भोपाल समाचार कर्मचारी: सेवा, स्थानांतरण एवं अनुकंपा नियुक्ति 11 मामलों पर विशेष रिपोर्ट, हाई कोर्ट ऑर्डर

भोपाल, 24 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर एवं इंदौर पीठ द्वारा 23 सितंबर 2026 को शासकीय कर्मचारियों की सेवा, स्थानांतरण एवं मृत कर्मचारियों की आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति (Service, Transfer & Compassionate Appointment Matters) से संबंधित 11 याचिकाओं पर विस्तृत और महत्त्वपूर्ण आदेश पारित किए गए। इन सभी मामलों का संपूर्ण विवरण, पक्षकारों के नाम, संबंधित विभाग, वकीलों के तर्क, लागू नीतियाँ व कानून, तथा न्यायालय के निर्णयों की विस्तृत रिपोर्ट नीचे दी जा रही है:

चौखेलाल पटेल ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत WP 39485/2026 के माध्यम से याचिका दायर की। उन्होंने न्यायालय को बताया कि दिनांक 30 जून 2026 को उनका स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया गया और दिनांक 9 सितंबर 2026 को उन्हें कार्यमुक्त भी कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने न्यायालय से प्रार्थना की कि स्थानांतरण एवं कार्यमुक्ति के आदेश पर रोक लगाई जाए तथा विभाग के समक्ष लंबित उनके अभ्यावेदन का शीघ्र निराकरण करवाया जाए।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता सुश्री सुधा गौतम ने प्रस्तुत किया कि अपनी शिकायतों के निवारण हेतु याचिकाकर्ता ने अभ्यावेदन (Annexure P/5) दिया है जो प्रतिवादी क्र. 2 के समक्ष विचारणाधीन है। शासकीय अधिवक्ता श्री विजयेन्द्र सिंह चौधरी ने समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए जाने पर कोई आपत्ति व्यक्त नहीं की।

न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह) ने याचिका का निपटारा करते हुए प्रतिवादी क्र. 2/सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि वह आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर सकारण आदेश पारित कर अभ्यावेदन का निराकरण करे। इसके अतिरिक्त, आदेश की तिथि से 30 दिनों की अवधि या अभ्यावेदन के निराकरण होने तक (जो भी पहले हो), दोनों पक्षों को वर्तमान यथास्थिति (status quo) बनाए रखने का निर्देश दिया गया।

2. सुषमा बाई मार्को बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (WP 39489/2026)

MP High Court Directs Jabalpur Divisional Commissioner on Service Reinstatement Appeal: WP 39489/2026

सुषमा बाई मार्को ने अपनी सेवा से बर्खास्तगी के खिलाफ उच्च न्यायालय में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत WP 39489/2026 दायर की। उन्होंने याचिका में बताया कि प्रतिवादी क्र. 3 द्वारा दिनांक 14 अगस्त 2026 को उनकी बर्खास्तगी का आदेश पारित किया गया और दिनांक 21 अगस्त 2026 को एक और आदेश जारी किया गया। उन्होंने न्यायालय से इन आदेशों को निरस्त कर सेवा में पुनर्बहाली (Reinstatement in Service) की गुहार लगाई। याचिकाकर्ता ने बताया कि इस कार्रवाई के विरुद्ध उन्होंने संभागायुक्त (जबलपुर संभाग) के समक्ष प्रशासनिक अपील प्रस्तुत की है, जो अभी तक लंबित है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री आशीष रावत ने तर्क दिया कि संभागायुक्त, जबलपुर संभाग के समक्ष अपील (Annexure P/10) विचारणाधीन है, अतः अदालत, प्रशासन को उस पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दे। शासकीय अधिवक्ता सुश्री स्वाति असीम जॉर्ज ने समयबद्ध सुनवाई पर अपनी सहमति जताई।

न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह) ने याचिका का निष्पादन करते हुए संभागायुक्त, जबलपुर संभाग को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता को सुनवाई का पूरा अवसर प्रदान करते हुए 4 महीने की समयावधि के भीतर कानून अनुसार सकारण आदेश पारित कर लंबित अपील का निपटारा करें।

3. मोहिनी सोलंकी बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (WP 39553/2026)

