कैसे बनेंगे हमारे बच्चे स्मार्ट: स्कूलों में बिजली-इंटरनेट नहीं, सिस्टम ऑफलाइन...14,125 स्कूलों में 300 करोड़ के 18,135 स्मार्ट क्लास रूम - Jaipur News

कैसे बनेंगे हमारे बच्चे स्मार्ट:स्कूलों में बिजली-इंटरनेट नहीं, सिस्टम ऑफलाइन...14,125 स्कूलों में 300 करोड़ के 18,135 स्मार्ट क्लास रूम

जयपुर15 मिनट पहलेलेखक: मदन कलाल

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हकीकत... कहीं बोर्ड चादर ओढ़े तो कहीं बच्चों की पीठ के पीछे टंगे

सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को डिजिटल बनाने के लिए प्रदेश के 14,125 स्कूलों में 18,135 स्मार्ट क्लास रूम तैयार करने पर सरकार 300 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुकी है, लेकिन जमीनी तस्वीर इस निवेश पर सवाल खड़े करती है।

भास्कर की पड़ताल में ऐसे स्कूल मिले, जहां स्मार्ट बोर्ड महीनों से चादरों में ढके पड़े हैं, कहीं वे बच्चों की पीठ के पीछे दीवार पर टंगे हैं, तो कहीं बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उनका उपयोग ही नहीं हो पा रहा।

जयपुर जिले के करीब 400 सरकारी स्कूलों में भी स्मार्ट क्लास की सुविधा है। पड़ताल के दौरान सामने आया कि कई स्कूलों में स्मार्ट क्लास बना तो दिए गए, लेकिन कमरों की स्थिति, बैठने की व्यवस्था और संचालन की तैयारियां साथ-साथ विकसित नहीं हुईं। कई स्थानों पर बच्चे अब भी जमीन पर बैठकर पढ़ रहे हैं, जबकि कुछ स्कूलों में सीलन भरी दीवारों और जर्जर कमरों में एलईडी लगी हुई हैं। सिर्फ उपकरण उपलब्ध करा देने से व्यवस्था प्रभावी नहीं हो रही। कई शिक्षकों का कहना है कि स्मार्ट बोर्ड संचालन के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण की जरूरत है। दूसरी ओर, कई स्कूलों में नियमित बिजली आपूर्ति और इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं होने से डिजिटल सामग्री का उपयोग बाधित रहता है। ऐसे में अधिकांश शिक्षक जरूरत पड़ने पर पारंपरिक ब्लैकबोर्ड और किताबों से ही पढ़ाई कराने को मजबूर हैं।

डिजिटल शिक्षा पर करोड़ों खर्च, जमीनी हकीकत ने खोली पोल; कई स्कूलों में स्मार्ट क्लास सिर्फ नाम की 1 चादर हटाई तो नीचे मिले स्मार्ट बोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल, खेड़ी गोकुलपुरा; जर्जर कमरे ध्वस्त होने के बाद स्मार्ट एलईडी बोर्ड उतारकर दूसरे कमरे में रख दिए गए हैं। रिपोर्टर ने चादर हटाकर देखा तो बोर्ड दीवार के सहारे नीचे उल्टे रखे मिले। प्राचार्य रजनीश गुप्ता ने बताया कि नए कमरे तैयार होने के बाद इन्हें दोबारा लगाया जाएगा।

2 क्लास में बच्चे सामने... स्मार्ट बोर्ड पीछे सीनियर सेकेंडरी स्कूल, घाटा (जयपुर); स्मार्ट क्लास में बच्चे जमीन पर बैठे थे और शिक्षक पारंपरिक तरीके से पढ़ा रहे थे। स्मार्ट एलईडी अनाज की टंकियों से सटी पीछे की दीवार पर लगी थी, इसलिए उसका उपयोग नहीं हो रहा था। प्राचार्य सुरेश राजौरिया ने बताया कि दिन में कई बार बिजली चली जाती है और इंटरनेट रिचार्ज भी समय पर नहीं हो पाता। इससे स्मार्ट क्लास नियमित रूप से संचालित करना कठिन हो जाता है।

3 स्मार्ट क्लास का नंबर सप्ताह में एक दिन उच्च प्राथमिक विद्यालय, रघुनाथपुरा (कानोता, बस्सी); स्कूल में एक स्मार्ट एलईडी प्रधानाध्यापक कक्ष में लगाई गई है, जबकि दूसरी बच्चों के पीछे दीवार पर है। सप्ताह में केवल एक दिन ही स्मार्ट क्लास संचालित हो पाती है। प्रधानाध्यापक शालू यादव ने बताया कि बिजली बाधित होने से पढ़ाई प्रभावित होती है।

राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण साझा अभियान के विजय गोयल ने कहा-पहले स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजबूत होना चाहिए। आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तभी डिजिटल शिक्षा का उद्देश्य पूरा होगा।

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