लखनऊ-कानपुर से प्रयागराज तक: UP के वो 10 जिले जो किसी का नहीं हैं गढ़, सरकार बनाने में यहीं से होता है गेम

लखनऊ-कानपुर से प्रयागराज तक: UP के वो 10 जिले जो किसी का नहीं हैं गढ़, सरकार बनाने में यहीं से होता है गेम

उत्तर प्रदेश चुनावी आंकड़े Image Credit source: PTI

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव के नतीजे सिर्फ पूरे राज्य के आंकड़ों से नहीं समझे जा सकते. कई बार कुछ जिलों और वहां की विधानसभा सीटों का प्रदर्शन भी चुनावी तस्वीर को समझना अहम हो जाता है. उत्तर प्रदेश की सियासत में 403 विधानसभा सीटों का आंकड़ा जितना बड़ा है, उतनी ही दिलचस्प है कुछ जिलों की सीटों की कहानी भी है. चुनावी नतीजों के बाद जब पूरे प्रदेश की तस्वीर सामने आती है, तो कुछ जिले ऐसे दिखते हैं जहां सीटों का समीकरण पूरी तरह बदला हुआ नजर आता है.

साल 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव होने वाला है. इसी बीच प्रदेश के जिलों के समीकरण पर नजर डालें, तो उत्तर प्रदेश के 10 जिलों की सीटों पर बड़े बदलाव नजर आते हैं. जिन जिलों की बात की जा रही है, उनमें अलीगढ़, कानपुर, प्रयागराज, उन्नाव, देवरिया, गोंडा, लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर खीरी और हरदोई शामिल हैं. 2012 और 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो ये बदलाव साफ तौर पर नजर आ जाएगा.

2022 में पलट गया सीटों का खेल

2012 में इन सीटों के बड़े हिस्से पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार जीते थे, जबकि 2022 में इन्हीं जिलों में बीजेपी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा. 2012 में जिन इलाकों में समाजवादी पार्टी का असर मजबूत था, 2022 तक उन्हीं जिलों में बीजेपी ने बड़ी संख्या में सीटें अपने नाम कर लीं.

Up Assembly Election (2)

इन 10 जिलों में क्या बदला?

  • 88 विधानसभा सीटें इन 10 जिलों में हैं.
  • 2012 में इन सीटों पर सपा का प्रदर्शन कई जिलों में मजबूत था.
  • 2022 में इन जिलों की बड़ी संख्या में सीटें BJP के खाते में गईं.
  • 2022 में BJP ने इन 10 जिलों की 78 सीटें जीतीं.

किस पार्टी ने जीती कितनी सीटें?

इन बदलावों को सिर्फ सीटों की गिनती समझकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि ये जिले मिलकर विधानसभा की 88 सीटें बनाते हैं. दिलचस्प बात यह है कि 2012 से 2022 के बीच इन 10 जिलों का चुनावी नक्शा काफी बदल गया. 2012 में समाजवादी पार्टी ने इन जिलों की 61 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में बीजेपी के खाते में 78 सीटें आईं. यानी एक दशक में इन इलाकों में पार्टीवार सीटों का समीकरण बड़े स्तर पर बदला. आखिर कौन से हैं ये 10 जिले, 2012 में यहां किसका दबदबा था और 2022 तक तस्वीर कितनी बदल गई? आंकड़ों के जरिए समझिए पूरी कहानी.

अलीगढ़ से लखीमपुर तक बदला समीकरण

  • अलीगढ़ में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं. 2012 में सपा ने इनमें से 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2022 में बीजेपी ने सभी 7 सीटों पर जीत हासिल की.
  • देवरिया में भी तस्वीर काफी बदली. जिले की 7 सीटों में 2012 में सपा ने 5 सीटें जीती थीं. 2022 में बीजेपी ने सभी 7 सीटों पर कब्जा किया.
  • गोंडा में 2012 में सपा ने 6 सीटें जीती थीं और बीजेपी को सिर्फ एक सीट मिली थी. 2022 में बीजेपी ने जिले की सभी 7 सीटें जीत लीं.
  • उन्नाव की 6 सीटों में 2012 में सपा ने 5 सीटें जीती थीं. 2022 में बीजेपी ने सभी 6 सीटें अपने नाम कीं.
  • लखीमपुर खीरी में भी ऐसा ही बदलाव दिखा. यहां कुल 7 विधानसभा सीटें हैं. 2012 में सपा ने 4 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में बीजेपी ने सभी 7 सीटों पर जीत दर्ज की.

सीतापुर और हरदोई में भी बदली तस्वीर

सीतापुर जिले में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं. 2012 में सपा ने 7 सीटों पर जीत हासिल की थी. 2022 में बीजेपी ने 8 सीटें जीत लीं और सिर्फ एक सीट सपा के खाते में गई. यानी यहां भी दोनों चुनावों के बीच सीटों के समीकरण में बड़ा बदलाव हुआ.

हरदोई में कुल 8 विधानसभा सीटें हैं. 2012 में सपा ने 6 सीटें जीती थीं और 2 सीटें Bसपा के खाते में गई थीं. 2022 में बीजेपी ने सभी 8 सीटों पर जीत दर्ज की. यह उन जिलों में से है जहां 10 साल के अंतराल में पूरा सीट समीकरण बदल गया.

Up Assembly Election

लखनऊ में तस्वीर थोड़ी अलग

राजधानी लखनऊ की 9 विधानसभा सीटों में 2012 में सपा ने 7 सीटें जीती थीं. 2022 में बीजेपी ने 7 सीटें जीतीं, जबकि सपा के खाते में 2 सीटें आईं. यानी यहां भी सीटों का संतुलन बदला, लेकिन 2022 में बीजेपी का प्रदर्शन सभी सीटों पर एकतरफा नहीं था. कानपुर शहर और कानपुर देहात को मिलाकर 14 विधानसभा सीटें हैं. 2012 में सपा ने इन दोनों जिलों में 8 सीटें जीती थीं. 2022 में बीजेपी ने इन 14 सीटों में 11 पर जीत दर्ज की.

प्रयागराज में भी सीटों का बदलाव

प्रयागराज में 12 विधानसभा सीटें हैं. 2012 में सपा ने इनमें से 8 सीटें जीती थीं. 2022 में बीजेपी ने 8 सीटों पर जीत हासिल की. यानी यहां भी दोनों चुनावों के बीच प्रमुख दल की सीटों में बड़ा बदलाव दिखाई देता है. जिले के विधानसभा चुनाव आंकड़ों में 2012 में सपा का वोट हिस्सा करीब 28.7 फीसदी था, जबकि 2022 में बीजेपी का वोट हिस्सा करीब 56.8 फीसदी रहा. यह पूरे जिले के विधानसभा चुनाव में पार्टी के कुल वोटों का आंकड़ा है.

अंकिता पाण्डेय

अंकिता पाण्डेय

शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है.  पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.

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