भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता खुला: ट्रंप बोले-चीन से रिश्ते बहुत अच्छे; भारत ने कहा-हमारी विदेश नीति स्वतंत्र

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट, 2026 पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया है। यानी, रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों से अमेरिका में आने वाला सामान पर 100% तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का ट्रंप को अधिकार मिल गया है। इससे रूसी तेल के बड़े खरीदारों भारत व चीन पर 100% टैरिफ की आशंका बढ़ गई है।


इस बीच, भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा कि वह अपने हितों के फैसले किसी दूसरे देश के दबाव में नहीं लेता। विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा, हमारी विदेश नीति स्वतंत्र है। जहां से भी आर्थिक रूप से लाभकारी विकल्प उपलब्ध होंगे, भारत वहां से ऊर्जा खरीदेगा।

विज्ञापन



भारत के कड़े रुख के बीच ट्रंप ने चीन पर डोरे डालने की कोशिश की है। कानून पर हस्ताक्षर करने के बाद ओवल हाउस में एक पत्रकार के सवाल पर ट्रंप ने कहा, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हमारे संबंध अच्छे रहे हैं। वह अगले हफ्ते यहां आएंगे। हमारी बहुत अच्छी मुलाकात होगी। मैं कह सकता हूं कि दूसरों के साथ शायद उतने अच्छे संबंध न हों, लेकिन चीन के साथ संबंध बहुत अच्छे हैं। ट्रंप ने यह भी कहा, चीन हमें बहुत ज्यादा टैरिफ दे रहा है। इससे उन्हें बहुत नुकसान हो रहा था, और मैं ऐसा नहीं करना चाहता था।

विज्ञापन



कब से लागू होगा...30 दिन में कार्रवाई कर सकते हैं ट्रंप


रूस पर वैधानिक प्रतिबंध, टैरिफ, अन्य पाबंदियों का दायरा बढ़ गया है। ईरान पर लागू मौजूदा प्रतिबंधों को भी 5 साल बढ़ाया गया है। हालांकि, कानून किसी देश पर स्वतः 100% शुल्क नहीं लगाता है। फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति ही लेंगे। इस कानून में लागू होने के 30 दिनों में राष्ट्रपति को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।




एक और तनाव दिया...एच-1बी पर एक लाख डॉलर शुल्क एक साल और बढ़ाया


अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एच-1बी वीजा पर एक लाख डॉलर शुल्क वाला कार्यकारी आदेश एक साल के लिए बढ़ा दिया है। हालांकि मामला कोर्ट में है, लेकिन इसे भारतीय पेशेवरों और अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है।  अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, स्वीकृत एच-1बी याचिकाओं में भारत में जन्मे लाभार्थियों की हिस्सेदारी करीब 71% थी, जबकि चीन की हिस्सेदारी करीब 11.7% थी।