जनरल सीटों पर मजबूत उपस्थिति: महिला वार्ड 1883 ही थे, पार्षद बनीं 2193, काम पति-देवर ही करते रहे, दौसा में बेदखल किए गए 8 के पति - Jaipur News
जयपुर41 मिनट पहलेलेखक: निरंजन शुक्ला
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सभापति नगमा (हिजाब में) के ससुर तैयब अली (सफेद शर्ट) बोर्ड की बैठकों में रहते थे।- ( इनपुट-श्रीकांत पारीक)
- घरवालों का हस्तक्षेप है कि खत्म ही नहीं होता
संविधान के 74वें संशोधन के बाद राजस्थान के शहरी निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसका उद्देश्य था, शहरी विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़े। सशक्तीकरण हो। यह पहलू पिछले चुनावों में सामने आया भी। पिछली बार यहां 2019–2020 और 2021 में तीन बार में हुए 146 निकायों के चुनावों में महिलाओं ने न केवल आरक्षित सीटों पर जीत दर्ज की, बल्कि सामान्य (अनारक्षित) वार्डों से भी चुनाव जीता था।
पार्षद के 7280 पदों में से महिलाओं के लिए 1883 आरक्षित थे। चुनी गई पार्षद 2193 (38.31%) थी। निकाय प्रमुखों के 49 पद आरक्षित थे और इससे ज्यादा महिला निकाय प्रमुखों ने कमान संभाली। लेकिन, जयपुर के दोनों निगम, खेतड़ी, पिलानी आदि जगह महिला जनप्रतिनिधि स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकीं। प्रशासनिक दखल पति या अन्य पुरुष परिजनों का रहा। कुछ जगह सदन की बैठकों में रहने, अधिकारियों की बैठकें लेने के आरोप लगे। शहरी निकाय विभाग ने इसे पद का दुरुपयोग मानते हुए महिला जनप्रतिनिधि के निलंबन तक की कार्रवाई की है।
- साइन के लिए घर जाती थीं फाइलें... झुंझुनूं नगर परिषद की सभापति नगमा बानो थीं, लेकिन ससुर तैयबअली काम संभालते। साल 2022 में नगमा ने अफसरों की बैठक ली, उसके बाद कार्यालय आना कम हो गया। उनके साइन के लिए फाइलें घर भेजी जाती थीं। पार्षदों व लोगों को काम के लिए ससुर के पास जाना पड़ता। बाद में तैयब सहवृत पार्षद बने। भ्रष्टाचार की शिकायतें भी हुईं।
- आखिरी बैठक तक हंगामा... नगर परिषद, दौसा की आखिरी बैठक 20 नवंबर 2025 को हुई। सभापति कल्पना जैमन, पार्षद कविता, राधा जायसवाल, कृष्णा, अल्का तिवाड़ी, सुनीता गुर्जर, यास्मीन खान और मीरा के परिजन बैठक में थे। पार्षद शाहनवाज मो. सन्नी खान ने इनकी मौजूदगी का विरोध किया। इसके बाद सभापति के पति नरेंद्र जैमन व पार्षदों के पतियों को बैठक से निकाला। इस मुद्दे पर हंगामा भी हुआ।
- शाहपुरा (जयपुर) : नगर पालिका अध्यक्ष रजनी पारीक थीं। काम में देवर महेश पारीक के हस्तक्षेप की शिकायतें हुईं। विपक्ष के नेता रहे रामावतार गुर्जर कहते हैं कि इस तरह की शिकायतें आमतौर पर रहती हैं।
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