मिड-डे मील वर्करों को जुलाई में मिले सिर्फ 2 हजार: 1 हजार रुपए की कटौती से बढ़ी परेशानी,बोले-कटौती का कारण नहीं बताया - Ludhiana News

सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध करवाने वाले वर्करों को जुलाई महीने का पूरा मानदेय नहीं मिला है। प्रधानमंत्री पोषण योजना (PM POSHAN) के तहत काम करने वाले वर्करों को जुलाई के 3 हजार रुपए मासिक मानदेय के बजाय सिर्फ 2 हजार रुपए का भुगतान क

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1 हजार रुपए की कटौती से वर्करों में रोष है। उनका कहना है कि पहले ही उन्हें बेहद कम मानदेय मिलता है और ऊपर से भुगतान में देरी तथा कटौती के कारण घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।

कटौती का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया

मिड-डे मील वर्करों के अनुसार, मानदेय में देरी की समस्या लगातार बनी हुई है। इस बार जुलाई के भुगतान में 1 हजार रुपए कम मिलने के बावजूद उन्हें कटौती का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। वर्करों का कहना है कि त्योहारी सीजन नजदीक होने के कारण आर्थिक परेशानी और बढ़ गई है।

मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान परवीन कुमारी ने कहा कि सरकार एक तरफ ‘मावां धियां सत्कार योजना’ जैसी योजनाओं को बढ़ावा दे रही है, वहीं सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए खाना तैयार करने वाले वर्करों को पूरा और समय पर मानदेय नहीं दिया जा रहा।

उन्होंने कहा कि वर्कर लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में कई बैठकें और प्रदर्शन भी किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ।

वर्करों ने कहा कि वे कम मानदेय पर लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अब पूरा भुगतान नहीं मिलने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। खासकर त्योहारों के दौरान अतिरिक्त खर्च के कारण उनकी परेशानी बढ़ गई है।

8 सितंबर को मोहाली में राज्य स्तरीय प्रदर्शन यूनियन ने मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर 8 सितंबर को मोहाली में राज्य स्तरीय प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। प्रदर्शन के दिन सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील तैयार करने का काम भी बंद रखने का फैसला किया गया है। यूनियन का कहना है कि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा।

स्कूल खुलने पर भी किया था काम का बहिष्कार मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर मिड-डे मील कुक-कम-हेल्परों ने गर्मियों की छुट्टियों के बाद सरकारी स्कूल खुलने के समय भी काम से दूरी बनाई थी। राज्यभर में हुए इस विरोध के कारण स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था प्रभावित हुई थी। कई स्कूलों में वैकल्पिक तौर पर दूसरे कुक बुलाने पड़े,

जबकि कुछ जगहों पर स्कूल प्रबंधन ने वर्करों को समझाकर वापस काम पर लगाया। लुधियाना के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों को मिड-डे मील में समोसे तक परोसे गए थे।

कुछ दिनों में मिलेगा बाकी भुगतान जिला मिड-डे मील इंचार्ज दविंदर कौर ने कहा कि वर्करों की बची हुई राशि जल्द उनके खातों में जमा करवा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि 1 हजार रुपए की कटौती केवल लुधियाना में नहीं हुई है, बल्कि राज्यभर में भुगतान में यह अंतर आया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बाकी राशि कुछ दिनों के भीतर जारी कर दी जाएगी।