गोमती में उफान, बहा पीपा पुल,15 गांवों का संपर्क कटा: 1 लाख आबादी परेशान, KGMU जाने के लिए 2-3 की जगह 5-7 km घूमना पड़ रहा - Lucknow News

लखनऊ18 मिनट पहले

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लखनऊ में गोमती नदी उफान पर है। तेज बहाव और जलकुंभी के दबाव से मेहंदी घाट का पीपा पुल अपनी जगह से बह गया। इससे फैजुल्लागंज, घैला, दाउदनगर, इमामबाग, डुगरिया, अल्लूनगर और गाजीपुर समेत 15 से ज्यादा गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है। करीब 1 लाख की आबादी को अस्पताल और स्कूल जाने में परेशानी हो रही है।

पहले गांवों से KGMU की दूरी महज 2-3 किमी थी। पीपा पुल हटने के बाद यह रास्ता बढ़कर 5-7 किमी हो गया है। लोगों को नाव का इंतजार करना पड़ रहा है। नाव से आने-जाने के लिए एक व्यक्ति को एक चक्कर के 20 रुपए देने पड़ रहे हैं।

1 लाख की आबादी परेशान

मेहंदी घाट पर चारों तरफ पानी नजर आ रहा है। घाट पर बैठे वसीम ने बताया कि पीपा पुल 15 से ज्यादा गांवों को जोड़ता था। इसी पुल से लोग रोज अस्पताल, स्कूल और दूसरे जरूरी कामों के लिए आते-जाते थे। पुल बहने के बाद लोगों को घंटों नाव का इंतजार करना पड़ रहा है।

वहीं, जलभराव से किसान परेशान हैं। दूसरी तरफ बच्चे पानी को स्विमिंग पूल बनाकर मस्ती कर रहे हैं।

2 तस्वीरें देखिए…

जलभराव को स्विमिंग पूल बना दिया

जलभराव को स्विमिंग पूल बना दिया

मेंहदी घाट के चारों ओर पानी ही पानी।

मेंहदी घाट के चारों ओर पानी ही पानी।

'जलकुंभी साफ करने वाले कर्मचारी करते हैं लापरवाही'

घाट के पास रहने वाले नरेश ने कहा कि हर साल पुल या तो टूट जाता या फिर बहकर किनारे लग जाता है। हम लोगों को परेशानी होती है। जलकुंभी की वजह से यह होता है। जलकुंभी की सही से सफाई नहीं होती है। सफाई करने वाले बस फोटो खींचकर अधिकारी को भेज देते हैं। पूरे दिन बैठे रहते हैं। बड़ी-बड़ी मशीन आई हैं। सब खड़ी हैं, जो जलकुंभी 10 दिन में साफ हो जाना चाहिए उसके लिए महीनों लग जाते हैं। जलकुंभी ने पूरी नदी को जकड़ रखा है ।

घाट पर बाइक से स्टंट करते हुए युवा।

घाट पर बाइक से स्टंट करते हुए युवा।

एक नाव के सहारे पूरे इलाके के लोग

नाव पर सवार मुस्तकीम ने बताया कि हर साल मानसून में यही परेशानी होती है। गोमती का जलस्तर बढ़ते ही लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। इलाके में जरूरत का सामान भी आसानी से नहीं मिल पाता।

उन्होंने बताया कि लोग साइकिल और सामान लेकर नाव पर सवार होते हैं। नाव में भीड़ होने पर हादसे का डर बना रहता है। नाव भरने के बाद ही चलती है। इससे लोगों को काफी देर इंतजार करना पड़ता है। एक तरफ जाने के लिए 20 रुपए किराया देना पड़ता है।

नदी के दोनों तरफ के किसान परेशान

नरेश ने बताया कि उनका खेत फैजुल्लागंज में है। खेत में पानी भर गया है। वहां जाने के लिए अब नाव का सहारा लेना पड़ता है। अगर नाव से नहीं जाएं तो 8 से 10 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है।

कई किसानों के खेत गोमती के दूसरी तरफ हैं। पीपा पुल बहने के बाद उनकी परेशानी बढ़ गई है। बारिश के बाद धान के खेतों में पानी भर गया है। नाव से आने-जाने में काफी समय लग रहा है। किसानों का पूरा दिन इसी में निकल जाता है।

नरेश ने कहा कि बचपन से ही हर साल यह परेशानी देख रहे हैं। सरकार से मांग है कि पीपा पुल का काम जल्द कराया जाए, ताकि लोगों और किसानों को राहत मिल सके।

नाव के सहारे घाट पार करते है लोग।

नाव के सहारे घाट पार करते है लोग।

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