नीम करोली बाबा के अंतिम शब्द क्या थे? पढ़िए 11 सितंबर को शरीर त्यागने से पहले की पूरी लीला
Published: Friday, September 11, 2026, 13:22 [IST]
Neem Karoli Baba Samadhi Diwas: नीम करोली बाबा से जुड़ी कहानियां और उनके जीवन के प्रसंग आज भी उनके भक्तों के बीच गहरी श्रद्धा के साथ सुने और शेयर किए जाते हैं। खासकर उनके जीवन के आखिरी समय से जुड़ी बातें लोगों के मन में कई सवाल छोड़ती हैं। आज 11 सितंबर को नीम करोली बाबा का समाधि दिवस है, और इस मौके पर सोशल मीडिया पर महाराज जी के शरीर त्यागने से पहले की एक प्रचलित कथा फिर चर्चा में आ गई है।
महिमा मोर नाम की एक इंस्टाग्राम यूजर ने अपने हैंडल पर यह कहानी शेयर की है। उनके मुताबिक, महाराज जी के आखिरी समय में हुई कुछ घटनाएं ऐसी थीं, जिन्हें भक्त उनकी महासमाधि से पहले की लीला के रूप में देखते हैं। इस कथा में उनकी एक डायरी, एक खास यात्रा, डॉक्टर से हुई बातचीत और अस्पताल में बोले गए अंतिम शब्दों का जिक्र है।
इंस्टाग्राम यूजर ने शेयर की पूरी कहानी
महिमा मोर नाम की इंस्टाग्राम यूजर ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर नीम करोली बाबा के आखिरी समय से जुड़ी यह कथा साझा की है। उन्होंने बताया कि 11 सितंबर महाराज जी का समाधि दिवस है और उन्हें मानने वाले लोगों को उनकी महासमाधि से पहले की इस कहानी के बारे में जानना चाहिए। उनकी ओर से साझा की गई कथा के अनुसार, शरीर त्यागने से पहले महाराज जी के कुछ काम और शब्द ऐसे थे, जिन्हें भक्त आज भी विशेष संकेत के रूप में देखते हैं।
ये भी पढ़ें: हनुमान अंश के बाद चर्चा में नीब करोरी बाबा का परिवार, फैमिली में कौन-कौन? कहां रहते हैं बच्चे?
रोज राम-नाम लिखते थे महाराज जी
इस कथा के मुताबिक, नीम करोली बाबा रोज एक डायरी में तारीख लिखकर राम-नाम लिखा करते थे। बताया जाता है कि महाराज जी ने 10 सितंबर तक अपनी डायरी में राम-नाम लिखा। इसके बाद जब 11 सितंबर आया तो उन्होंने डायरी में सिर्फ उस दिन की तारीख लिखी। कहानी के अनुसार, 11 सितंबर का पन्ना नीम करोली बाबा ने खाली छोड़ दिया था।
श्री मां को दे दी डायरी
महिमा मोर द्वारा साझा की गई कथा में आगे बताया गया है कि महाराज जी ने वह डायरी श्री मां को दे दी। उन्होंने कथित तौर पर श्री मां से कहा कि आज से यह डायरी तुम्हारी हुई, मां। भक्त इस घटना को भी महाराज जी के आखिरी समय से जुड़े खास प्रसंग के रूप में याद करते हैं।
कैंची से मथुरा के लिए रवाना हुए
डायरी देने के बाद महाराज जी कैंची से मथुरा पहुंचे। सोशल मीडिया पर शेयर की गई कहानी के अनुसार, इस दौरान उन्होंने कहा था कि अब मैं सेंट्रल जेल से रिहा हो रहा हूं। भक्त इस कथन को उनके शरीर त्यागने से पहले कही गई एक गहरी बात के रूप में देखते हैं।
कथा के अनुसार, मथुरा पहुंचने के बाद नीम करोली बाबा ने डॉक्टर से अपना चेकअप कराया। बताया जाता है कि डॉक्टर ने जांच के बाद उनसे कहा कि वह पूरी तरह ठीक हैं। लेकिन महाराज जी ने कथित तौर पर कहा कि अब इस शरीर को बदलने का समय आ गया है। महिमा मोर द्वारा साझा की गई कहानी में इस बातचीत को महाराज जी के शरीर त्यागने से पहले की महत्वपूर्ण घटनाओं में बताया गया है।
अस्पताल में क्या थे महाराज जी के अंतिम शब्द?
इस कथा के अनुसार, अस्पताल में नीम करोली बाबा ने अपने अंतिम समय में "जगदीश हरे" कहा। बताया जाता है कि महाराज जी ने यह शब्द तीन बार दोहराए। इसके बाद उन्होंने इस शरीर को हमेशा के लिए त्याग दिया।
नोट: इस लेख में बताई गई घटनाएं महिमा मोर नाम की इंस्टाग्राम यूजर द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई कथा पर आधारित हैं। इन्हें भक्तों के बीच प्रचलित श्रद्धा और आस्था से जुड़ी कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
ये भी पढ़ें: फिल्म हनुमान अंश ने बनाया 113 सालों का सबसे बड़ा रिकॉर्ड! बॉलीवुड के इतिहास में कभी नहीं बना ऐसा कीर्तिमान