पैरासिटामोल इंफ्यूजन के बाद मैटरोनिडाजोल आईपी दवा पर भी लगा बैन, 1400 यूनिट हटाए - Amritsar News
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कपूरथला सिविल अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और एक की मौत के बाद जिले का सेहत विभाग हरकत में है। पैरासिटामोल आईपी इंफ्यूजन के साथ-साथ मैटरोनिडाजोल आईपी एंटीबायोटिक के संदिग्ध बैचों के इस्तेमाल पर पूरे प्रदेश में रोक लगा दी गई है।
डीआरएमई और सेहत विभाग के निर्देशों के बाद जिले में दोनों दवाओं के संबंधित 1400 यूनिट अस्पतालों से हटाकर अलग रखे गए हैं। सेहत विभाग ने पैरासिटामोल इंफ्यूजन के बैच नंबर 0125के005 और मैटरोनिडाजोल के 0526सी001, 0526सी002, 0526सी003, 0526एल006 व 0526एल007 बैच को बैन किया है।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एहतियाती कदम है और लैब रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। कपूरथला मामले में एडवर्स ड्रग रिएक्शन (एडीआर) एक प्रमुख संभावित कारण हो सकता है। किसी गर्भवती महिला को दवा देने से पहले यह निश्चित रूप से पता नहीं लगाया जा सकता कि उसके शरीर में उस दवा का रिएक्शन होगा या नहीं।
पहले संबंधित बैच की क्वालिटी कंट्रोल जांच जरूरी है। यदि दवा की गुणवत्ता सही मिलती है तो मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री, गर्भावस्था की स्थिति, दूसरी दी गई दवाओं और दवा देने के बाद लक्षण शुरू होने के समय के आधार पर एडीआर की वजह तलाशनी होगी। एडीआर संभव है लेकिन इसे अभी मौत का अंतिम कारण नहीं माना जा सकता।
पहले बैच की क्वालिटी जांच हो और दवा सही मिलने पर एडीआर के कारणों की जांच की जाए। सिविल सर्जन डॉ. रश्मि विज ने बताया कि आदेश मिलते ही जिले में संबंधित बैच की दवाओं को इस्तेमाल से रोक दिया गया है। पैरासिटामोल के सिविल अस्पताल अमृतसर से 335, अजनाला से 330, लोपोके से 22 और मेहता अस्पताल सेल से 50 यूनिट कुल 737 यूनिट हटाकर अलग रखे गए हैं।
मैटरोनिडाजोल के सिविल अस्पताल अमृतसर और अजनाला से 663 यूनिट वापस मंगवाए गए हैं। डा. विज ने कहा कि संबंधित बैच विभागीय आदेश के बाद हटा दिए गए हैं, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि महिला की मौत या मरीजों की तबीयत बिगड़ने का कारण पैरासिटामोल या मेट्रोनिडाजोल था। कपूरथला में मामले की जांच की जाएगी और लैब रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
गुरु नानक देव अस्पताल (जीएनडीएच) में मैटरोनिडाजोल-4 के पांचों संबंधित बैच सभी वार्डों से वापस मंगवाकर अलग रखे गए हैं। हालांकि, जिस पैरासिटामोल बैच 0125के005 पर पंजाब भर में रोक लगाई गई है वह जीएनडीएच में आया ही नहीं था। डॉ. केडी सिंह, वायरोलॉजी लैब मुखी, मेडिकल कॉलेज कपूरथला की घटना के बाद दोनों दवाओं के बैच हटाना एहतियाती कदम है।
जांच में दवा के साथ आईवी फ्लूड, कैनुला, आईवी सेट, स्टोरेज, दूसरी दवाओं और दवा देने की प्रक्रिया की भी जांच जरूरी होगी। यदि एक ही समय में कई मरीजों में समान लक्षण आए हैं तो केवल दवा को जिम्मेदार मानना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित दवाओं और आईवी फ्लूड के सैंपल, मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड और मेडिकेशन हिस्ट्री जांच में महत्वपूर्ण होंगे।
कपूरथला सिविल अस्पताल में उपचार के दौरान गर्भवती महिलाओं को पैरासिटामोल इंफ्यूजन दिया गया था। इसके कुछ समय बाद कई मरीजों में घबराहट, बेचैनी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आए। हालत बिगड़ने पर उन्हें अमृतसर के जीएनडीएच रेफर किया गया। एक महिला की उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि 4 महिलाओं को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है, जबकि 2 अभी आईसीयू में हैं।