10 साल जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना, 3 महीने में फैसला, पेपर लीक पर मोदी सरकार ला रही सख्त कानून, कैबिनेट से मंजूरी
Updated: Friday, July 24, 2026, 16:25 [IST]
NEET-UG पेपर लीक विवाद और छात्रों के लगातार विरोध के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 24 जुलाई को पेपर लीक कानून को और सख्त बनाने वाले संशोधित बिल को मंजूरी दे दी गई। सरकार की तैयारी है कि इसे 27 जुलाई को संसद में पेश किया जाए। अगर यह कानून लागू होता है तो पेपर लीक के आरोपियों के लिए सजा और जुर्माना दोनों पहले से कहीं ज्यादा कड़े हो जाएंगे।
सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक जैसे मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को कानूनी ताकत दी जाएगी। इन अदालतों को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर फैसला सुनाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। बिल में पेपर लीक के दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
कैबिनेट मीटिंग में क्या हुई बातचीत?
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े इस बिल को बिना देरी आगे बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री साफ कह चुके हैं कि छात्रों से जुड़े इस कानून में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। देश भी यही चाहता है। अगर संसद की कार्यवाही में लगातार रुकावट डाली गई तो इसका जवाब युवाओं को देना होगा।"
किरण रिजिजू ने कहा,
"हम बिल पेश करने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन जब आपको हमारे कैबिनेट के फैसले की जानकारी मिल जाएगी, तो हम आपको अपनी टाइमिंग के बारे में बता देंगे। प्रधानमंत्री ने कहा है कि स्टूडेंट्स के बारे में हम जो बिल ला रहे हैं, उसमें कोई देरी नहीं होनी चाहिए। देश भी वही चाहता है जो प्रधानमंत्री ने कहा है, इसलिए इसमें रुकावट डालने के लिए कोई भी हथकंडा अपनाना सही नहीं होगा। अगर कांग्रेस पार्लियामेंट की कार्यवाही में रुकावट डालती रही तो वह इसमें फंस जाएगी। हम स्टूडेंट्स के भविष्य के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं। अगर कांग्रेस पार्टी पार्लियामेंट की चर्चा को रोकने के लिए हर तरह की रुकावटें डालती रही, तो उन्हें इस देश के युवाओं और असल में पूरे देश के युवाओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।"
सोनम वांगचुक को लेकर उन्होंने कहा, "वे इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा हैं। उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा करेंगे।"
CJP और सरकार की मीटिंग में क्या-क्या हुआ?
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र प्रसाद सिंह के साथ मीटिंग हुई है। बैठक के बाद CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि संगठन ने सरकार के सामने अपनी तीन ऐसी मांगें रखीं जिन्हें वह किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहता।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा या उन्हें मंत्रिमंडल से हटाया जाए।
- NEET विवाद से जुड़े आत्महत्या करने वाले हर छात्र के परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजा मिले।
- प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी FIR वापस ली जाएं और भविष्य में किसी पर कार्रवाई न करने की लिखित गारंटी दी जाए।
सौरव दास ने कहा,
"सरकार ने मुआवजा, FIR वापस लेने और भविष्य में ऐसी कार्रवाई न करने की लिखित गारंटी के मुद्दे पर सकारात्मक रुख दिखाया है। इसी वजह से हमें अगली बैठक के लिए बुलाया गया है। हमने अपनी तीन मुख्य मांगें, बोलकर और लिखकर, साफ-साफ बता दीं। पहली मांग, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें या सरकार उन्हें कैबिनेट से निकाल दे। दूसरी, हर उस परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, जिनके बच्चे NEET एजुकेशन सिस्टम की वजह से आत्महत्या कर ली। तीसरी मांग यह है कि हमारे सभी भाई-बहन जो यहां शांति से प्रोटेस्ट कर रहे थे, लेकिन पुलिस की बर्बरता का सामना करना पड़ा और उनके खिलाफ FIR दर्ज की गईं, वे FIR वापस ले ली जाएं। किसी के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, सरकार हमें लिखित में एक सॉवरेन गारंटी दे कि भविष्य में किसी को टारगेट नहीं किया जाएगा। हमने उन्हें अपने चौथे पॉइंट-हमारे पांच-पॉइंट पॉलिसी डिमांड चार्टर के बारे में भी बताया, सरकार ने हमारी दूसरी और तीसरी मांगों पर पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया, मुआवजा, FIR वापस लेना, और एक लिखित सॉवरेन गारंटी कि भविष्य में ऐसी FIR दर्ज नहीं की जाएंगी। सरकार ने कहा कि, प्रिंसिपल तौर पर, यह इन दो मांगों को स्वीकार करता है। इसलिए हमें कल एक और मीटिंग के लिए बुलाया गया है।''
PM का वीडियो मैसेज और राहुल का तीखा पलटवार
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (ट्विटर) पर 2.56 मिनट का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि पेपर लीक लाखों बच्चों और माता-पिता के लिए बेहद कष्टदायक है।
उन्होंने कहा, "पिछले ढाई महीनों में हमने कई कड़े कदम उठाकर दोषियों को जेल भेजा है। 22 लाख छात्रों का साल बचाने के लिए समय पर परीक्षा कराई गई और 19 जुलाई को रिजल्ट भी दिया गया, लेकिन हम यहीं नहीं रुकेंगे।"
पीएम के इस मैसेज पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी ने लिखा, "मिस्टर मोदी, छात्र धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आधी रात के इस बेकार वीडियो से उनके विवेक का अपमान मत कीजिए। प्रधान को बर्खास्त कीजिए, छात्रों को पीटने वालों को सजा दीजिए और देश से माफी मांगिए।" वहीं CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी कहा कि सरकार का सबसे सख्त कदम धर्मेंद्र प्रधान को हटाना ही होगा।
क्या CBI जांच और कड़े कानून से शांत होगा छात्रों का गुस्सा?
3 मई को हुए NEET UG पेपर लीक की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में छापेमारी के बाद अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और सीबीआई जल्द ही चार्जशीट दाखिल करने वाली है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ कड़े कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट का ऐलान जंतर-मंतर पर एक महीने से डटे छात्रों को शांत कर पाएगा या फिर शनिवार की बातचीत में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई नया मोड़ आएगा?