1,705 बालिकाओं से शुरू हुआ ‘रोशनी अभियान': बालिकाओं को एनीमिया मुक्त बनाने की पहल, हर माह होगी हीमोग्लोबिन की जांच - Sirohi News

बालिकाओं को एनीमिया मुक्त बनाने और उनके स्वास्थ्य में सुधार के लिए सिरोही जिले में बुधवार को ‘रोशनी अभियान’ शुरू किया गया।

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जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर की पहल पर शुरू हुए इस अभियान के पहले चरण में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और शिक्षा विभाग के 19 बालिका छात्रावासों में रहने वाली 1,705 बालिकाओं को शामिल किया जाएगा।

अभियान के तहत बालिकाओं की नियमित स्वास्थ्य व हीमोग्लोबिन जांच, इलाज, पोषण संबंधी जागरूकता और लगातार फॉलो-अप किया जाएगा।

बालिकाओं को एनीमिया मुक्त बनाने और उनके स्वास्थ्य में सुधार के लिए सिरोही जिले में बुधवार को ‘रोशनी अभियान’ शुरू।

बालिकाओं को एनीमिया मुक्त बनाने और उनके स्वास्थ्य में सुधार के लिए सिरोही जिले में बुधवार को ‘रोशनी अभियान’ शुरू।

जागरूकता, पोषण और इलाज पर फोकस

जनजाति बालिका आश्रम छात्रावास, सिरोही में दोपहर 12 बजे आयोजित कार्यक्रम में जिला कलेक्टर तोमर ने मां सरस्वती के पूजन के साथ अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान अतिथियों का स्वागत किया गया। महिला अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक योगेन्द्र देथा ने अभियान के उद्देश्यों, कार्ययोजना और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। छात्रावास की बालिकाओं ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां भी दीं।

कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर और अन्य अतिथियों ने अभियान के लोगो का विमोचन किया। अभियान का मुख्य संदेश “एनीमिया मुक्त सिरोही अभियान – स्वस्थ बालिका, सशक्त सिरोही” रखा गया है। इसके तहत केवल दवाओं पर ही नहीं, बल्कि जागरूकता, पोषण और स्वस्थ जीवनशैली पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

छात्राओं ने बिखेरी सांस्कृतिक छटा।

छात्राओं ने बिखेरी सांस्कृतिक छटा।

हर बालिका का बनेगा स्वास्थ्य रिकॉर्ड

अभियान के तहत प्रत्येक बालिका का व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड निर्धारित रजिस्टर में संधारित किया जाएगा। बालिकाओं की मासिक हीमोग्लोबिन और स्वास्थ्य जांच होगी तथा प्रत्येक जांच का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा। इससे समय के साथ उनके स्वास्थ्य और हीमोग्लोबिन स्तर में हो रहे सुधार की निगरानी की जा सकेगी।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के साथ आवश्यकता के अनुसार आयरन फोलिक एसिड (IFA), एल्बेंडाजोल और मल्टीविटामिन उपलब्ध कराए जाएंगे। छात्रावास वार्डन दवाओं के नियमित सेवन और स्वास्थ्य रिकॉर्ड की निगरानी करेंगे।

15 अक्टूबर तक पहला चरण, फिर सभी स्कूलों तक विस्तार

अभियान का पहला चरण 15 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें जिले के 19 बालिका छात्रावासों की 1,705 छात्राओं को शामिल किया गया है। इसके बाद दूसरे चरण में अभियान का विस्तार सिरोही जिले के सभी स्कूलों में अध्ययनरत किशोर बालिकाओं तक किया जाएगा।

अभियान में संतुलित एवं पौष्टिक आहार, एनीमिया से बचाव, हाथों की स्वच्छता और साफ-सफाई के प्रति जागरूकता गतिविधियां भी होंगी। स्वस्थ खान-पान और जीवनशैली विकसित करने के लिए नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे।

