कोसी का रौद्र रूप! 1.91 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज: सुपौल के कई गांवों में घुसा, तटबंध के भीतर इलाकों में फैला बाढ़ का पानी - Supaul News
सुपौल में कोसी नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच शनिवार शाम 7 बजे कोसी बराज से 1 लाख 91 हजार 585 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज दर्ज किया गया।
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बराज के डाउनस्ट्रीम में 1 लाख 87 हजार 585 क्यूसेक पानी का प्रवाह रहा। ईस्टर्न कोसी मेन कैनाल में डिस्चार्ज शून्य रहा, जबकि वेस्टर्न कोसी मेन कैनाल में 4 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
वहीं, बराह क्षेत्र में 1 लाख 44 हजार 200 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया, जो फिलहाल स्थिर है। कोसी में बढ़े जलप्रवाह के कारण निर्मली, सरायगढ़-भपटियाही, किशनपुर, मरौना और सुपौल सदर प्रखंड के तटबंध के भीतर बाढ़ का पानी फैल रहा है।
निचले इलाकों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
देखें, मौके से आई तस्वीरें…




मौजहा में वार्ड 13 और 14 चारों तरफ से घिरे
किशनपुर प्रखंड की मौजहा पंचायत के सुकमारपुर, पंचगछिया और सिसवा गांव में बाढ़ के साथ कटाव की स्थिति बनी हुई है। पंचायत के वार्ड संख्या 13 और 14 को बाढ़ के पानी ने चारों तरफ से घेर लिया है।
सूचना मिलने पर प्रभारी सीओ जियाउल कमर ने प्रभावित इलाके का जायजा लिया और ग्रामीणों से स्थिति की जानकारी ली। मौके पर कर्मचारी, मास्टर ट्रेनर और आपदा मित्र भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने प्रभावित इलाकों में सहायता पहुंचाने के साथ आवागमन की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की।
पिरगंज पुनर्वास में घर-आंगन तक पहुंचा पानी
लगातार बारिश के बाद पिरगंज पुनर्वास में जलजमाव की समस्या गंभीर हो गई है। जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई स्थानों पर बारिश का पानी घर और आंगन तक पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने नाली निर्माण और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है। बीडीओ पिंकी कुमारी ने बताया कि कर्मी को भेजकर स्थल की स्थिति की जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

तटबंध और स्परों की निगरानी तेज
इधर, डीएम सावन कुमार के निर्देश पर अभियंताओं और अधिकारियों की टीमें विभिन्न सुरक्षा तटबंधों और स्परों की लगातार निगरानी कर रही हैं।
संवेदनशील स्थलों पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत के अनुसार आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई है।