बीमा कंपनी को 1.90 करोड़ का क्लेम देना होगा: गुना में सड़क हादसे में मौत के बाद खारिज किया था, अब टाटा एआईए 7% ब्याज भी देगी - Guna News

गुना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ दायर परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया है। आयोग ने कंपनी को सड़क दुर्घटना में मृत अमन जाट के परिजनों को 1 करोड़ 90 लाख रुपए की दुर्घटना मृत्यु बीमा राशि देने का आदे

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ट्रक और कार की टक्कर में हुई थी मौत मामले के अनुसार अमन जाट की 11 सितंबर 2024 को ट्रक और कार की दुर्घटना में गंभीर चोट लगने से मौत हो गई थी। मामले में कैंट थाना गुना में अपराध क्रमांक 0936/2024 दर्ज किया गया था। पुलिस जांच के बाद ट्रक चालक के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया गया।

अमन जाट ने टाटा एआईए की परम रक्षक प्लस सोल्यूशन बीमा पॉलिसी ली थी। इसमें 1 करोड़ रुपए का लाइफ कवर और 1.90 करोड़ रुपए का एक्सीडेंटल डेथ रिस्क कवर था। पॉलिसी की पहली प्रीमियम 69,339 रुपए और दूसरी किश्त 70,410 रुपए जमा की गई थी। उनके पिता हरिसिंह जाट को नॉमिनी बनाया गया था।

बीमा कंपनी ने क्लेम किया था खारिज अमन जाट की मौत के बाद उनके पिता ने बीमा क्लेम पेश किया। कंपनी ने मामले की जांच के लिए एक जांचकर्ता नियुक्त किया। जांच रिपोर्ट में शुरुआत में मामले को सही मानते हुए क्लेम देने की सिफारिश की गई थी।

इसके बावजूद कंपनी ने 24 फरवरी 2025 को क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी ने दुर्घटना से जुड़ी जानकारी में विसंगतियां होने का तर्क दिया। कंपनी का कहना था कि कथित चालक ऋषिकेश सेन को गंभीर चोट नहीं आई, जबकि दुर्घटना की स्थिति में उसे चोट लगना अपेक्षित था।

कंपनी ने यह भी दावा किया कि अमन जाट की चोटें चालक की सीट पर बैठे होने से जुड़ी थीं और दस्तावेजों में गलत जानकारी दी गई थी। इसी आधार पर कंपनी ने क्लेम को गलत तथ्यों और कथित धोखाधड़ी के आधार पर खारिज कर पॉलिसी को शुरू से शून्य मानने और प्रीमियम जब्त करने की बात कही।

आयोग ने जांच रिपोर्ट को नहीं माना सुनवाई के दौरान आयोग ने पुलिस के अभियोग पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच की। आयोग ने पाया कि दुर्घटना के समय अमन जाट कार की चालक के बगल वाली सीट पर बैठे थे और कार ऋषिकेश सेन चला रहे थे। आयोग के अनुसार कार ट्रक के पीछे से चालक के बगल वाली तरफ टकराई थी। इससे अमन जाट को गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हुई।

आयोग ने अमन जाट के चालक की सीट पर बैठे होने संबंधी बीमा कंपनी के जांचकर्ता के निष्कर्ष को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि इस निष्कर्ष के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। दुर्घटनाग्रस्त कार की तस्वीरें भी जांचकर्ता के निष्कर्ष से मेल नहीं खातीं।

आयोग ने जांच रिपोर्ट को अमान्य मानते हुए अमन जाट की मौत को पॉलिसी के तहत दुर्घटनात्मक मृत्यु माना। आयोग ने कहा कि पॉलिसी में दुर्घटना से मौत होने पर 1.90 करोड़ रुपए का भुगतान तय था और पॉलिसी की किसी शर्त के उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई। आयोग ने क्लेम खारिज करने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा माना।

दो महीने में देना होगा 1.90 करोड़ रुपए आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि आदेश की तारीख से दो महीने के भीतर मृतक के परिजनों को 1 करोड़ 90 लाख रुपए की दुर्घटना मृत्यु बीमा राशि का भुगतान करे। कंपनी को 24 फरवरी 2025 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।

इसके अलावा मानसिक कष्ट के लिए 25 हजार रुपए और वाद खर्च व अभिभाषक शुल्क के लिए 10 हजार रुपए देने के आदेश दिए गए हैं। यानी कंपनी को अतिरिक्त 35 हजार रुपए भी देने होंगे।

अगर यह राशि दो महीने में नहीं दी जाती है तो इस पर भी भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।