MP High Court 3 Month Mandate for Compassionate Appointment: Mohini Solanki WP 39553/2026 मोहिनी सोलंकी, जिनके पिता स्व. भूरराम सोलंकी (Shri Bhujram Solanki) सहायक शिक्षक (Assistant Teacher) के पद पर कार्यरत थे और सेवाकाल के दौरान 19 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया था, ने अनुकंपा नियुक्ति की आस में इंदौर पीठ के समक्ष WP 39553/2026 दायर की। पिता के निधन के बाद परिवार में विधवा माता और चार बच्चों में मोहिनी ही एकमात्र पात्र सदस्य थीं। उन्होंने 15 दिसंबर 2025 को अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन दिया था, परंतु 1 सितंबर 2026 को पुनः अभ्यावेदन देने के बावजूद अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं श्री मोनार्क शास्त्री व सुश्री मानसी अग्रवाल ने तर्क दिया कि अनुकंपा नियुक्ति नीति का मुख्य उद्देश्य दिवंगत शासकीय सेवक के आश्रित परिवार को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करना है, और प्रशासनिक देरी इस नीति के उद्देश्य को ही समाप्त कर देती है। राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता श्री राजवर्धन गावड़े ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी शीघ्र कार्रवाई करेंगे।

न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी) ने याचिका का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि प्रतिवादी क्र. 3 आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से अधिकतम 3 महीने (outer limit of three months) के भीतर अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर सकारण और स्पष्ट आदेश पारित कर इसका निराकरण करे।

4. श्रीमती नंदा पंचभाई बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (WP 39614/2026)

MP High Court Dismisses Teacher Transfer Relief Sausar Pandhurna WP 39614/2026 शिक्षिका श्रीमती नंदा पंचभाई ने अपने स्थानांतरण आदेश के खिलाफ WP 39614/2026 के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उन्होंने 11 सितंबर 2026 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसके द्वारा सौसर से पांढुर्णा किए गए उनके स्थानांतरण के विरुद्ध प्रस्तुत अभ्यावेदन निरस्त कर दिया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि वर्ष 2025 में कोर्ट ने उन्हें अभ्यावेदन के निर्णय होने तक सौसर में ही बने रहने की राहत दी थी, लेकिन अधिकारियों ने अभ्यावेदन तय करने में एक साल से अधिक का समय लगा दिया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री विनय प्रताप सिंह ने तर्क दिया कि प्रशासनिक विलंब के कारण याचिकाकर्ता को परेशानी हुई। शासकीय अधिवक्ता श्री सुमित रघुवंशी ने राज्य का पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान जब पीठ ने पूछा कि याचिकाकर्ता सौसर में कुल कितने वर्षों से पदस्थ हैं, तो उनके अधिवक्ता कोई स्पष्ट समयावधि नहीं बता सके।

न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति विशाल धगट) ने पाया कि याचिकाकर्ता ने प्रशासनिक देरी का लाभ उठाकर सौसर में लंबा समय बिताया है और सक्षम प्राधिकारी ने उनके अभ्यावेदन पर विधिवत विचार कर ही इसे निरस्त किया है। सौसर में कुल कार्यकाल की जानकारी न दे पाने के कारण न्यायालय ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज (dismissed) कर दी।

5. रमेश सिंह तोमर बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (WP 39620/2026)

MP High Court Upholds Contractual Employee Transfer Harda to Khargon WP 39620/2026: हरदा में पदस्थ संविदा कर्मचारी रमेश सिंह तोमर ने अपने स्थानांतरण आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में WP 39620/2026 दायर की। उन्होंने 17 सितंबर 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी, जिसके तहत उनका स्थानांतरण हरदा से खरगोन कर दिया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस स्थानांतरण में कोई प्रशासनिक आवश्यकता (administrative exigency) नहीं दर्शाई गई है और उनका अभ्यावेदन भी बिना निर्णय के लंबित है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री नित्य नंद मिश्रा ने प्रस्तुत किया कि बिना किसी ठोस कारण के संविदा कर्मचारी का स्थानांतरण अनुचित है। राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता श्री सुमित रघुवंशी ने स्पष्ट किया कि खरगोन में स्वीकृत पद रिक्त हैं और स्थानांतरण नियमानुसार किया गया है। पीठ द्वारा हरदा में कुल पदस्थापना की अवधि पूछे जाने पर स्वीकार किया गया कि वे काफी लंबे समय से हरदा में ही कार्यरत हैं।

न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति विशाल धगट) ने माना कि स्थानांतरण आदेश में कोई वैधानिक त्रुटि या दुर्भावना नहीं है और याचिकाकर्ता दीर्घकाल से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। अतः न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया।

6. भगवत अहिरवार बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (WP 39641/2026)

