सड़क हादसे के बाद अब नहीं काटने होंगे अस्पतालों के चक्कर, बस 112 पर कॉल करते ही मिलेगा 1.5 लाख तक मुफ्त इलाज - Haribhoomi

बिहार में सड़क दुर्घटना होने पर अब अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सिर्फ डायल 112 पर कॉल करें और पाएं 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज।

Bihar 112 road accident scheme

बिहार में सड़क दुर्घटना होने पर अब अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सिर्फ डायल 112 पर कॉल करें और पाएं 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज।

  • Published: 02 Aug 2026, 05:25 PM IST
  • Last Updated: 02 Aug 2026, 05:25 PM IST

Bihar 112 road accident scheme: बिहार में सड़क दुर्घटनाओं के शिकार होने वाले पीड़ितों के लिए एक बेहद राहतभरी और उपयोगी पहल शुरू की गई है। अब सड़क हादसे के बाद इलाज के लिए इधर-उधर भटकने की कोई जरूरत नहीं है। इसके लिए पीड़ित या मदद करने वाले व्यक्ति को सिर्फ 'डायल 112' पर एक सिंगल कॉल करनी होगी। इस पर सूचना मिलते ही बिहार पुलिस तुरंत सक्रिय हो जाएगी और घायल को कम से कम समय में नजदीकी अस्पताल पहुंचाने के साथ एंबुलेंस की त्वरित व्यवस्था करवाएगी। इतना ही नहीं, इस प्रक्रिया के तहत पात्र मरीजों को 1.5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का लाभ भी मिलेगा।

इस तरह काम करता है नया इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम
सरकार की यह विशेष सुविधा इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ERSS) के तहत कार्य करती है। इस आधुनिक नेटवर्क को नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के डिजिटल पोर्टल के साथ जोड़ा गया है।

इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क दुर्घटना के तुरंत बाद घायल व्यक्ति को बिना एक भी पल गंवाए अस्पताल की सहायता मिल सके। समय पर इलाज मिलने से कई गंभीर मामलों में लोगों की जान बचाई जा सकती है।

कॉल करने से लेकर अस्पताल पहुंचने तक की प्रक्रिया
यदि कहीं दुर्घटना होती है, तो सबसे पहले 112 नंबर पर संपर्क करना होगा। कॉल कनेक्ट होते ही सिस्टम तुरंत उस क्षेत्र के नजदीकी अस्पताल और एंबुलेंस की जानकारी दे देगा।

इसके साथ ही स्थानीय पुलिस भी बिना देरी के मौके पर पहुंचेगी। घायल को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया जाएगा और वहां बिना किसी कागजी अड़चन के तुरंत इलाज शुरू कर दिया जाएगा। यह सारी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होती है, जिससे तीमारदारों को असुविधा न हो।

प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत 1.5 लाख का मुफ्त इलाज
इस योजना के अंतर्गत सड़क हादसे में घायल होने वाले हर पात्र व्यक्ति को प्रधानमंत्री राहत योजना के जरिए 1.5 लाख रुपये तक का बिल्कुल मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाता है।

इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि पीड़ित पक्ष को अस्पताल में भर्ती होने के वक्त एक भी रुपया एडवांस जमा करने की जरूरत नहीं होती। अस्पताल फौरन इलाज शुरू करता है और आगे की औपचारिकताएं तय नियमों के तहत पूरी की जाती हैं।

'गोल्डन आवर' में इलाज मिलने से बच जाती है जान
बिहार पुलिस के एडीजी (ट्रैफिक) सुधांशु कुमार के अनुसार, किसी भी सड़क हादसे के बाद का पहला एक घंटा यानी 'गोल्डन आवर' बेहद महत्वपूर्ण और नाजुक समय होता है।

यदि इस दौरान घायल व्यक्ति को सही और त्वरित चिकित्सा मिल जाए, तो उसके बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसी उद्देश्य के साथ इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और तेज बनाया गया है।

किस-किस को मिलेगा इस योजना का पूरा लाभ?
इस योजना का दायरा काफी व्यापक है। सड़क दुर्घटना का शिकार होने वाला कोई भी व्यक्ति इसका लाभ उठा सकता है।

इसमें पैदल चलने वाले राहगीर, साइकिल और बाइक चालक, कार सवार तथा अन्य किसी भी वाहन से दुर्घटना का शिकार हुए लोग शामिल हैं। यह सुविधा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ आयुष्मान भारत से जुड़े चुनिंदा निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध है।

फरवरी से लागू है योजना, पर जानकारी का अभाव
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह व्यवस्था इसी साल 13 फरवरी 2026 से बिहार में लागू हो चुकी है। हालांकि, अब तक केवल 82 लोगों ने ही इसका लाभ उठाया है।

अधिकारियों का मानना है कि इस योजना का लाभ कम लोगों तक पहुंचने की मुख्य वजह आम जनता के बीच इसकी जानकारी और जागरूकता की कमी है।

मदद करने वालों (Good Samaritan) को पूरी कानूनी सुरक्षा
पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि सड़क हादसा देखकर घबराएं नहीं और तुरंत 112 पर फोन करें।

यदि कोई आम नागरिक किसी घायल की मदद करता है, तो उसे किसी भी तरह की कानूनी झंझट या पुलिस की पूछताछ का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने ऐसे मददगारों यानी 'गोल्ड सेमेरिटन' (Good Samaritan) को पूरी कानूनी सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान किया है।

इस नई व्यवस्था से मिलने वाले बड़े फायदे
इस उन्नत व्यवस्था से सड़क हादसे के बाद अस्पताल पहुंचने और इलाज शुरू होने में लगने वाला इंतजार का समय काफी कम हो जाएगा। घायलों को तुरंत एंबुलेंस और समय पर इलाज मिलने से आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से सड़क हादसों में होने वाली मौतों के आंकड़ों में कमी लाई जा सकेगी।