105 ई-पैक्स में 73 की ही डेटा एंट्री, कहीं भी नियमित ऑपरेटर की व्यवस्था अब तक नहीं - Banka News
जिले में सहकारिता विभाग से जुड़े पैक्सों के ऑनलाइन कामकाज को गति देने के लिए ई-पैक्स की सुविधा तो उपलब्ध करा दी गई, लेकिन डाटा एंट्री के लिए नियमित ऑपरेटर की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। सरकार की ओर से सभी ई-पैक्स में डाटा ऑपरेटर उपलब्ध कराने की घो
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इसका सीधा असर पैक्सों के डाटा एंट्री सहित अन्य ऑनलाइन कार्यों पर पड़ रहा है। कई पैक्सों में अध्यक्ष या प्रबंधकारी समिति को अपने स्तर से ऑपरेटर की व्यवस्था कर काम चलाना पड़ रहा है। जिले में कुल 189 पैक्स हैं। इनमें 105 ई-पैक्स हैं, जबकि 84 सामान्य पैक्स हैं। अब तक कुल 97 पैक्स का डाटा एंट्री कार्य पूरा हुआ है। इनमें 73 ई-पैक्स और 24 सामान्य पैक्स शामिल हैं। जिले के अभी 92 पैक्स का डाटा एंट्री कार्य बाकी है। विभाग की ओर से शेष पैक्सों का डाटा जल्द पूरा कराने की प्रक्रिया चल रही है। तीन ऑपरेटर के भरोसे ऑनलाइन एंट्री जिला सहकारिता पदाधिकारी प्रफुल्ल चंद्र सिंह ने बताया कि डाटा एंट्री का कार्य प्रगति पर है। जिले में बचे हुए ई-पैक्स और अन्य पैक्स का डाटा जल्द ऑनलाइन दर्ज कर लिया जाएगा। विभाग की ओर से लंबित डाटा एंट्री कार्य को पूरा कराने की प्रक्रिया जारी है। डाटा एंट्री की पूरी प्रक्रिया में एक और बड़ी अड़चन जिले में उपलब्ध ऑनलाइन ऑपरेटरों की कम संख्या है। जानकारी के अनुसार, नाबार्ड की ओर से नियोजित महज तीन डाटा एंट्री ऑपरेटर जिले में कार्य कर रहे हैं। ये ऑपरेटर सहकारिता भवन स्थित बैंक में बैठकर पैक्सों से प्राप्त डाटा की ऑनलाइन एंट्री करते हैं। पैक्स स्तर पर अध्यक्ष या प्रबंधकारी समिति द्वारा ऑपरेटर से डाटा तैयार कराया जाता है। इसके बाद संबंधित डाटा आगे भेजा जाता है और नाबार्ड की ओर से नियोजित ऑपरेटर उसे ऑनलाइन दर्ज करते हैं। जिले में पैक्सों की संख्या के मुकाबले केवल तीन ऑपरेटर होने से डाटा ऑनलाइन करने की प्रक्रिया में स्वाभाविक रूप से समय लग रहा है। 189 पैक्स में 97 का डाटा एंट्री कार्य पूरा होने के बाद अब 92 पैक्स बाकी हैं। इनमें 32 ई-पैक्स और 60 सामान्य पैक्स शामिल हैं। विभाग के सामने अब इन सभी पैक्स का डाटा तैयार कराने के साथ उसे ऑनलाइन दर्ज कराने की चुनौती है। अगर सभी पैक्स को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने का उद्देश्य है, तो केवल ई-पैक्स की सुविधा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए नियमित डाटा ऑपरेटर की व्यवस्था और पर्याप्त संख्या में ऑनलाइन एंट्री करने वाले ऑपरेटर की जरूरत होगी। अंतिम ऑनलाइन एंट्री के लिए सीमित संख्या में ऑपरेटर पर निर्भरता बनी हुई है। ई-पैक्स में 73 का काम पूरा, 32 अभी बाकी सरकार ने पैक्सों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने के लिए ई-पैक्स की सुविधा शुरू की है। इसका उद्देश्य पैक्स से संबंधित कामकाज, रिकॉर्ड और डाटा को ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ना है।
जमीनी स्तर पर सबसे बड़ी समस्या डाटा एंट्री ऑपरेटर की कमी है। जिले में किसी भी ई-पैक्स में नियमित ऑपरेटर नहीं होने के कारण पैक्स अध्यक्षों और प्रबंधकारी समितियों को अपने स्तर से ऑपरेटर की व्यवस्था करनी पड़ रही है। यानी डिजिटल व्यवस्था के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पूरी तरह पैक्स स्तर पर आ गई है। इससे छोटे और सीमित संसाधन वाले पैक्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। पैक्स अध्यक्ष की ओर से रखे गए ऑपरेटर को मिलने वाला भत्ता भी अध्यक्ष अपने स्तर से उपलब्ध कराते हैं। जिले के 105 ई-पैक्स में अब तक 73 पैक्स का डाटा एंट्री कार्य पूरा हो चुका है। 32 ई-पैक्स का डाटा अभी ऑनलाइन दर्ज किया जाना बाकी है। इसी तरह 84 सामान्य पैक्स में 24 का डाटा एंट्री कार्य पूरा हुआ है, जबकि 60 पैक्स का काम लंबित है। इस तरह ई-पैक्स की तुलना में सामान्य पैक्स में डाटा एंट्री का काम काफी पीछे है। 189 में से करीब आधे पैक्स का ही डाटा ऑनलाइन दर्ज हो सका है। शेष पैक्सों में डाटा तैयार करने से लेकर उसे ऑनलाइन दर्ज कराने तक की प्रक्रिया पूरी की जानी है।