महोबा अस्पताल में 1 करोड़ की GPF धांधली: FIR की चेतावनी मिली तो ऑडिट टीम के सामने पहुंचा, सर्विस बुक सौंपी - Mahoba News

इरफान खान पठान | महोबा19 मिनट पहले

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महोबा के जिला महिला अस्पताल में कर्मचारी भविष्य निधि यानी GPF से करीब एक करोड़ रुपए की कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जांच में खुद को घिरता देख हफ्तेभर तक कार्यालय से गायब रहने वाला आरोपी वरिष्ठ सहायक संतोष वर्मा आखिरकार ऑडिट टीम के सामने पेश हो गया। उस पर करीब 85 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का आरोप है। वहीं, एक अन्य कर्मचारी के खाते से भी करीब 15 लाख रुपये निकाले जाने की बात प्रारंभिक जांच में सामने आई है।

प्रयागराज से आई एजी ऑफिस की तीन सदस्यीय ऑडिट टीम पिछले एक सप्ताह से अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाल रही है। आरोपी के अचानक गायब होने और जरूरी अभिलेख अपने साथ ले जाने से जांच की रफ्तार भी प्रभावित हुई। अब संतोष वर्मा के जांच टीम के सामने पेश होने के बाद उससे घंटों पूछताछ की गई है। टीम ने उससे GPF पासबुक, सर्विस बुक समेत कई जरूरी दस्तावेज लिए हैं।

जांच में खुला लाखों की निकासी का मामला

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वरिष्ठ सहायक संतोष वर्मा के खाते से 84.66 लाख रुपये की धनराशि निकाली गई। आरोप है कि यह निकासी नियमों के विपरीत की गई। इसके अलावा जिला महिला चिकित्सालय में चालक के पद पर कार्यरत अंबिका शर्मा के खाते से भी करीब 15 लाख रुपये निकाले जाने का मामला सामने आया। प्रारंभिक जांच में यह सवाल भी उठा कि इतनी बड़ी रकम निकालने के लिए संबंधित आवेदन और अन्य प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध था या नहीं।

करीब एक करोड़ रुपये की इस कथित वित्तीय गड़बड़ी की जानकारी सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अब जांच का फोकस केवल रकम की निकासी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाया जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

रिकॉर्ड लेकर दफ्तर से गायब हुआ आरोपी, दो बार भेजा गया नोटिस

गड़बड़ी सामने आने के बाद मुख्य आरोपी संतोष वर्मा बिना किसी सूचना के कार्यालय से गायब हो गया था। आरोप है कि वह अपने साथ कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी ले गया था, जिनकी जांच के लिए ऑडिट टीम को जरूरत थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस डॉ. रमाकांत चौरिहा ने आरोपी को उसके पनवाड़ी और ललितपुर स्थित पतों पर स्पीड पोस्ट के जरिए दो बार नोटिस भेजा। नोटिस के बावजूद जब कोई जवाब नहीं मिला तो विभाग ने जांच में सहयोग करने के लिए उस पर दबाव बढ़ाया। इसके बाद विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में भी चेतावनी दी गई कि यदि आरोपी जांच में सहयोग नहीं करता है तो उसके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसी चेतावनी के बाद संतोष वर्मा जांच टीम के सामने पहुंचा।

पासबुक और सर्विस बुक लेकर पहुंचा

ऑडिट टीम के सामने पेश होने के बाद संतोष वर्मा ने EPF पासबुक, सर्विस बुक और अन्य मांगे गए अभिलेख जांच अधिकारियों को सौंपे। उसने निकासी और रिकॉर्ड को लेकर अपनी सफाई भी पेश की। सीएमएस डॉ. रमाकांत चौरिहा, वरिष्ठ चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में उससे कई घंटों तक पूछताछ की गई। अधिकारियों ने उससे निकाली गई रकम, आवेदन प्रक्रिया, भुगतान के माध्यम और रिकॉर्ड से जुड़े सवाल किए। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संतोष वर्मा की सफाई से जांच टीम संतुष्ट है या नहीं। ऑडिट टीम अब दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान करेगी।

अगले सप्ताह फिर आएगी ऑडिट टीम, हर निकासी की तारीख और माध्यम की होगी जांच मामले की जांच अभी शुरुआती दौर में है। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, ऑडिट टीम उत्तर प्रदेश शासन, स्वास्थ्य महानिदेशालय और जिला प्रशासन की ई-मेल आईडी समेत जरूरी जांच संबंधी विवरण अपने साथ ले गई है।

टीम अगले सप्ताह दोबारा महोबा आएगी और मामले की बिंदुवार जांच करेगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि किस तारीख को कितनी रकम निकाली गई, किस माध्यम से भुगतान हुआ और उसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए।

जांच का एक अहम बिंदु यह भी होगा कि इस कथित घोटाले में केवल दो कर्मचारियों के खाते इस्तेमाल हुए या फिर अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी इसमें शामिल हैं। सीएमओ डॉ. विनय कुमार और सीएमएस के अनुसार, जांच जारी है और ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद शासन स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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