तुकाराम मुंढे के ऐक्शन के 100 दिन; 904 छापे, 457 गिरफ्तार और कितने करोड़ की जब्ती
Sep 06, 2026 09:44 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, मुंबई

महाराष्ट्र के एफडीए चीफ के तौर पर तुकाराम मुंढे के ऐक्शन को 100 दिन हो चुके हैं। इन सौ दिनों में बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों को भी नहीं बख्शा गया। एक नजर इन सौ दिनों के रिपोर्ट कार्ड पर…
अपने सख्त ऐक्शन से चर्चा में है तुकाराम मुंढे।
तुकाराम मुंढे पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में हैं। 2005 बैच के आईएएस, तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्चर का चार्ज लेने के बाद से ही लगातार ऐक्शन में हैं। इस दौरान उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में खाने-पीने में मिलावट और सुरक्षा उल्लंघन को लेकर छापेमारी की है। अगर पिछले 100 दिनों की बात करें तो तुकाराम मुंढे की टीम ने पूरे महाराष्ट्र में कुल 904 जगहों पर छापेमारी की है। सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने इस दौरान 457 गिरफ्तारियां भी की हैं, जबकि 34.7 करोड़ रुपए कीमत के खाने-पीने के नकली सामान जब्त किए हैं।
21 साल की नौकरी में 25 ट्रांसफर
तुकाराम मुंढे ने 25 मई को महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर के रूप में जिम्मेदारी संभाली। 21 साल की सर्विस में 25वीं बार उनका ट्रांसफर हुआ है। 25 मई से पद संभालने के दिन से लेकर 6 सितंबर तक मुंढे ने कुल 104 दिन एफडीए प्रमुख के तौर पर काम किया। अपना पद संभालने के बाद, उन्होंने खाद्य सुरक्षा, खाने-पीने के गंदे ठिकानों और मिलावटी उत्पादों पर पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की। इस दौरान अधिकारियों ने 34.7 करोड़ रुपए के नकली, गलत लेबल वाले और नियम तोड़ने वाले खाद्य उत्पाद जब्त किए। जब्त किए गए पदार्थों में नकली पनीर, मिलावटी दूध, गलत लेबल वाले खाना पकाने के तेल और हानिकारक सिंथेटिक रंग शामिल थे। इस कार्रवाई में कुल 457 गिरफ्तारियां हुईं और नियम तोड़ने वाले 322 प्रतिष्ठान तुरंत सील कर दिए गए।
नहीं बख्शे गए बड़े-बड़े नाम
निरीक्षण के दौरान कड़ाई का आलम यह रहा कि बड़े-बड़े नामों को भी बख्शा नहीं गया। बड़े-बड़े आउटलेट्स, खाने-पीने के मशहूर ठिकानों, यहां तक कि आईआईटी बॉम्बे से लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की कैंटीन तक ठिकानों की जद में आए। यहां कैंटीन के अंदर बिना लाइसेंस वाले रसोईघर भी सामने आए। एफडीए के मुताबिक सितंबर 2026 तक,4 महीनों में 12,083 संस्थाओं को नोटिस जारी किया, जिसमें खराब स्वच्छता, प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी और कमजोर कच्चे माल जैसी गंभीर समस्याएं निशाने पर रहीं।
तुकाराम मुंढे ने क्या दिया जवाब
जब तुकाराम मुंढे से उनकी इस आक्रामक कार्रवाई को लेकर सवाल किए गए तो उनका जवाब बेहद साधारण था। उन्होंने कहा कि मैं कोई सेलिब्रिटी नहीं हूं। मैं बस सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अपना कर्तव्य निभा रहा हूं। मुंढे ने कहा कि हम त्योहारों को नियंत्रित नहीं कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि त्योहारों में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थ सुरक्षित हों और 2011 से लागू कानून के अनुरूप हों। यही व्यवस्था शादी समारोह, भंडारा, ईद, क्रिसमस, नववर्ष की पूर्व संध्या के आयोजनों और अन्य समारोहों में भी लागू होती है। उन्होंने यह बात एफडीए द्वारा साल भर के लिए ‘त्योहार प्रवर्तन कैलेंडर’ शुरू करने को लेकर कही।
त्योहारों के लिए सालाना व्यवस्था
मुंढे ने बताया कि नए आदेश के तहत पूरे साल के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाई गई है। इसमें सभी समुदायों और धर्मों के त्योहारों और बड़े आयोजनों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य अधिकारियों, खाद्य विक्रेताओं, कैटरर्स, खाद्य कारोबार संचालकों और आयोजकों की भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना है। मुंढे ने कहा कि यह आदेश भंडारा, प्रसाद या सामुदायिक रूप से भोजन वितरण, गणपति उत्सव या अन्य धार्मिक त्योहारों पर रोक नहीं लगाता है और न ही धार्मिक अनुष्ठानों या परंपराओं में किसी तरह का हस्तक्षेप करता है।