जयपुर में 10 साल पुरानी समस्या हुई हल: 6 शहरों में 50 दिन में मिलीं 19 हजार शिकायतें, देखें 'भास्कर समाधान' के नतीजे - Jaipur News
दैनिक भास्कर एप की पहल ‘भास्कर समाधान’ आम आदमी की आवाज सीधे प्रशासन तक पहुंचा रहा है। राजस्थान के 6 शहरों जयपुर, कोटा, सीकर, जोधपुर, अजमेर और उदयपुर में 1 जून से शुरू हुई यह पहल आम आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को जवाबदेह बनाने का काम
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50 दिनों में 6 शहरों से हमें 19 हजार से ज्यादा समस्याएं पोस्ट के जरिए मिलीं। अब तक 3000 से ज्यादा समाधान हो चुके हैं। सड़क, बिजली, पानी, सफाई, सीवरेज, स्वास्थ्य और प्रशासन से जुड़ीं औसतन 443 शिकायतें हर दिन पोस्ट की गईं। जबकि 71 समस्याओं का औसतन रोज समाधान हो रहा है।
जयपुर: 10 साल बाद बनीं सीढ़ियां
पंचवटी राजा पार्क के बीएसएनल ऑफिस में बिल जमा कराने के लिए बनी विंडो के सामने बुजुर्गों-महिलाओं के खड़े होने के लिए बना प्लेटफॉर्म जर्जर था। जागरूक कलाकार सुनीश मारु ने एक महिला के गिरकर चोटिल होने के बाद समस्या भास्कर समाधान पर पोस्ट की। इसके बाद अधिकारियों ने वहां सीढियां बनवाईं। मारु ने भास्कर का आभार जताते हुए कहा कि करीब 10 साल पुरानी समस्या का ‘भास्कर समाधान’ से हल मिल सका।

इस प्लेटफॉर्म से एक एक महिला के गिरकर चोटिल होने पर मारु ने समस्या पोस्ट की थी।
सफाई, सीवरलाइन सबसे बड़ी समस्या
राजधानी जयपुर में ‘भास्कर समाधान’ प्रशासन और आमजन के बीच सेतु का काम कर रहा है। बीते 50 दिनों में जयपुर से बुनियादी जरूरतों से जुड़ीं समस्याओं की 5993 पोस्ट हमें मिली हैं। इनमें 903 से ज्यादा समस्याओं के समाधान हो चुके हैं। लोगों ने कचरा, सीवरलाइन, रोड लाइट और बेसहारा पशुओं को जयपुर की सबसे बड़ी समस्या बताया। वहीं जयपुर में सबसे ज्यादा रोड लाइट और कचरे से जुड़ी समस्याओं का समाधान हुआ है।

जयपुर में अभी 241 समस्याओं के समाधान पर काम जारी है।
अजमेर: 6 महीने बाद मिली सिक्योरिटी मनी
अजमेर की मेघा शर्मा ने समस्या पोस्ट कर लिखा था कि अजमेर विकास प्राधिकरण ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी आवासीय योजना, माखुपुरा में लॉटरी के लिए 11000 रुपए सिक्योरिटी फंड जमा करवाए थे। नंबर नहीं आने के 6 महीने बाद भी मुझे सिक्योरिटी मनी रिफंड नहीं की गई। ‘भास्कर समाधान’ पर यह समस्या सामने आई तो एक्शन लेते हुए एडीए के डिप्टी कमिश्नर (नॉर्थ) जयपाल सिंह राठौड़ ने तुरंत समाधान करवाया।

मेघा ने ‘भास्कर समाधान’ की कैटेगिरी ‘अन्य शिकायतें’ में अपनी समस्या पोस्ट की थी।
सफाई और पानी की समस्या बड़ी चुनौती
अजमेर में सिविक इश्यू से जुड़ी करीब 2067 समस्याएं पोस्ट की गईं। विभागों की सक्रियता से 620 समस्याओं का समाधान भी हो चुका है। वहीं 350 समस्याओं पर समाधान की प्रक्रिया जारी है। हालांकि अजमेर में लचर कचरा प्रबंधन, पेयजल और सफाई बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

अजमेर में जागरुक जनता और सक्रिय विभागों के तालमेल से बेहतर परिणाम हासिल हुए हैं।
उदयपुर: 2 साल बाद 40 परिवारों तक पहुंचा साफ पानी
उदयपुर के रामेश्वर सोसाइटी से विष्णु पटेल ने बताया था कि उनके एरिया में दो साल से पीने के पानी के लिए करीब 40 परिवार जूझ रहे थे। ‘भास्कर समाधान’ पर जब मामला उठा तो विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर पेयजल लाइन में आवश्यक सुधार करवाया। इसके बाद प्रभावित घरों में साफ और नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू हो सकी।

‘भास्कर समाधान’ पर शिकायत के बाद पानी की समस्या हुई हल।
टूटी सड़क, सीवर, रोड लाइट सबसे बड़ी समस्या
झीलों की नगरी उदयपुर में टूटी सड़क, रोड लाइट और सीवरेज सबसे बड़े सिविक इश्यू हैं। अब तक उदयपुर से करीब 2300 से ज्यादा समस्याएं पोस्ट की जा चुकी हैं। यहां अब तक 257 मामलों में लोगों को समाधान मिला है। उदयपुर में रोड लाइट, स्ट्रीट लाइट और बिजली से जुड़े अन्य मामलों में समाधान करवाकर बिजली विभाग टॉप पर रहा।

