हर साल 10 हजार रुपये की मदद : भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए संबल बनी साय सरकार की दीनदयाल उपाध्याय योजना - Haribhoomi
छत्तीसगढ़ की दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत लाखों भूमिहीन परिवारों को हर वर्ष 10 हजार रुपये की DBT सहायता मिल रही है।
भूमिहीन कृषि मजदूरों को सहायता राशि वितरित करते CM साय
- Published: 13 Jul 2026, 05:39 PM IST
- Last Updated: 13 Jul 2026, 05:39 PM IST
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना प्रदेश के लाखों भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत पात्र भूमिहीन परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से भेजी जा रही है। योजना का उद्देश्य उन परिवारों की आय बढ़ाना है, जिनके पास स्वयं की कृषि भूमि नहीं है और जिनकी आजीविका पूरी तरह मजदूरी पर निर्भर है। यह पहल ग्रामीण गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के नए अवसर भी उपलब्ध करा रही है।
20 जनवरी 2025 को हुई योजना की शुरुआत
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 20 जनवरी 2025 को रायपुर के न्यू सर्किट हाउस ऑडिटोरियम से योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। पहले चरण में राज्य के 5,62,112 भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को लाभ देने के लिए 562.11 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना भूमिहीन कृषि मजदूरों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। योजना में केवल खेतिहर मजदूर ही नहीं बल्कि वनोपज संग्राहक, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवारों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों के बैगा, गुनिया, मांझी एवं पारंपरिक पुजारी परिवारों को भी शामिल किया गया है।

600 करोड़ के बजट प्रावधान से योजना को मिला मजबूत आधार
राज्य सरकार ने योजना की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए संकल्प बजट 2026-27 में 600 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। ई-केवाईसी के बाद लाभार्थियों की संख्या और अधिक पारदर्शी हुई है। जिलावार आंकड़ों में रायपुर में सबसे अधिक 53,338, बिलासपुर में 39,401 तथा महासमुंद में 37,011 लाभार्थी हैं। वहीं नारायणपुर, कोरिया और बीजापुर जैसे आदिवासी जिलों में भी हजारों भूमिहीन मजदूर इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। इससे योजना की व्यापक पहुंच और समावेशी स्वरूप स्पष्ट होता है।
4.95 लाख परिवारों के खातों में पहुंचे लगभग 496 करोड़ रुपये
योजना के नवीनतम चरण में 25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 4,95,965 भूमिहीन कृषि मजदूरों के बैंक खातों में 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये डीबीटी के माध्यम से एक क्लिक में हस्तांतरित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि श्रम और सम्मान को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि यह राशि गरीब परिवारों को त्योहारों, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में बड़ी राहत प्रदान कर रही है।

शिक्षा और रोजगार के लिए उम्मीद बनी योजना
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम संकरी की चमेली सेन इस योजना की प्रेरक हितग्राही हैं। सिलाई का काम करने वाली चमेली और सैलून चलाने वाले उनके पति सीमित आय में परिवार का पालन-पोषण करते हैं। योजना के तहत मिली 10 हजार रुपये की सहायता से वे अपने बच्चों की नर्सिंग और इंजीनियरिंग की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं। उनका कहना है कि यह सहायता उनके परिवार के लिए केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का माध्यम बन गई है।

मजदूर परिवारों को मिली आर्थिक राहत
इसी गांव के धन्नूलाल धीवर भी इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। मजदूरी पर निर्भर उनका परिवार लगातार दूसरे वर्ष 10 हजार रुपये की सहायता प्राप्त कर चुका है। धन्नूलाल बताते हैं कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उधार लेना पड़ता था, लेकिन अब इस सहायता से पूरे वर्ष की कई आवश्यकताएं पूरी हो जाती हैं। उनकी पत्नी को महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक स्थिर हुई है।

बेटियों की पढ़ाई में सहारा बनी सहायता राशि
महासमुंद जिले के सेम्हराडीह गांव निवासी शिवलाल साहू वर्षों से मजदूरी और राजमिस्त्री का काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उन्हें योजना के तहत मिलने वाली 10 हजार रुपये की सहायता से बेटियों की स्नातक शिक्षा का खर्च उठाने में मदद मिल रही है। उनके परिवार के अन्य पात्र सदस्य भी इस योजना का लाभ ले रहे हैं। शिवलाल का कहना है कि समय पर मिली यह सहायता गरीब परिवारों के लिए भविष्य संवारने का अवसर बन रही है।

बंटाई पर खेती कर बढ़ी अतिरिक्त आय
ग्राम मालगांव निवासी प्रकाश शांडिल्य स्वयं भूमिहीन हैं और मजदूरी करके जीवनयापन करते हैं। योजना से प्राप्त 10 हजार रुपये की सहायता का उपयोग वे अन्य किसानों की जमीन बंटाई पर लेकर खेती करने में करते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है। उनका मानना है कि यह योजना भूमिहीन मजदूरों को केवल सहायता ही नहीं बल्कि आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दे रही है।

अन्य योजनाओं के साथ मिलकर बदल रही ग्रामीण परिवारों की जिंदगी
दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना का लाभ जब प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं के साथ मिलता है तो गरीब परिवारों के जीवन में व्यापक बदलाव दिखाई देता है। सरगुजा जिले के जनेऊराम नायक का परिवार इसका उदाहरण है। भूमिहीन होने के बावजूद उन्हें वार्षिक आर्थिक सहायता, पक्का मकान, गैस कनेक्शन और महिला सदस्य को मासिक सहायता मिल रही है, जिससे उनका जीवन अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बना है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली महत्वपूर्ण पहल
दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना आज केवल आर्थिक सहायता कार्यक्रम नहीं रह गई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा योजना बन चुकी है। प्रतिवर्ष मिलने वाली सहायता राशि से लाखों परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, छोटे व्यवसाय और दैनिक जरूरतों पर खर्च कर रहे हैं। राज्य सरकार का दावा है कि पारदर्शी डीबीटी व्यवस्था, पर्याप्त बजटीय प्रावधान और समावेशी लाभार्थी चयन के माध्यम से यह योजना समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सहायता पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रही है।
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