Nag Panchami 2026 Date : सालों बाद नाग पंचमी पर बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें 16 या 17 अगस्त किस दिन करें पूजा

वर्ष 2026 में नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त को सावन के तीसरे सोमवार के खास संयोग में मनाया जाएगा। इस दिन सुबह 06:46 से 09:37 बजे तक पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त रहेगा।

Nag Panchami 2026 Date : सावन माह में नाग पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस साल यह पर्व और भी खास होने जा रहा है क्योंकि नाग पंचमी के दिन ही सावन का तीसरा सोमवार भी पड़ रहा है।

भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है। अक्सर तिथि के शुरुआत और खत्म होने के समय को लेकर लोगों में असमंजस रहता है।

अगर आप भी 16 या 17 अगस्त को लेकर उलझन में हैं, तो यहां जानिए पूजा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और इस दिन से जुड़ी पौराणिक मान्यता।

तारीख और पंचमी तिथि का समय

हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 16 अगस्त 2026 को दोपहर 01:22 बजे होगी। इस तिथि का समापन 17 अगस्त 2026 को दोपहर 01:30 बजे होगा।

उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, नाग पंचमी का त्योहार 17 अगस्त 2026, सोमवार को ही मनाया जाएगा।

पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त

17 अगस्त को नाग पंचमी की पूजा के लिए कुल 2 घंटे 51 मिनट का समय मिल रहा है।

शुभ मुहूर्त: सुबह 06:46 बजे से सुबह 09:37 बजे तक।

इस दौरान पूजा-अर्चना करना और शिवलिंग पर जल चढ़ाकर नाग देव का आह्वान करना सबसे श्रेष्ठ रहेगा।

सावन सोमवार और शुभ योग का संयोग

इस बार नाग पंचमी पर रवि योग, शुभ योग और शुक्ल योग का सुंदर तालमेल बन रहा है। ज्योतिष में इन योगों को किसी भी धार्मिक कार्य या नए काम की शुरुआत के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।

इसके साथ ही सावन का तीसरा सोमवार होने से इस दिन का महत्व दोगुना हो जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव के गले में विराजित नाग देव की पूजा करने से महादेव का आशीर्वाद सहज ही प्राप्त हो जाता है।

क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी?

पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत के बाद राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डंसने से हुई थी।

परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए ‘नाग दाह यज्ञ’ शुरू कराया, जिसमें संसार भर के नाग आकर भस्म होने लगे।

नागों के वंश की रक्षा के लिए आस्तिक मुनि ने आगे आकर जनमेजय को समझाया और सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को इस यज्ञ को रुकवाया।

नागों के प्राण बचने की खुशी में इस तिथि को नाग पंचमी के रूप में पूजे जाने की परंपरा शुरू हुई।