बुरहान वानी हिंसा में गंवाई थी आंखों की रोशनी, अब 10 साल बाद मिला इंसाफ... पैलेट गन पीड़ित इंशा मुश्ताक को मिलेंगे 41 लाख रुपये
Srinagar News: साल था 2016 का. कश्मीर घाटी के अशांत माहौल के दौरान शोपियां की बेटी इंशा मुश्ताक ने पैलेट गन के कारण अपनी आंखों की रोशनी गंवा दी थी. इंशा को करीब एक दशक बाद आखिरकार सरकारी सहायता और इंसाफ मिला है. जम्मू-कश्मीर सरकार ने इंशा की वर्षों से अटकी पड़ी LPG डिस्ट्रीब्यूटरशिप को धरातल पर उतारने के लिए 41.16 लाख रुपये की शेष राशि मंजूर कर दी है. सरकार के इस फैसले से इंशा के स्वावलंबन और आत्मनिर्भर बनने के सपने को नई मजबूती मिली है.
सरकार के इस फैसले की जानकारी देते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री सतीश शर्मा ने कहा- सरकार ने इंशा मुश्ताक को उनकी LPG डिस्ट्रीब्यूटरशिप स्थापित करने के लिए आवश्यक 41,16,000 रुपये की बकाया राशि जारी करने का निर्णय लिया है.
मंत्री सतीश शर्मा ने कहा कि “न्याय मिलने में भले ही वर्षों की देरी हुई, लेकिन सरकार ने न्याय से इनकार नहीं किया.” मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पीड़ितों के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है.
2018 में स्वीकृत हुई थी डिस्ट्रीब्यूटरशिप, सालों से थी अधूरी
दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले स्थित सेडो इलाके की निवासी इंशा मुश्ताक को केंद्र सरकार की पुनर्वास योजना के तहत वर्ष 2018 में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप स्वीकृत की गई थी. आवंटन के बावजूद वित्तीय कमी और प्रशासनिक कारणों से यह डिस्ट्रीब्यूटरशिप सालों तक अधूरी पड़ी रही. अब उमर अब्दुल्ला सरकार द्वारा राशि जारी किए जाने से एजेंसी चालू हो सकेगी.
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2016 के बुरहान वानी विरोध प्रदर्शन में गई थी आंखों की रोशनी
जुलाई 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. इसी दौरान अपने घर की खिड़की पर खड़ी इंशा मुश्ताक सुरक्षा बलों द्वारा चलाई गई पैलेट गन की चपेट में आ गई थीं. पैलेट लगने के कारण इंशा ने पूरी तरह से अपनी दोनों आंखों की रोशनी गंवा दी थी. वह कश्मीरी युवाओं पर पैलेट गन के घातक असर का एक बड़ा चेहरा बन गई थीं.
अंधेरे को मात देकर हासिल की 12वीं में सफलता
आंखों की रोशनी जाने के बावजूद इंशा ने कभी हिम्मत नहीं हारी. भीषण हादसे और शारीरिक चुनौतियों के बाद भी इंशा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी. वर्ष 2023 में इंशा मुश्ताक ने ओपन स्कूल के जरिए 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा पास की, जिसमें उन्होंने 500 में से 319 अंक हासिल कर मिसाल कायम की थी.

तन्वी गुप्ता
तन्वी गुप्ता मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की रहने वाली हैं. स्कूल-कॉलेज धर्मशाला से करने के बाद शिमला में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से MMC की पढ़ाई की. मीडिया में 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. चंडीगढ़, हैदराबाद में नौकरी करने के बाद फिलहाल दिल्ली में जॉब कर रही हैं. प्रिंट, टेलीविजन के बाद 2017 से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रही हैं. इससे पहले आजतक, न्यूज18, द ट्रिब्यून, ईटीवी भारत और इंडिया न्यूज सहित कुछ अन्य मीडिया संस्थानों में काम कर चुकी हैं. क्राइम, इतिहास और साइंस एक्सपेरिमेंट्स की खबरों में खास रूचि है. फिलहाल टीवी9 डिजिटल में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम संभाल रही हैं. नौकरी के अलावा खेल-कूद और घूमने फिरने में भी काफी दिलचस्पी है. नेशनल लेवल पर वॉलीबॉल और बैडमिंटन खेल चुकी हैं. साथ ही खो-खो खेल में भी स्टेट लेवल तक खेल चुकी हैं. इसके अलावा एनसीसी 'C' सर्टिफिकेट प्राप्त है. गाना सुनना तो पसंद है ही. लेकिन सिंगिंग का भी शौक रखती हैं. स्कूल और कॉलेज लेवल पर सिंगिंग में भी काफी पुरस्कार मिल चुके हैं.
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