पीएम मोदी के 'मन की बात' का 137वां एपिसोड: 'नशा मुक्त युवा-विकसित भारत' अभियान से लेकर 'वोकल फॉर लोकल' तक, पीएम ने देशवासियों से साझा किए कई अहम विचार - Up18 News
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 137वें संस्करण के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ अभियान, पीएम स्वनिधि योजना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे तमाम महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा कि देश के युवा अब सकारात्मक बदलाव और राष्ट्र निर्माण की दिशा में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
इतिहास सीखने के लिए डिजिटल प्रयास की सराहना
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने मुंबई के कृष्णा शेषाद्रि के एक अनूठे प्रयास का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोग वेबसाइट www.bharatrajya.com पर जाकर कोई भी एक साल चुन सकते हैं और यह जान सकते हैं कि उस समय भारत के किस हिस्से पर किसने शासन किया था। पीएम ने कहा कि यह कोशिश न सिर्फ इतिहास के विद्यार्थियों के लिए बेहद फायदेमंद है, बल्कि इससे सभी को बेहद दिलचस्प तरीके से इतिहास सीखने में मदद मिलती है।
’नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ का संकल्प
नशा मुक्ति अभियान पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ अभियान आज पूरे देश में तेजी से जोर पकड़ रहा है। इसका साफ और स्पष्ट लक्ष्य है— नशा-मुक्त युवा और नशा-मुक्त भारत। बड़ी संख्या में लोग और खासकर युवा वर्ग इस बड़े अभियान का हिस्सा बन चुके हैं। यह भारत के युवाओं के स्वास्थ्य, खुशी और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हम सबका एक सामूहिक संकल्प है।
त्योहारों का महत्व और ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह महीना ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’, ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ और ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ की वजह से बेहद खास है। स्वतंत्रता दिवस और ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ जैसे ऐतिहासिक मौके हर नागरिक के दिल में गर्व की भावना भरते हैं, जिसे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने और ज्यादा मजबूत किया है। इसके साथ ही ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ इस वर्ष को और भी अधिक अहम बनाती है। ‘सूर्यपथ तिरंगा’ के जरिए 8 करोड़ से अधिक तिरंगा सेल्फी अपलोड की गई हैं।
पीएम स्वनिधि योजना से सशक्त होती महिलाएं
महिला सशक्तिकरण का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना के कुल लाभार्थियों में से लगभग 46 फीसदी महिलाएं हैं। यानी देश भर में करीब 35 लाख महिलाएं इस योजना के जरिए अपने छोटे-छोटे कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं। गाजियाबाद की बबीता शर्मा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह पूजा-पाठ की चीजों का एक छोटा सा स्टॉल लगाती थीं, जिन्हें इस योजना के जरिए आर्थिक मदद मिली। इसी तरह बेंगलुरु की टी.एस. निंगम्मा और उनके पति ने इडली-डोसा का बिजनेस बढ़ाने के लिए इस योजना का लाभ उठाया। पीएम ने कहा कि जब किसी महिला का कारोबार बढ़ता है, तो उसके पूरे परिवार का भविष्य बेहतर होता है, बच्चों की शिक्षा में सुधार होता है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
अमरनाथ यात्रा और स्वच्छता की मिसाल
स्वच्छता के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब स्वच्छता हर नागरिक की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता बन जाती है, तो यह पूरी जगह की पहचान बदल देती है। इस साल की अमरनाथ यात्रा के दौरान हमने स्वच्छता के प्रेरक उदाहरण देखे, जहां हजारों सफाई कर्मियों ने कठिन रास्तों पर दिन-रात सेवा की और 400 मीट्रिक टन से ज्यादा कचरा इकट्ठा करके उसका निपटान किया। इस दौरान 16,000 से अधिक लोगों ने स्वच्छता की शपथ ली और 10,000 से ज्यादा लोगों को ‘जिम्मेदार यात्री’ (Responsible Yatri) का प्रमाण पत्र मिला।
’मिशन शक्तिसैट’ और अंतरिक्ष में बेटियों की उड़ान
युवाओं और अंतरिक्ष विज्ञान की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारी युवा लड़कियों के सपने अब धरती से परे अंतरिक्ष तक उड़ान भर रहे हैं। भारत ‘मिशन शक्तिसैट’ (Mission ShakthiSAT) के जरिए दुनिया भर की हजारों महत्वाकांक्षी छात्राओं को एक मंच पर ला रहा है। यह पहल 108 देशों की 12,000 छात्राओं को सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करने का शानदार मौका देती है।
’वोकल फॉर लोकल’ और आगामी त्योहार
त्योहारों के मौसम का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 4 सितंबर को जन्माष्टमी का पवित्र त्योहार है और इसी महीने विश्वकर्मा पूजा भी है। यह मौका हमारे स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और विश्वकर्मा साथियों का सम्मान करने का है। उन्होंने एक बार फिर ‘वोकल फॉर लोकल’ (स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने) का संदेश दोहराते हुए कहा कि इसका दायरा सिर्फ दीये खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम जो भी खरीदें वह भारत में ही बना हो, क्योंकि आत्मनिर्भर देश बनने का रास्ता स्वदेशी उत्पादों पर गर्व करने से ही निकलता है।