डाबर को बड़ी राहत: '100 फीसदी शुद्ध' दावे को लेकर FSSAI के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और लेबलिंग को लेकर डाबर इंडिया को फिलहाल हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कंपनी को अपने कुछ फूड प्रोडक्ट्स पर ‘100 फीसदी प्योर ’ जैसे दावे इस्तेमाल करने से रोक दिया था.

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और लेबलिंग को लेकर डाबर इंडिया को फिलहाल हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कंपनी को अपने कुछ फूड प्रोडक्ट्स पर ‘100 फीसदी प्योर ’ जैसे दावे इस्तेमाल करने से रोक दिया था.

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Dabur Big Relelief From HC

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और लेबलिंग को लेकर डाबर इंडिया को फिलहाल हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कंपनी को अपने कुछ फूड प्रोडक्ट्स पर ‘100 फीसदी प्योर ’ जैसे दावे इस्तेमाल करने से रोक दिया था.  नियामक की ओर से इस तरह के दावों को लेकर आपत्ति जताई गई थी. 

FSSAI का तर्क था कि किसी खाद्य उत्पाद पर 100 प्रतिशत शुद्ध  लिखना उपभोक्ताओं को उत्पाद की प्रकृति और गुणवत्ता के बारे में भ्रमित कर सकता है. खाद्य उत्पादों की लेबलिंग से जुड़े नियमों के तहत कंपनियों को ऐसे दावे करने से बचना होता है, जिनसे ग्राहक के मन में गलत धारणा पैदा होने की संभावना हो. 

#Breaking
Delhi High Court stays FSSAI order banning Dabur from carrying "100% pure" or "100% Natural" claims on its food products. @DaburIndia@fssaiindiapic.twitter.com/yBOBsDP65H

— Bar and Bench (@barandbench) August 7, 2026

डाबर ने दिल्ली हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा

FSSAI के निर्देश के बाद डाबर ने इस मामले को अदालत के सामने रखा. कंपनी ने नियामक के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अपने पक्ष में दलीलें पेश कीं.

डाबर का कहना है कि उसके उत्पादों पर किए गए दावे मौजूदा कानूनी और नियामक व्यवस्था के अनुरूप हैं. कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने अपने उत्पादों को लेकर जानबूझकर कभी कोई भ्रामक दावा नहीं किया.

कंपनी के मुताबिक, वह खाद्य सुरक्षा और नियामकीय मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि नियामक के निर्देश के बाद कंपनी ने कुछ लेबल और विज्ञापन सामग्री में बदलाव की प्रक्रिया भी शुरू की थी.

हाईकोर्ट ने फिलहाल FSSAI के आदेश पर लगाई रोक

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी. अदालत के इस फैसले के बाद डाबर को अपने फूड प्रोडक्ट्स पर 100 प्रतिशत शुद्ध  दावा जारी रखने की अंतरिम राहत मिल गई है.

इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने अंतिम रूप से यह तय कर दिया है कि 100 फीसदी प्योर का इस्तेमाल हमेशा के लिए वैध है. फिलहाल कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई और निर्णय तक डाबर को राहत दी है.

उपभोक्ताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर लिखे शब्द ग्राहकों के खरीदारी के फैसले को प्रभावित करते हैं. 100 प्रतिशत शुद्ध, ‘नेचुरल’, ‘ऑर्गेनिक’ या इस तरह के अन्य दावे उपभोक्ता के लिए उत्पाद की गुणवत्ता और प्रकृति को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

यही वजह है कि कारण खाद्य नियामक संस्थाएं लेबल और विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों को लेकर लगातार निगरानी करती हैं. किसी दावे से ग्राहक को गलत संदेश मिलने की संभावना हो तो नियामक कंपनी से उसमें बदलाव करने के लिए कह सकता है. 
अगले कदम पर सबकी नजर

दिल्ली हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल डाबर को राहत जरूर मिली है, लेकिन विवाद का अंतिम समाधान अभी बाकी है. आगे की सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि FSSAI का आदेश कानूनी और नियामकीय कसौटियों पर कितना सही है. 

इस मामले का फैसला केवल डाबर के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं होगा, बल्कि खाद्य उद्योग की दूसरी कंपनियों के लिए भी असरदार हो सकता है. खासतौर पर पैकेजिंग और विज्ञापन में 100 प्रतिशत शुद्ध जैसे गुणवत्ता संबंधी दावों के इस्तेमाल को लेकर अदालत का अंतिम रुख भविष्य में उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकता है.

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