Hb जांच से मापा जाएगा अभियान का असर

अभियान की शुरुआत में प्रत्येक बालिका के हीमोग्लोबिन स्तर का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। बाद की जांचों में प्राप्त परिणामों की तुलना शुरुआती स्तर से की जाएगी। अभियान के अंत में फिर से Hb जांच कर यह आकलन किया जाएगा कि बालिकाओं के हीमोग्लोबिन स्तर और स्वास्थ्य में कितना सुधार हुआ।

चयनित बालिकाओं को रोशनी एम्बेसडर’ के रूप में प्रोत्साहित करने की भी योजना है। ये बालिकाएं अपनी साथी छात्राओं को पोषण, एनीमिया की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करेंगी।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद रहीं छात्राएं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद रहीं छात्राएं।

छात्रावास के अवसर का पूरा लाभ उठाएं: कलेक्टर

जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने कहा कि छात्रावास में रहकर पढ़ाई करना बालिकाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। घर पर कई तरह के कार्य होने के कारण पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, जबकि छात्रावास में वे पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।

उन्होंने बालिकाओं से लक्ष्य निर्धारित करने और उसे हासिल करने के लिए अनुशासन को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की बात कही। समय पर उठना, पढ़ना, खेलना और हर कार्य निर्धारित समय पर करना जरूरी है।

कलेक्टर ने एनीमिया से ग्रसित बालिकाओं को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित आयरन की गोली लेने के लिए प्रेरित किया। अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने भी सरकारी सैनिक स्कूल में रहकर पढ़ाई की है।

उन्होंने कहा, “आप किसी से कम नहीं हैं। यदि आप लक्ष्य निर्धारित कर अनुशासन और मेहनत के साथ आगे बढ़ें तो जीवन में जो चाहें, वह बन सकती हैं।”

एनीमिया से थकान और पढ़ाई में एकाग्रता की कमी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश खराड़ी ने बालिकाओं को एनीमिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शरीर में खून की कमी होने पर थकान बनी रह सकती है, पढ़ाई में मन नहीं लगता और भूख भी कम लग सकती है।

उन्होंने बताया कि जिन बालिकाओं में खून की कमी है, वे चिकित्सकीय सलाह के अनुसार भोजन के बाद प्रतिदिन आयरन फोलिक एसिड की गोली लें। जिन बालिकाओं का हीमोग्लोबिन सामान्य है, वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सप्ताह में एक दिन IFA की गोली लें।

उन्होंने बताया कि पेट के कीड़ों से बचाव के लिए हर छह माह में एल्बेंडाजोल की गोली भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ली जानी चाहिए।

डॉ. खराड़ी ने अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने कक्षा 9वीं से 12वीं तक सरकारी छात्रावास में रहकर पढ़ाई की है। उन्होंने बालिकाओं से छात्रावास में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने तथा पढ़ाई के साथ स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान देने का आह्वान किया।

कलेक्टर ने बालिकाओं की हीमोग्लोबिन और स्वास्थ्य जांच का जायजा लिया।

कलेक्टर ने बालिकाओं की हीमोग्लोबिन और स्वास्थ्य जांच का जायजा लिया।

कलेक्टर ने जांच व्यवस्था का लिया जायजा

कार्यक्रम के बाद जिला कलेक्टर ने चिकित्सा विभाग की टीम द्वारा की जा रही बालिकाओं की हीमोग्लोबिन और स्वास्थ्य जांच का जायजा लिया। उन्होंने छात्रावास वार्डन को प्रत्येक बालिका की जांच और स्वास्थ्य स्थिति का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए, ताकि नियमित फॉलो-अप किया जा सके।

इसके बाद जिला कलेक्टर ने छात्रावास परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

नोडल विभाग

महिला अधिकारिता विभाग अभियान का नोडल विभाग रहेगा। यह विभिन्न विभागों के समन्वय से बालिकाओं की काउंसलिंग, जागरूकता और IEC गतिविधियों का संचालन करेगा।