होर्मुज में तनाव, सऊदी से सप्लाई कट! 119 डॉलर के पार पहुंचा क्रूड ऑयल, क्या भारत में महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल?

Crude Oil Price Hike: दुनियाभर के तेल बाजार में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी संकट ने एक बार फिर दुनिया को मार्च 2026 की उस स्थिति की याद दिला दी है, जब कच्चे तेल के दाम $115 के पार चले गए थे. अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो ब्रेंट क्रूड के दाम अप्रैल की तरह $126 प्रति बैरल तक भी पहुंच सकते हैं.

आज 15 सितंबर को ब्रेंट क्रूड का भाव 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है. वहीं, भारतीय बास्केट के लिए कच्चे तेल की कीमत $119.69/बैरल तक पहुंच गई है. आइए समझते हैं कि वैश्विक मोर्चे पर ऐसा क्या हुआ है और इसका आपकी जेब और पेट्रोल-डीजल के दामों पर क्या असर पड़ेगा.

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होर्मुज और सऊदी में क्या हुआ, क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

कच्चे तेल की सप्लाई लाइन पर दो बड़े झटके लगे हैं. पहला होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले का झटका है. ईरान ने इस रणनीतिक रास्ते पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है और जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. दूसरी वजह है सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद करना. ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने अस्थायी रूप से ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद कर दिया. अगस्त में सऊदी का तेल उत्पादन घटकर 6.2 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया है, जो 2016 के बाद से सबसे निचला स्तर है. सप्लाई घटने और अनिश्‍च‍ितता के चलते पिछले ढाई महीनों में ब्रेंट क्रूड के दाम 50% से भी ज्यादा चढ़ चुके हैं.

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रूस कैसे आएगा भारत के काम?
अमेरिकी दबाव और ग्‍लोबल संकट के बीच भारत का पुराना मित्र रूस एक बार फिर ढाल बनकर सामने आया है. दिल्ली में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने स्पष्ट किया कि मॉस्को भारत को उसकी जरूरत के मुताबिक तेल की सप्लाई जारी रखने के लिए तैयार है.

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रूस का मानना है कि रूसी कच्चे तेल के बिना ग्लोबल एनर्जी मार्केट स्थिर नहीं रह सकता. दिलचस्प बात यह भी है कि यूक्रेन हमलों के कारण रूसी रिफाइनरीज प्रभावित होने की वजह से, भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइन कर वापस रूस को भी सप्लाई कर रहा है. CREA की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में रूस ने भारत से 1.72 लाख टन तेल उत्पाद खरीदे थे.

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या पड़ेगा असर?
अभी देश में पेट्रोल की कीमतें 101 से 116 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतें 95 से 104 रुपये प्रति लीटर के बीच चल रही हैं. भारतीय तेल कंपनियों के लिए कच्चे तेल की लागत (Indian Basket) $120 के पास पहुंच रही है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता नहीं आई और भारतीय बास्केट का औसत मूल्य $110-$120 के ऊपर बना रहा, तो तेल कंपनियों पर मार्जिन दबाव बढ़ेगा.

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हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी जनता की जरूरतों को प्राथमिकता देगा, लेकिन अगर ब्रेंट क्रूड $120 के पार बना रहता है, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में 2 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.