14 की उम्र में पिता को खोया, 3 बार UPSC में फेल, अब CAPF बने पंकज कंबोज
पंकज कंबोज ने 14 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद खेती पर निर्भर परिवार के बीच पढ़ाई जारी रखी. वहीं यूपीएससी सिविल सर्विसेज तीन बार असफल होने के बाद अब यूपीएससी सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट बने हैं.
Written By : कविता गाडरी | Updated at : 28 Aug 2026 08:44 AM (IST)
यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता. लेकिन बार-बार मिली असफलता के बाद भी तैयारी जारी रखना, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल होता है. पंकज कंबोज की कहानी भी ऐसे ही संघर्ष को दर्शाती है. पंकज कंबोज ने महज 14 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद खेती पर निर्भर परिवार के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी. वहीं आगे चलकर यूपीएससी सिविल सर्विसेज की प्रारंभिक परीक्षा में लगातार तीन बार असफलता मिली. वहीं एसएसबी में भी उन्हें कई बार निराशा हाथ लगी. इसके बावजूद पंकज ने तैयारी नहीं छोड़ी और अब यूपीएससी सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 196 हासिल कर अधिकारी बनने जा रहे हैं.
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पंकज कंबोज उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा के पास स्थित पदमपुर गांव के रहने वाले हैं. उनका परिवार मुख्य रूप से खेती पर निर्भर था. उत्तर प्रदेश परिवार के पास करीब चार एकड़ जमीन थी, जिसमें एक हिस्से पर परिवार के लिए अनाज उगाया जाता, जबकि बाकी जमीन से आमदनी होती थी.
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2016 में जब पंकज कक्षा 9 में पढ़ रहे थे, तभी अचानक हार्ट अटैक से उनके पिता का निधन हो गया. उस समय पंकज की उम्र महज 14 साल थी. पिता के जाने के बाद परिवार के जिम्मेदारी उनकी मां और पांच बड़ी बहनों पर आ गई. आर्थिक परेशानियों के बावजूद उनकी मां ने पंकज की पढ़ाई और आगे बढ़ाने की इच्छा को हमेशा समर्थन किया.
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इसके बाद पंकज ने 2021 में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली का रुख किया. आर्थिक स्थिति सही नहीं होने से वह महंगी कोचिंग नहीं ले सके. इसलिए उन्होंने ऑनलाइन संसाधनों और स्टडी मैटेरियल की मदद से अपनी तैयारी की. वह खुद नोट्स बनाकर पढ़ाई करते थे. वहीं 2023 में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा किया और अपने बैच में टॉपर रहे. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी.
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पंकज के लिए यूपीएससी सिविल सर्विसेज की राह आसान नहीं रही. उन्होंने शुरुआती तीन प्रयासों में प्रीलिम्स परीक्षा पास नहीं की. उनके लिए सीएसएटी एक बड़ी समस्या बन रहा. एक तरफ सिविल सर्विसेज के परीक्षा में लगातार असफलता मिल रही थी, तो दूसरी ओर उन्होंने रक्षा क्षेत्र की परीक्षा में भी अपनी किस्मत आजमाई. पंकज ने सीडीएस और एएफसीएटी दोनों परीक्षाएं चार-चार बार दी और हर बार लिखित परीक्षा में सफलता हासिल की.
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हालांकि लिखित परीक्षा पास करने के बाद एसएसबी की चुनौती सामने थी. एसएसबी के दौरान उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा और कॉन्फ्रेंस आउट भी हुए. हर बार उन्हें दोबारा शुरुआत करनी पड़ती थी.
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लगातार असफलताओं के बीच पंकज पर आर्थिक और पारिवारिक दबाव भी बढ़ता गया. कई बार रिश्तेदारों ने उन्हें तैयारी छोड़कर गांव वापस लौटने की सलाह दी. इसके बावजूद उन्होंने अपना टारगेट नहीं बदला. कई सालों तक घर से दूर रहकर उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी. उनका टारगेट केवल परीक्षा पास करना नहीं था, वह अपने क्षेत्र में यूपीएससी परीक्षा पास करने वाली पहले व्यक्ति बनना चाहते थे.
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तीन बार असफल होने के बाद पंकज ने चौथे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा प्रीलिम्स परीक्षा पास कर ली. इसके बाद उन्होंने हाल ही में सिविल सर्विसेज मेन्स परीक्षा भी दी थी. ऐसे में सीएपीएफ में सफलता हासिल करने के बाद भी उनकी सिविल सर्विसेज की तैयारी जारी रही.
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यूपीएससी सीआरपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 196 हासिल करने के बाद पंकज अब बतौर असिस्टेंट कमांडेंट अपने करियर की शुरुआत करने जा रहे हैं.
Published at : 28 Aug 2026 08:44 AM (IST)
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