हिरण मगरी, सवीना खेड़ा, प्रताप नगर और बेड़ला क्षेत्र से सबसे ज्यादा परेशानी नजर आईं।
कोटा: 2 साल बाद बनी पक्की सड़क
प्रताप नगर निवासी विष्णु गोचर ने भास्कर समाधान पर शिकायत पोस्ट कर बताया था कि गली में गैस पाइपलाइन बिछाने के बाद पिछले दो वर्षों से सड़क नहीं बनाई गई है। बरसात के दिनों में पूरी गली कीचड़ से भर जाती थी। मामला ‘भास्कर समाधान’ पर आने के बाद संबंधित विभाग ने कार्रवाई करते हुए सड़क बना दी, जिससे लोगों को बहुत मिली।

दो साल से सड़क बनने का इंतजार ‘भास्कर समाधान’ पर पोस्ट डालने के बाद खत्म हुआ।
सीवरेज, सड़क, पानी बड़ी समस्या
कोटा में ‘भास्कर समाधान’ पर लोगों ने सबसे ज्यादा समस्या सीवर-नाली और पानी को लेकर की। शहर से 3020 से ज्यादा पोस्ट कर लोगों ने अपनी समस्या हमें बताई। इनमें 331 समस्याओं का समाधान हो चुका है। कुल शिकायतों में करीब 77.4% शिकायतें सड़क, सफाई, सीवर, पार्क और बेसहारा पशुओं से जुड़ी थीं।

कोटा में पक्की सड़क और नाली शहर का सबसे बड़ा मुद्दा है।
सीकर: 5 महीने बाद बनी पक्की सड़क
सीकर के फतेहपुर रोड निवासी अमन ने सबलपुरा क्षेत्र की पांच महीनों से खराब सड़क की समस्या हमें भेजी थी। गड्ढों से हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता था। भास्कर ने जब प्रमुखता से शिकायत अधिकारियों के सामने रखी तो संबंधित विभाग ने मौके का निरीक्षण कर मरम्मत करवाई। इससे लोगों ने राहत की सांस ली।

टूटी सड़क के ठीक होने से लोगों का सफर सुगम हुआ। दूसरे विभागों ने भी सक्रियता दिखाते हुए समाधान में तेजी दिखाई है।
टूटी सड़कें और जलभराव बनीं चुनौती
‘भास्कर समाधान’ पर शहर से 20 जुलाई तक सिविक इश्यू से जुड़ी करीब 1585 समस्याएं हमें मिलीं। अब तक 197 का समाधान किया जा चुका है। जबकि अलग-अलग विभागों से जुड़ी 35 समस्याओं पर काम जारी है। वहीं सड़क, नाली और पेयजल संबंधी मामलों में नगर परिषद और पीएचईडी ने समाधान भी सबसे अधिक करवाए हैं।

सीकर शहर की सबसे बड़ी समस्या टूटी और गड्ढों से भरी सड़क है।
जोधपुर: नाले की मरम्मत से जलभराव से मिली मुक्ति
पावटा के भगत सिंह मार्ग के रहने वाले राजीव भाटी ने लंबे समय से टूटी नाले की दीवार की समस्या पोस्ट की थी। उन्होंने बताया कि इससे हर साल पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के मकानों में घुस जाता था। जब हमने जिम्मेदारों का इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया तो निगम ने नाले की मरम्मत करवाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुसत की। अब बरसात का पानी घरों में नहीं आता। क्षेत्रवासियों ने समय पर कार्रवाई के लिए विभाग और भास्कर समाधान का आभार जताया।

बारिया में बीते कई सालों से जलभराव होता था। इस साल जलभराव की समस्या का समय पर समाधान हो गया।
कचरा प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती
जोधपुर शहर में लचर कचरा प्रबंधन इसकी खूबसूरत विरासत की सूरत बिगाड़ रहा है। ‘भास्कर समाधान’ पर जोधपुर की जनता ने सड़क, सफाई, पानी, बिजली और सीवरेज से जुड़ी 4082 से ज्यादा पोस्ट की हैं। प्रशासन के सहयोग से अब तक 746 समाधान हो चुके हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें नगर निगम से आईं। समाधान में बिजली विभाग आगे रहा।

जोधपुर में पाने के पानी और पॉवर कट की समस्या शहर का बड़ा मुद्दा है।
पब्लिक की आवाज बना ‘भास्कर समाधान’
‘भास्कर समाधान’ सेगमेंट देशभर में इकलौता ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां शहरवासी सीधे अपने इलाके से जुड़े सिविक इश्यू खुद पोस्ट कर सकते हैं। एक क्लिक में समस्याओं के हल मिलने से पब्लिक को भी गुड गवर्नेंस का अहसास हो रहा है। प्रशासन और आमजन के बीच सीधे संवाद का रास्ता भी खुला है। लोगों से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद अब इसे और अधिक प्रभावी, सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है।
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