कहीं 1.5 तो कहीं 3 साल तक सत्र पीछे: सेशन लेट, 250 कॉलेजों के 2 लाख नर्सिंग और पारा मेडिकल छात्रों का भविष्य उलझा - Patna News

पटना42 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

बिहार में नर्सिंग, फार्मेसी और पारा मेडिकल का अकादमिक कैलेंडर पूरी तरह बेपटरी हो चुका है। नतीजा यह है कि दो लाख से अधिक विद्यार्थियों का भविष्य उलझ कर रह गया है। जानकार बताते हैं कि बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (बीयूएचएस) के गठन के बाद परीक्षा व्यवस्था तो एक जगह आ गई, लेकिन पुराने लंबित सत्र, परीक्षाओं और रिजल्ट का बोझ खत्म नहीं हो सका है।

इस कारण कहीं परीक्षा एक- डेढ़ साल देर से हो रही है, तो कहीं तीन साल पुराने बैच का पहला साल भी पूरा नहीं हो सका है। बीयूएचएस के अधीन 56 स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों की 126 परीक्षाएं संचालित होनी हैं। करीब 250 से अधिक कॉलेजों के छात्र अलग-अलग स्तर पर परीक्षा, रिजल्ट और रजिस्ट्रेशन की देरी से प्रभावित हैं। इधर, पिछले दिनों बीएससी नर्सिंग के प्रथम और तृतीय सेमेस्टर के छात्रों का रिजल्ट प्रकाशित हुआ है, जिसमें 90 प्रतिशत बच्चे फेल हो गए, तबसे छात्र उग्र बने हुए हैं और लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस संबंध में विवि के कुलपति प्रो. बिन्दे कुमार से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। रजिस्ट्रार बिमलेश कुमार को भी फोन और मैसेज के जरिए प्रतिक्रिया के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उनकी ओर से भी जवाब नहीं मिला।

2023 में एडमिशन, 2026 में भी पहला साल अधूरा

उधर, नर्सिंग छात्रों में सत्र देर होने से भी आक्रोश है। उनका कहना है कि एएनएम, जीएनएम, पारा मेडिकल डिप्लोमा और डी. फार्मा के 2023-24 बैच की प्रथम वर्ष की परीक्षा अप्रैल 2026 में हुई। सामान्य कैलेंडर के अनुसार यह परीक्षा काफी पहले होनी चाहिए थी। अब परीक्षा के बाद रिजल्ट का इंतजार है, जबकि अगले वर्ष की परीक्षाओं का चक्र भी पीछे है। जीएनएम तीन साल एवं एएनएम व कई पारामेडिकल और फार्मेसी डिप्लोमा पाठ्यक्रम दो साल के हैं। यानी 2023 में दाखिला लेने वाले छात्रों का अब तक कोर्स पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन कई विद्यार्थी अभी पहले वर्ष की परीक्षा-रिजल्ट प्रक्रिया में ही फंसे हैं।

86 प्रतिशत निजी संस्थानों में 82 हजार से अधिक सीट

स्वास्थ्य शिक्षा की दूसरी बड़ी तस्वीर सीटों के आंकड़े से सामने आती है। विधानसभा में दिए आंकड़ों के अनुसार बीएससी नर्सिंग, बी. फार्मा, एएनएम, जीएनएम, पारामेडिकल डिप्लोमा और डी. फार्मा को मिलाकर 82,317 सीटें हैं। इनमें सरकारी क्षेत्र की 11,109 और निजी क्षेत्र की 71,208 सीटें हैं। यानी करीब 86 प्रतिशत सीटें निजी संस्थानों में हैं।

कोर्ससरकारी कॉलेज/सीटनिजी कॉलेज/सीटकुल सीट
बीएससी नर्सिंग9/54099/69507490
बी. फार्मा5/10086/68206920
एएनएम82/5070226/1303318103
जीएनएम30/1778140/945511233
पारा मेडिकल डिप्लोमा42/332186/2985033171
डी. फार्मा5/30086/51005400

पहले अलग संस्थाएं परीक्षा कराती थी

पारामेडिकल एसोसिएशन ऑफ बिहार के अध्यक्ष भरत भूषण ने बताया कि पहले एएनएम - जीएनएम की परीक्षा बिहार नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल कराती थी। बीएससी नर्सिंग एवं बी.फार्मा जैसी डिग्री की परीक्षा एकेयू तथा पारा मेडिकल डिप्लोमा की परीक्षा अलग समिति से होती थी। बीयूएचएस बनने के बाद परीक्षा व्यवस्था एक विवि के अधीन आई। इसके साथ निगरानी भी सख्त हुई।

इस बार सख्ती बढ़ाते हुए बापू सभागार समेत कड़े निगरानी वाले केंद्रों पर परीक्षा कराई गई। नतीजा यह है कि छात्र फेल हो गए। उन्होंने बताया कि ज्यादातर निजी संस्थानों में नियमित कक्षाएं, योग्य फैकल्टी, लैब और क्लीनिकल ट्रेनिंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। छात्रों को पढ़ाने के बजाय परीक्षा पास कराने और सेंटर मैनेज करने का भरोसा दिलाया जाता था।

.