहरा सकता है जल संकट| Navbharat Live

Updated On: Jul 19, 2026 | 04:14 PM IST

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सार

Thane Data Center: ठाणे के बालकुम में प्रस्तावित अमेज़न हाइपर स्केल डेटा सेंटर के विरोध में नागरिक सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने पर्यावरण, पानी की कमी और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं जताईं।

Daily requirement of 12 million liters of water! Data center project could deepen the water crisis in Thane.

ठाणे डेटा सेंटर, बालकुम विरोध, (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)

विस्तार

Thane Amazon Hyperscale Data Center: ठाणे शहर के बालकुम इलाके में प्रस्तावित अमेज़न हाइपर स्केल डेटा सेंटर के खिलाफ लोगों में आक्रोश व्याप्त है। ‘वेक अप ठाणेकर’ नामक गैर-राजनीतिक नागरिक संगठन के नेतृत्व में शनिवार को सुबह बालकुम में स्थानीय निवासियों एवं पर्यावरणविदों ने सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया।

भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में नागरिक आंदोलन में शामिल हुए और उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि वे विकास और तकनीकी प्रगति के विरोधी नहीं हैं, लेकिन घनी आबादी वाले रिहायशी क्षेत्रों में इस तरह की औद्योगिक परियोजनाएं स्वीकार्य नहीं हैं।

नागरिकों को पर्यावरण, पानी की कमी, और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं के कारण इस परियोजना के निर्माण पर ऐतराज है। यह डेटा सेंटर उस इलाके में बनाया जा रहा है, जिसके 1 किलोमीटर के दायरे में 8 से ज्यादा बड़े हाउसिंग कॉम्प्लेक्स, 5 स्कूल और 3 अस्पताल हैं।

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प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस मेगा डेटा सेंटर को प्रतिदिन लाखों लीटर (लगभग 12 मिलियन लीटर पानी की आवश्यकता होगी,जिससे ठाणे शहर के मौजूदा जल संकट के और अधिक गंभीर होने की आशंका है।

डेटा सेंटर के शोर और गर्मी को लेकर विरोध तेज

साथ ही डेटा सेंटर के भारी कूलिंग सिस्टम और जनरेटर से लगातार उच्च स्तर (१० डेसिबल तक) का शोर और आसपास के तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिसका बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा।

विरोध प्रदर्शन की शुरुआत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के ठाणे शहर जिला अध्यक्ष मनोज प्रधान ने परियोजना की रूपरेखा और इससे जुड़े संभावित प्रभावों की जानकारी दी। इसके बाद बालकुम के स्थानीय नागरिकों ने बढ़ते यातायात, सुरक्षा, पर्यावरण और दैनिक जीवन पर पड़ने वाले असर को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की।

‘वेक अप ठाणेकर’ के प्रवक्ता दयानंद नेने ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना में बड़े कूलिंग सिस्टम से लगातार होने वाला शोर, 193 डीजल जनरेटरों का उपयोग तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध अमेजन या तकनीक का नहीं, बल्कि रिहायशी इलाके में इस प्रकार की विशाल परियोजना स्थापित किए जाने का है।

निर्णय में रखें पारदर्शिता

लोदा लक्सूरिया की अनुराधा रोडे ने नागरिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य की जीवन गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए परियोजना के स्थान पर पुनर्विचार करने की मांग की। प्रदर्शन में विभिन्न हाउसिंग सोसायटियों, स्थानीय गांवों के नागरिक, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, युवा और पेशेवर बड़ी संख्या में शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि इस तरह की परियोजनाओं के लिए रिहायशी क्षेत्रों के बजाय नियोजित औद्योगिक या प्रौद्योगिकी क्षेत्रों का चयन किया जाए तथा निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, जनभागीदारी और व्यापक सार्वजनिक चर्चा सुनिश्चित की जाए।

परियोजना के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान चुनें

‘बैंक अप ठाणेकर’ संगठन ने कहा कि वह सरकार और अमेजन के साथ सकारात्मक संवाद के लिए तैयार है, लेकिन नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए परियोजना के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान चुना जाना चाहिए। आंदोलन का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि हमें विकास से कोई आपत्ति नहीं, लेकिन रिहायशी क्षेत्रों में हाइपर स्केल डेटा सेंटर नहीं चाहिए।

अमेजन का स्पष्टीकरण

अमेजन का कहना है कि यह प्रोजेक्ट सभी कानूनी नियमों और मंजूरियों का सख्ती से पालन कर रहा है। कंपनी के अनुसार, कूलिंग के लिए पीने के पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए साइट पर नए पौधे लगाए जा रहे हैं। कंपनी सरकार के सभी नियम-शर्तों के साथ आगे बढ़ रही है।

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सेंटर का राजनीतिक विरोध

अमेजन डेटा सेंटर की खिलाफत राजनीतिक दल भी कर रहे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय महासचिव एवं विधायक डॉ। जितेंद्र आव्हाड के नेतृत्व में पार्टी के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। ठाणे के शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने भी परियोजना पर रोक लगाने और सभी अनुमतियों की जाच के लिए महानगरपालिका को पत्र लिखा है। ठाणे मनपा आयुक्त सौरभ राव ने इस मामले को राज्य सरकार के स्तर पर सुलझाने के लिए आगे भेजा है।

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