रीको द्वारा अवैध भूजल दोहन करने पर एनजीटी का फैसला: सीजीडब्ल्यूए की अनुमति के बिना भूजल की 1 भी बूंद नहीं निकाल सकेगा रीको - Bikaner News

राज्य के 409 औद्योगिक क्षेत्रों में वर्षों से बिना किसी अनुमति के चल रहे भूजल के अनियंत्रित खेल पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल जोन पीठ, भोपाल ने कड़ा फैसला सुनाया है।

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बीकानेर निवासी ताहिर हुसैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शिव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने आदेश दिया है कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) की एनओसी के बिना रीको या कोई भी इंडस्ट्रियल यूनिट मरुधरा की जमीन से पानी की एक बूंद भी नहीं निकाल पाएगी। एनजीटी ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि अवैध बोरवेलों को तुरंत सील किया जाए, बिजली के कनेक्शन काटे जाएं और पर्यावरण नुकसान की भरपाई के लिए भारी हर्जाना वसूला जाए।

साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के इस जनहित मुद्दे को उठाने के लिए रीको पर 50,000 की कॉस्ट लगाई गई है, जो 30 दिनों में याचिकाकर्ता को देनी होगी। इस फैसले से बीकानेर में बीछवाल के चार और नापासर औद्योगिक क्षेत्र में संचालित एक ट्यूबवैल सीज होंगे। गौरतलब है कि पिछले आठ साल में रीको बीकानेर में 28.30 करोड़ और प्रदेशभर में 180 करोड़ का पानी बिना अनुमति बेच चुका है।

इन 11 बिंदुओ से जानिए एनजीटी के कड़े और स्पष्ट कानूनी आदेश

जल शक्ति मंत्रालय की भूजल नियंत्रण नियमावली का राज्य में कड़ाई से क्रियान्वयन हो। बिना एनओ सी भूजल निकालने वाली सभी इकाइयों से दोहन की तिथि से सीपीसीबी के तय फॉर्मूले के आधार पर भारी हर्जाना वसूला जाए। जिन इकाइयों ने न तो एनओ सी के लिए आवेदन किया और न ही जिनके पास वैध एनओसी है, उन्हें तुरंत बंद कराया जाए। रीको/उद्योगों से सीजीडब्ल्यूए द्वारा एकत्रित शुल्क और जुर्माने की राशि का उपयोग उसी जिले में भूजल रीचार्ज इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में किया जाए ताकि भूजल स्टॉक का कोई नेट लॉस न हो।

राज्य का पर्यावरण विभाग एनीकट, चेक-डैम, कंटूर ट्रेंच, इंजेक्शन वेल, पीजोमीटर और अनिवार्य रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का निर्माण सुनिश्चित करे। जोहड़ों की गाद निकालना, ऐतिहासिक बावड़ियों का जीर्णोद्धार और टांकों के पायतान को साफ कर चरणबद्ध तरीके से जल संचयन किया जाए। कृषि क्षेत्र में फव्वारा व बूंद-बूंद सिंचाई पर सब्सिडी बढ़ाई जाए और अधिक पानी वाली फसलों की जगह बाजरा, ज्वार, दालों व तिलहन को बढ़ावा दिया जाए। रीको और सभी उपभोक्ता इकाइयां अपने बोरवेलों पर छेड़छाड़-मुक्त डिजिटल फ्लो मीटर व टेलीमेट्री सिस्टम लगाएं। मरुधरा के जीवन को बचाने के लिए अटल भूजल योजना को राज्य के सभी हिस्सों में सख्ती से लागू किया जाए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के तहत बिना सीजीडब्ल्यूए की पूर्व अनुमति के श्रमिकों के घरेलू उपयोग के लिए भी भूजल आपूर्ति नहीं की जा सकेगी। जिला कलेक्टरों और एसडीएम को अधिकृत अधिकारी बनाकर अवैध बोरवेल सील करने, बिजली सप्लाई काटने और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत केस दर्ज करने का निर्देश।

मरुधरा में भूजल का ‘रेड अलर्ट’ : क्या कहती है जल शक्ति मंत्रालय और सीजीडब्ल्यूबी की ‘डायनामिक ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज रिपोर्ट

150.22% निष्कर्षण दर (100 लीटर रीचार्ज पर 150 लीटर दोहन)। मरुधरा में बारिश से जितना पानी जमीन के भीतर रीचार्ज होता है (11,07,363.40 हेक्टेयर मीटर), उससे 1.5 गुना अधिक (16,63,472.31 हेक्टेयर मीटर) पानी बाहर निकाला जा रहा है। 295 में से 203 ब्लॉक (68.8%) अति-दोहित श्रेणी “रेड जोन’ में हैं, 23 ब्लॉक गंभीर संकट में और 29 ब्लॉक अर्ध-गंभीर स्थिति में हैं। केवल 37 ब्लॉक सुरक्षित बचे हैं, जयपुर (15/15 ब्लॉक), अजमेर (9/9), अलवर (14/14), भीलवाड़ा (12/12), चित्तौड़गढ़ (11/11), दौसा (6/6), झुंझुनूं (8/8) और सवाई माधोपुर (6/6) के सभी के सभी ब्लॉक अति-दोहित के कारण 100 प्रतिशत रेड जोन में शामिल हैं। भूजल का 85% से 90% हिस्सा कृषि में, केवल 5% उद्योगों के लिए, लेकिन अनियंत्रित औद्योगिक दोहन के कारण भूजल में फ्लोराइड, नाइट्रेट, टीडीएस और आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है।

नीति आयोग ने चेतावनी दी है कि जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत 122 देशों में 120वें स्थान पर है और राजस्थान जैसे राज्यों में अगर यही रफ्तार रही तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए संकट गहरा जाएगा।

भूजल के अवैध दोहन को लेकर एनजीटी का यह महत्वपूर्ण आदेश है। राज्य सरकार को सख्ती से इसका पालना करानी होगी। वैभव पंचौली, पर्यावरण विशेषज्ञ एवं अधिवक्ता, एनजीटी