MP High Court Status Quo Order Gram Panchayat Dariyapura Tikamgarh WP 39641/2026: ग्राम पंचायत दरियापुरा (जनपद पंचायत पलेरा, जिला टीकमगढ़) से संबंधित भगवत अहिरवार ने उच्च न्यायालय में WP 39641/2026 दायर की। उन्होंने आदेश दिनांक 17 जून 2025 एवं परिपत्र दिनांक 24 जून 2025 को चुनौती देते हुए न्यायालय से प्रार्थना की कि उन्हें उनकी मूल पदस्थापना ग्राम पंचायत दरियापुरा में ही कार्य करने की अनुमति दी जाए। याचिकाकर्ता ने बताया कि इस संबंध में दिया गया उनका अभ्यावेदन (Annexure P/5) अधिकारियों के समक्ष लंबित है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री धर्मेन्द्र पटेल ने तर्क दिया कि लंबित अभ्यावेदन पर जल्द निर्णय लिया जाना आवश्यक है। शासकीय अधिवक्ता श्री विजयेन्द्र सिंह चौधरी ने समयबद्ध निराकरण पर सहमति व्यक्त की।

न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह) ने याचिका का निपटारा करते हुए प्रतिवादी क्र. 3 को निर्देश दिया कि वह 30 दिनों के भीतर सकारण आदेश पारित कर अभ्यावेदन का निराकरण करे। साथ ही, आदेश की तिथि से 30 दिनों की अवधि या अभ्यावेदन के निर्णय तक दोनों पक्षों को वर्तमान यथास्थिति (status quo) बनाए रखने का आदेश दिया गया।

7. ज्ञान सिंह पंवार बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (WP 39681/2026)

MP High Court Forest Range Officer Temagaon Harda Transfer Stay WP 39681/2026: वन परिक्षेत्र टेमागांव (वन मंडल हरदा, जिला हरदा) में वन क्षेत्रपाल (Forest Range Officer) के पद पर कार्यरत ज्ञान सिंह पंवार ने अपने स्थानांतरण के खिलाफ WP 39681/2026 के तहत याचिका प्रस्तुत की। उन्होंने 18 सितंबर 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश को निरस्त करने तथा टेमागांव में ही पदस्थ रहने की गुहार लगाई और बताया कि विभागीय अधिकारियों को दिया गया उनका अभ्यावेदन (Annexure P/4) अभी तक लंबित है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री संजय सिंह ने तर्क दिया कि लंबित अभ्यावेदन पर निर्णय होने तक स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए। शासकीय अधिवक्ता श्री विजयेन्द्र सिंह चौधरी ने अभ्यावेदन के समयबद्ध निपटारे के निर्देश पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की।

न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह) ने याचिका का निष्पादन करते हुए सक्षम प्राधिकारी (प्रतिवादी क्र. 2) को 30 दिनों के भीतर सकारण आदेश पारित कर अभ्यावेदन तय करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, जब तक अभ्यावेदन का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक याचिकाकर्ता की पदस्थापना के संबंध में यथास्थिति (status quo) बनाए रखने का आदेश दिया।

8. श्रीमती दर्शना सोनी बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (WP 39713/2026)

MP High Court Damoh School Teacher Transfer and Salary Release WP 39713/2026: दमोह स्थित शासकीय संदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में उच्च माध्यमिक शिक्षक (श्रेणी-1, अंग्रेजी विषय) के पद पर पदस्थ श्रीमती दर्शना सोनी ने अपने स्थानांतरण एवं रोके गए वेतन को लेकर WP 39713/2026 दायर की। उन्होंने 30 जून 2026 के स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की नीति के अनुसार उन्होंने एजुकेशन पोर्टल 3.0 (Education Portal 3.0) पर आपत्ति दर्ज कराई थी तथा अभ्यावेदन भी दिया था, जिसका निराकरण नहीं किया गया है। साथ ही अगस्त 2026 का उनका वेतन भी रोक लिया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री महेन्द्र पटेरिया ने तर्क दिया कि नीतिगत प्रावधानों के तहत अभ्यावेदन का निराकरण अनिवार्य है और बकाया वेतन जारी किया जाना चाहिए। शासकीय अधिवक्ता श्री विजयेन्द्र सिंह चौधरी ने नियमानुसार त्वरित कार्यवाही का आश्वासन दिया।

न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह) ने प्रतिवादी क्र. 2 को 30 दिनों के भीतर सकारण आदेश द्वारा अभ्यावेदन का निपटारा करने का निर्देश दिया। निर्णय होने तक याचिकाकर्ता की दमोह स्थिति पर यथास्थिति (status quo) बनाए रखने का स्थगन प्रदान किया गया।

9. अशोक चौहान बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (WP 39781/2026)

