विश्व युवा कौशल दिवस: 1548 करोड़ का स्किल पार्क, ट्रेंड करने थे 6000 युवा, दो वर्ष में 3 हजार भी नहीं - Bhopal News

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भोपाल23 मिनट पहलेलेखक: मनीष कुशवाह

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30 एकड़ क्षेत्र में 1548 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क (SSRGSP) अपने मकसद में पूरी तरह सफल होता नहीं दिख रहा है। दावा था कि यहां युवाओं की स्किल बढ़ाने के लिए विश्वस्तरीय कोर्स होंगे, जिनसे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। लेकिन, इसके उलट पूरी सीटें भी नहीं भर पा रही हैं।

स्किल पार्क में एडवांस्ड कोर्स का आगाज वर्ष 2024 में हुआ। संस्थान का दावा है कि आईटीईईएस सिंगापुर ने यहां फैकल्टीज को ट्रेंड किया है। शुरुआत से हर साल 6000 से अधिक युवाओं को ट्रेंड करने और आगामी वर्षों तक 10000 तक पहुंचाने का दावा था, लेकिन अब तक 2903 छात्र ट्रेंड हुए हैं। अधिकतर आईटीआई के छात्रों को तो इसके बारे में पता ही नहीं है। ग्रामीण युवा तो बिल्कुल अनभिज्ञ हैं। शेष | पेज 10 पर

ये कोर्स हो रहे संचालित... एडवांस्ड सीएनसी एंड प्रिसिजन इंजीनियरिंग, एडवांस्ड मेक्ट्रोनिक्स, एडवांस्ड इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी (पॉवर एंड कंट्रोल), एडवांस्ड ऑटोमेटिव टेक्नोलौजी, एडवांस्ड मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल सर्विसिज, एडवांस्ड मेकेनिकल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड एयर कंडिशनिंग एंड रेफ्रिजरेशन,एडवांस्ड आइसीटी (नेटवर्किंग एंड सिस्टम्स एडमिनिस्ट्रेशन), एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स। इन्हें आईटीईईएस सिंगापुर ने डिजाइन किया है।

छोटे शहरों में भी यही स्थिति

पता नहीं कितनों को रोजगार मिला गुना : यहां स्किल सेंटर का संचालन महेंद्रा स्किल ट्रेनिंग प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ द्वारा किया जाता है। इसके प्रभारी दीपक धाकड़ का कहना है कि 2 साल से केंद्र सरकार की ओर से हमें कोई फंड नहीं मिला है। इनके पास ऐसा कोई डेटा नहीं है कि यहां ट्रेंड किए गए कितने युवाओं को रोजगार मिला है।

रोजगार अधिकारी आरबी मीना के पास भी स्किल इंडिया सेंटर से ट्रेंड होने वाले व रोजगार पाने वाले युवाओं का डेटा नहीं है। हालांकि स्किल इंडिया पोर्टल के मुताबिक इस सेंटर पर 2023 से 3186 युवाओं का नामांकन हुआ। इनमें 1978 ने ही ट्रेनिंग पूरी की। 1264 ही सर्टीफाइड किए जा सके।

निजी संस्थानों में फर्जीवाड़े सामने आए शिवपुरी : प्राइवेट संस्थानों में फर्जीवाड़े के चलते इस बार सरकारी कॉलेज और आईटीआई में प्रशिक्षण दिए गए। दोनों कॉलेज में 20 बैच में 817 छात्रों के रजिस्ट्रेशन कर दिए। लेकिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में छात्र शामिल नहीं हुए।

अलग अलग दिन कहीं 5% तो कहीं 53% तो कहीं बिल्कुल भी हाजिरी नहीं लगी। आईटीआई प्राचार्य हेमंत डंडौतिया का कहना है, जनगणना ड्यूटी के चलते ट्रेनिंग प्रभावित रहीं। ट्रेनिंग एक्सटेंशन के लिए संस्था स्तर से हम पहले ही पत्र भेज चुके हैं।

1163 छात्रों के प्लेसमेंट का दावा, लेकिन पैकेज पर परदेदारी IIT-IIM के साथ जो कोर्स पिछले साल शुरू होने थे, अब तक शुरू नहीं

यहां आईआईएम इंदौर, आईआईटी दिल्ली व रोपण, राष्ट्रीय रक्षा विवि गांधी नगर व राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान के साथ मिलकर 35 शॉर्ट टर्म कोर्स की योजना बनाई गई थी। इन्हें वर्ष 2025 में शुरू होना था, जो अब तक नहीं हो सके हैं। इनमें वेब-मोबाइल डिजाइन, डिजिटल गेम डिजाइन, एनिमेशन, गेमिंग टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी, एआई बिल्डर आदि कोर्स थे। एग्रीकल्चर कोर्स के जरिये तकनीकी प्रशिक्षण की योजना भी पूरी नहीं हो पाई।

विद्यार्थी बोले- थ्र्रीडी प्रिंटर उपयोग नहीं हो रहा, कई फैकल्टी कॉन्ट्रैक्ट पर

नाम न छापने की शर्त पर स्टूडेंट्स ने बताया कि अभी इंडस्ट्रियल ऑटोमेटा का अधिक प्रभाव है, पर इसके लिए जरूरी थ्रीडी प्रिंटर्स का उपयोग नहीं हो पा रहा है। लैब में उपकरण हैं, पर पूरी तरह उपयोग नहीं हो रहे। अधिकतर फैकल्टीज कॉन्ट्रैक्ट पर हैं, जो पूर्व में निजी संस्थानों में थे।

अभी भी निर्माण कार्य जारी हैं। इन्हें मार्च 2026 तक पूरा हो जाना था। संस्थान दावा करता है कि 1163 छात्रों का प्लेसमेंट हुआ है, लेकिन भास्कर के बार-बार पूछने पर भी नहीं बताया कि इनका पैकेज क्या है।

पहले के सत्रों में जानकारी छात्रों तक नहीं पहुंची थी। संस्थान भी नया था। अब सभी कोर्स में पर्याप्त छात्र हैं। कुछ छात्रों ने जॉब लगने से कोर्स छोड़ा। प्लेसमेंट बहुत बेहतर है। -नीरज सहाय, एक्सटर्नल डायरेक्टर, SSRGSP

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