डिजिटल क्रांति का असर: पेपरलेस रजिस्ट्री से महज 15 दिनों में सरकारी खजाने में आए 126 करोड़ से ज्यादा! - Haribhoomi
बिहार में पेपरलेस रजिस्ट्री प्रक्रिया तेजी से लोकप्रिय हो रही है। सितंबर के शुरुआती 15 दिनों में ही सरकार को 126 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिला है।
बिहार में पेपरलेस रजिस्ट्री से सितंबर के शुरुआती 15 दिनों में ही सरकार को 126 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिला है। (Ai Image)
- Published: 21 Sep 2026, 08:54 AM IST
- Last Updated: 21 Sep 2026, 08:54 AM IST
Bihar paperless registry: बिहार में भूमि और संपत्ति से जुड़ी डिजिटल पेपरलेस निबंधन व्यवस्था अब तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर महीने के शुरुआती पंद्रह दिनों के भीतर ही राज्य भर में लगभग 12 हजार दस्तावेजों का निबंधन पूरी तरह से पेपरलेस माध्यम से किया जा चुका है। इस आधुनिक और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए विभाग को 126 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी-भरकम राजस्व प्राप्त हुआ है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
विरोध के बावजूद रोजाना हो रहे हैं एक हजार दस्तावेज
राज्य में दस्तावेज तैयार करने वाले कुछ तबकों के विरोध के बावजूद आम जनता के बीच इस नई तकनीकी व्यवस्था को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि प्रतिदिन औसतन एक हजार दस्तावेज पेपरलेस तरीके से पंजीकृत किए जा रहे हैं। विभाग का अनुमान है कि आने वाले सप्ताह में यह दैनिक औसत आंकड़ा 1500 के पार पहुंच जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि इस सुविधा की शुरुआत इसी साल जुलाई में हुई थी, जिसे शुरुआती दौर से ही लोगों का अच्छा समर्थन मिल रहा है।
इस तरह लगातार बढ़ रहा डिजिटल निबंधन का ग्राफ
शुरुआती महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस व्यवस्था की लोकप्रियता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। लॉन्चिंग के पहले महीने में जहां केवल करीब 1200 पेपरलेस निबंधन हुए थे, वहीं अगस्त के महीने में यह संख्या छलांग लगाकर 6700 के पार पहुंच गई। अगस्त में इस डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से विभाग ने 85 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया था। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे लोग इस तकनीक से रूबरू हो रहे हैं, इसकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ती जा रही है।
ई-निबंधन सॉफ्टवेयर से मिल रही है बड़ी राहत
यह पूरी पेपरलेस निबंधन प्रक्रिया अत्याधुनिक ई-निबंधन सॉफ्टवेयर के जरिए संचालित की जा रही है। इस सॉफ्टवेयर में दस्तावेज तैयार करने से लेकर शुल्क की स्वचालित (ऑटोमैटिक) गणना, ई-चालान, ई-स्टाम्प और आधार आधारित ई-साइन की आधुनिक सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। इस तकनीक के आने से नागरिकों के कीमती समय की भारी बचत हो रही है और दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी कम हुई है। अब आवेदक घर बैठे या अपने नजदीकी सुविधा केंद्र के माध्यम से आसानी से पूरी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।