महाराष्ट्रः 1.6 लाख दही-हांडी गोविंदाओं के लिए इंश्योरेंस कवर, मौत हुई तो मिलेगा 10 लाख का मुआवजा

महाराष्ट्रः 1.6 लाख दही-हांडी गोविंदाओं के लिए इंश्योरेंस कवर, मौत हुई तो मिलेगा 10 लाख का मुआवजा

दही हांडी उत्सव महाराष्ट्र में बड़े ही जोश और उत्साह से मनाई जाती है. (फाइल/pti)

महाराष्ट्र सरकार ने गोकुलाष्टमी के दौरान होने वाले दही-हंडी उत्सव के लिए गोविंदाओं को बड़ी सौगात देते हुए बीमा सुरक्षा (Insurance Protection) देने का ऐलान किया है. महायुति सरकार ने इस साल दही-हंडी उत्सव में शामिल होने वाले करीब 1.60 लाख गोविंदाओं को बीमा सुरक्षा देने का फैसला करते हुए कहा कि गतिविधियों में शामिल होने के दौरान हादसे में अगर किसी की मौत या पूरी तरह से स्थायी विकलांगता की स्थिति बनती है तो पीड़ित को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.

राज्य में दही-हंडी बहुत ही लोकप्रिय उत्सव है और बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होते हैं. दही-हंडी उत्सव में हिस्सा लेने वालों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस कवरेज को बढ़ाया गया है. महाराष्ट्र खेल विभाग ने कल गुरुवार को यह घोषणा की और कहा कि इस बेहतर योजना का मकसद हादसे की स्थिति में गोविंदाओं और उनके परिवारों के लिए वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करना है.

हर प्रतिभागी की बीमा के लिए 75 रुपये

गोकुलाष्टमी के दौरान होने वाले दही-हंडी उत्सव में हिस्सा लेने वाले गोविंदाओं की सुरक्षा के लिए, सरकार ‘द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी’ के जरिए हर प्रतिभागी के लिए 75 रुपये की दर से बीमा का खर्च उठाएगी. इस काम के लिए खेल विकास कोष से 1.12 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. यह स्कीम महाराष्ट्र राज्य दही-हंडी गोविंदा एसोसिएशन और खेल एवं युवा सेवा विभाग के साथ मिलकर लागू की जाएगी.

इस बीमा कवर का मकसद उन गोविंदाओं की मदद करना है जो अक्सर इंसानी पिरामिड बनाते समय गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या फिर मारे जाते हैं. अब इस बीमा योजना के तहत, दही-हंडी गतिविधियों के दौरान हादसे में मौत हो जाने या पूरी तरह से स्थायी विकलांगता होने की स्थिति में पीड़ित या उसके परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.

एक हाथ-एक पैर गंवाने वाले को 5 लाख

हादसे में एक हाथ, एक पैर या एक आंख गंवाने वाले प्रतिभागियों को 5 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा, जबकि चोट लगने पर अस्पताल में भर्ती होने का खर्च 1 लाख रुपये तक कवर किया जाएगा.

Dahi Handi

राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुसार, दही-हंडी में इंसानी पिरामिड बनाने को पहले ही एक एडवेंचर स्पोर्ट का दर्जा दिया है. इसने उत्सव के दौरान जोखिम को कम करने के लिए जरूरी सुरक्षा दिशा- निर्देश भी तय कर दिए हैं. इसके अलावा, उत्सव के दौरान घायल होने वाले गोविंदा सरकारी और अर्ध-सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की व्यवस्था की गई है.

खेल विभाग ने कहा कि बीमा योजना को एक सरकारी बीमा कंपनी के जरिए लागू किया जाएगा, और इसमें प्रति प्रतिभागी 75 रुपये या उससे कम प्रीमियम के आधार पर चुना जाएगा. इस योजना का खर्च राज्य खेल विकास कोष उठाएगा.

पिछले साल भी मुंबई-ठाणे में कितने घायल

योग्य गोविंदाओं का रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन महाराष्ट्र स्टेट गोविंदा एसोसिएशन (Maharashtra State Govinda Association) की ओर से किया जाएगा. इसमें केवल वही प्रतिभागी ही बीमा योजना के तहत कवर किए जाएंगे जो तय उम्र की शर्तों को पूरा करते हैं, और प्रैक्टिस सेशन में लगातार हिस्सा लेते रहे हों और उत्सव में शामिल होते हैं.

दही हांडी उत्सव के दौरान हर साल बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं, जबकि कुछ लोगों की मौत भी हो जाती है. पिछले साल मुंबई और पड़ोसी शहर ठाणे में ‘दही हांडी’ उत्सव के दौरान 2 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 300 से अधिक लोग घायल हो गए थे. मुंबई में घायल हुए 318 लोगों में से महज 24 लोगों (इसमें 9 साल का एक बच्चा भी शामिल था) को अस्पताल में भर्ती कराया गया.

जयप्रकाश सिंह

जयप्रकाश सिंह

जयप्रकाश सिंह का नाम देश के चुनिंदा क्राइम रिपोर्टर में आता है. लंबे समय से टीवी जर्नलिस्ट के तौर पर सेवाएं जारीं. करीब तीन दशकों से सक्रिय पत्रकारिता का हिस्सा. प्रोड्यूसर, एंकर और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में मुंबई से कार्यरत. इसके पहले 2012 से 2022 तक मुंबई में इंडिया टीवी के ब्यूरो चीफ रहे. 2005 से 2012 तक नेटवर्क18 ग्रुप के आईबीएन7 चैनल में डिप्टी ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाली. 2004 से 2005 तक सहारा समय मुंबई में बतौर सीनियर स्पेशल कॉरस्पॉन्डेंट काम किया. 2002 से 2004 तक मुंबई ब्यूरो में बीएजी फिल्म्स के चीफ रहे. नवभारत टाइम्स मुंबई में 1997 में जॉइन किया और यहां 2 साल काम किया. इससे पहले भी चार संस्थानों में काम किया.

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