ग्लेशियल बाढ़ से मौतों में भारत सबसे आगे, चीन-पाकिस्तान का आंकड़ा काफी कम
हिंदूकुश हिमालय में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF से सबसे ज्यादा मौतें भारत में हुई हैं। UN की स्टडी के मुताबिक भारत में 62 GLOF घटनाओं में 6,119 लोगों की जान गई। 1950 के बाद ऐसी घटनाओं में भी तेजी आई है।
हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF से सबसे ज्यादा मौतें भारत में हुई हैं। एक संयुक्त राष्ट्र (UN) नेतृत्व वाली स्टडी में यह जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि GLOF की घटनाओं की संख्या के मामले में भारत आठ देशों में तीसरे स्थान पर है, लेकिन मौतों की संख्या सबसे अधिक है।
यह स्टडी कम से कम छह देशों के विशेषज्ञों के समूह ने तैयार की है। ‘हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियल झील के फटने से आने वाली बाढ़ का जोखिम, उससे निपटने की रणनीतियां और अनुकूलन में कमियां’ नाम की यह रिपोर्ट फिलहाल प्री-पब्लिकेशन स्टेज में है और इसमें 1835 से 2025 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया गया है।
भारत में 62 GLOF, लेकिन मौतें 6,119
स्टडी के मुताबिक हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में GLOF की सबसे ज्यादा घटनाएं चीन में हुईं। इसके बाद पाकिस्तान, भारत और नेपाल का नंबर है।
- चीन: 199 GLOF
- पाकिस्तान: 152 GLOF
- भारत: 62 GLOF
- नेपाल: 58 GLOF
हालांकि मौतों के मामले में तस्वीर बिल्कुल अलग है। भारत में GLOF से 6119 लोगों की मौत दर्ज की गई। वहीं पाकिस्तान में 1991 और चीन में 625 मौतें हुईं। भारत ने GLOF से जुड़े विस्थापन का भी सबसे गंभीर असर झेला है। इसके बाद नेपाल और पाकिस्तान का स्थान है।
1950 के बाद तेजी से बढ़ी GLOF की घटनाएं
स्टडी के प्रमुख लेखक और बॉन स्थित यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड ह्यूमन सिक्योरिटी (UNU-EHS) के ग्लेशियल वैज्ञानिक दिपेश छापागाईं के मुताबिक, हाल के दशकों में GLOF की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं और इसकी मुख्य वजह जलवायु परिवर्तन है। स्टडी के अनुसार 1950 के बाद GLOF की आवृत्ति में स्पष्ट तेजी देखी गई। इस अवधि में हर दशक औसतन करीब 34 GLOF हुए, जो 1950 से पहले के औसत से करीब पांच गुना अधिक है।
बर्फीले हिमस्खलन और भारी बारिश बड़े ट्रिगर
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टडी में GLOF को ट्रिगर करने वाले जलवायु संबंधी कारणों की भी पहचान की गई है। बर्फीले हिमस्खलन करीब 50 फीसदी घटनाओं के प्रमुख कारण रहे, जबकि तेज बारिश करीब 25 फीसदी मामलों में प्रमुख ट्रिगर रही। स्टडी के मुताबिक करीब 70 फीसदी घटनाएं गर्मियों के मानसून महीनों में हुईं, जब तापमान और बारिश दोनों अपने चरम पर होते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदूकुश हिमालय में होने वाली करीब 80 फीसदी GLOF घटनाएं मोरेन और बर्फ से बांधी गई झीलों से जुड़ी हैं। लगभग सभी दर्ज मौतें भी इसी तरह की झीलों से जुड़े आउटबर्स्ट में हुई हैं।
कैसे टूटते हैं प्राकृतिक बांध?
मोरेन और बर्फ से बांधी गई झीलें पहाड़ी घाटियों में प्राकृतिक अवरोधों के पीछे बनी जलराशियां होती हैं। ये अवरोध बचे हुए चट्टानी मलबे या ठोस ग्लेशियल बर्फ से बने होते हैं। तापमान बढ़ने के साथ ग्लेशियरों से पिघले पानी और तलछट का लगातार प्रवाह झीलों में पानी का स्तर बढ़ाता है। इससे प्राकृतिक बांधों पर पानी का दबाव बढ़ जाता है और उनके टूटने का खतरा पैदा होता है।
इन बांधों के टूटने की वजह बर्फ या बर्फीले हिमस्खलन, भूस्खलन या भूकंपीय गतिविधियां भी हो सकती हैं। विशेषज्ञों को नेपाल में हुई हालिया तबाही के पीछे भी इसी तरह की प्रक्रिया होने का संदेह है।
भारत में GLOF से बचाव के इंतजामों पर सवाल
स्टडी में भारत में GLOF से बचाव के उपायों को अपर्याप्त बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, GLOF की घटनाएं चीन और पाकिस्तान की तुलना में कम होने के बावजूद भारत में मौतों की संख्या अधिक होने की एक वजह यही है। भारत, नेपाल और पाकिस्तान ने भूकंप के ज्यादा जोखिम के कारण GLOF को गंभीर चुनौती माना है। स्टडी में ग्लेशियरों के मास बैलेंस में बदलाव को भी हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन का महत्वपूर्ण संकेतक बताया गया है।
एक अनाम जलवायु विशेषज्ञ ने कहा कि भारत ने 2025 की चमोली घटना और 2023 में सिक्किम और बंगाल में आई तीस्ता फ्लैश फ्लड से पर्याप्त सबक नहीं लिया है। विशेषज्ञ ने चेतावनी दी कि अगर ग्लेशियरों के अनुकूलन के उपायों में तेजी नहीं लाई गई तो नेपाल जैसी या उससे भी बड़ी तबाही हो सकती है, क्योंकि आबादी का जोखिम अधिक है।
हिंदूकुश हिमालय में कौन-कौन से देश?
हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र करीब 42 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसमें आठ देश शामिल हैं- अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार।