पशुपालन विभाग में एक साल से दवा खरीद ठप, जिले के 10.65 लाख पशुधन राम भरोसे - Giridih News
जिले में करीब एक साल से पशुपालन विभाग में दवाओं की नियमित खरीद नहीं होने का असर अब पशुपालकों पर पड़ रहा है। सरकारी पशु चिकित्सालयों से मुफ्त मिलने वाली कई जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण पशुपालकों को बाजार से महंगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही
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जिले में बड़ी संख्या में पशुधन होने के बावजूद दवाओं की कमी पशुपालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।जिले में 10 लाख 65 हजार 780 पालतू पशु हैं। इनमें गाय, बैल और बछड़ों की संख्या 9 लाख 56 हजार 66, जबकि भैंस, भैंसा और पड़वा की संख्या 1 लाख 9 हजार 14 है। इसके अलावा भेड़ और उसके बच्चों की संख्या 1,752, बकरी, बकरा और मेमने 84,889 तथा शुकर और उसके बच्चों की संख्या 6,316 है। जिले में मुर्गा, मुर्गी और उनके बच्चों की संख्या 10 लाख 9 हजार 663 तथा बतख और उसके बच्चों की संख्या 4,205 है।
पशुपालक बोले-लगातार बढ़ रहा है दवाओं का खर्च पशुपालकों के अनुसार, विभाग की ओर से मुफ्त मिलने वाला कैल्शियम, कृमिनाशक दवा, दस्त रोकने की दवा तथा सर्दी-बुखार आदि की दवाएं पिछले करीब एक साल से नियमित रूप से नहीं मिल रही हैं। बाजार में कैल्शियम की कीमत करीब 250 से 300 रुपए प्रति लीटर है। डेढ़ ग्राम की कृमिनाशक गोली 30 से 50 रुपए, तीन ग्राम की गोली 60 से 80 रुपये और चार ग्राम की गोली 80 से 100 रुपए तक में मिलती है। दस्त रोकने वाली एक गोली की कीमत करीब 35 से 40 रुपए है। वहीं सर्दी, दस्त और बुखार के इंजेक्शन के लिए 125 से 250 रुपए प्रति वायल तक खर्च करना पड़ रहा है। पशुपालकों का कहना है कि एक पशु को प्रतिदिन करीब 100 एमएल कैल्शियम की खुराक और महीने में एक कृमिनाशक गोली देने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में दवाओं की नियमित खरीद नहीं होने से पशुपालकों का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
मार्च में हुई थी सीमित खरीद, प्रक्रिया जल्द : डॉ अरुण जिला पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अरुण कुमार राम ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले ही जिले में पदभार ग्रहण किया है, इसलिए दवाओं की वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 में पंचायत स्तर पर विशेष पशु चिकित्सा शिविरों के लिए जेम पोर्टल के माध्यम से 3.69 लाख रुपये की दवाओं की खरीद की गई थी। शिविरों के दौरान जरूरत के अनुसार पशुपालकों के बीच दवाओं का वितरण किया गया था।उन्होंने कहा कि विभाग में दवाओं की खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से की जाती है। यदि वर्तमान में दवाओं की कमी है तो आवश्यक दवाओं की खरीद के लिए पहल की जाएगी।