MP High Court Agriculture Dept Transfer Stay Shajapur WP 39781/2026: जिला शाजापुर में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत अशोक चौहान ने अपने स्थानांतरण आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय (इंदौर पीठ) में WP 39781/2026 दायर की। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश उनके और कृषि योजना के हित में नहीं है, तथा इस संबंध में प्रस्तुत अभ्यावेदन पर विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री मन्नू माहेश्वरी ने प्रस्तुत किया कि यह मामला पूर्णतः सह-याचिकाकर्ता महेंद्र कुमार लेवे (WP 39782/2026) के समान है और वही राहत यहाँ भी दी जानी चाहिए। शासकीय अधिवक्ता श्री राजवर्धन गावड़े ने समान निर्देशों पर सहमति जताई।

न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी) ने WP 39782/2026 में पारित आदेश की शर्तों को लागू करते हुए याचिकाकर्ता को 10 दिनों में नया अभ्यावेदन देने की स्वतंत्रता दी, जिस पर प्रतिवादी क्र. 2 को 6 सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया गया। तब तक याचिकाकर्ता को शाजापुर में ही पदस्थ रहने का अंतरिम स्थगन (interim stay) प्राप्त हुआ।

10. महेंद्र कुमार लेवे बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (WP 39782/2026)

MP High Court Pulses Scheme Rationalisation Transfer Stay Shajapur WP 39782/2026: शाजापुर में 'दलहन योजना' (Pulses Scheme) के तहत संविदा आधार पर कार्यरत महेंद्र कुमार लेवे ने अपने स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए WP 39782/2026 याचिका दायर की। उन्होंने बताया कि 17 सितंबर 2026 को उनका स्थानांतरण शाजापुर से मंदसौर युक्तीकरण (rationalisation) के नाम पर कर दिया गया। प्रशासन का तर्क था कि योजना शाजापुर में बंद या निष्क्रिय है, जबकि हकीकत में योजना पूरी तरह कार्यरत है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री मन्नू माहेश्वरी ने महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश करते हुए बताया कि स्वयं उप संचालक कृषि (शाजापुर) ने निदेशक कृषि (भोपाल) को पत्र लिखकर स्थानांतरण रद्द करने की सिफारिश की थी। पत्र में स्पष्ट था कि शाजापुर में योजना सक्रिय है और महेंद्र लेवे की जरूरत है, जबकि मंदसौर में यह योजना क्रियाशील नहीं है। शासकीय अधिवक्ता श्री राजवर्धन गावड़े ने प्रशासनिक समायोजन का पक्ष रखा।

न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी) ने पाया कि जब स्वयं जिला प्रमुख ने माना है कि याचिकाकर्ता की शाजापुर में उपस्थिति योजना और किसानों के हित में है, तो स्थानांतरण का आधार विवादास्पद सिद्ध होता है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को 10 दिनों में नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने और विभाग को 6 सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया। तब तक याचिकाकर्ता को शाजापुर में ही बने रहने का अंतरिम स्थगन (interim stay) प्रदान किया गया।

11. राज कुमार यादव बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (WP 39788/2026)

MP High Court Forest Range Officer Premature Transfer Relief Waidhan to Jabalpur WP 39788/2026: वन परिक्षेत्र बैढ़न (Waidhan) में वन क्षेत्रपाल (Forest Range Officer) के पद पर कार्यरत राज कुमार यादव ने अपने समयपूर्व स्थानांतरण के खिलाफ WP 39788/2026 दायर की। उन्होंने 18 सितंबर 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए न्यायालय को बताया कि उन्हें 17 जून 2025 को बैढ़न में पदस्थ किया गया था और मात्र 1 वर्ष की अल्प अवधि में बिना किसी प्रशासनिक आवश्यकता के उनका स्थानांतरण जबलपुर कर दिया गया। बैढ़न में उनके स्थान पर किसी की नियुक्ति भी नहीं की गई है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री संजय सिंह ने तर्क दिया कि अल्पकाल में किया गया यह स्थानांतरण नीतिगत नियमों के विपरीत है और अभ्यावेदन लंबित है। शासकीय अधिवक्ता श्री प्रवीण नामदेव ने प्रशासनिक प्रक्रिया का तर्क दिया।

न्यायालय (माननीय न्यायमूर्ति विशाल धगट) ने याचिका का निपटारा करते हुए सक्षम प्राधिकारी को 30 दिनों में सकारण आदेश द्वारा अभ्यावेदन तय करने का निर्देश दिया। अभ्यावेदन का निराकरण होने तक याचिकाकर्ता को वन परिक्षेत्र - बैढ़न (Waidhan) में ही कार्य करते रहने की अनुमति दी गई।