रोडवेज डिपो-2 में हरियाली की नई शुरुआत - Jalandhar News

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पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकारी संस्थान अगर अपनी खाली जमीन का इस्तेमाल हरियाली के लिए करने लगें तो शहरों में हरित क्षेत्र को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए पंजाब रोडवेज के जालंधर डिपो-2 ने सकारात्मक पहल की है। डिपो की ओर से जंगलात विभाग को 60x60 फीट जगह उपलब्ध करवाई गई है, जहां मियावाकी तकनीक से मिनी जंगल तैयार किया जा रहा है। यहां करीब 300 से 350 पौधे लगाए जा रहे हैं।

इनमें औषधीय और फलदार पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही डिपो परिसर में मौजूद अन्य खाली जगहों पर भी 300 से ज्यादा पौधे लगाए जा रहे हैं। इस तरह अकेले डिपो-2 में करीब 650 से अधिक पौधों को धरती से जोड़ा जा रहा है। खास बात यह है कि जिस खाली जगह का लंबे समय तक कोई उपयोग नहीं हो रहा था, उसे अब हरियाली के छोटे से केंद्र में बदला जा रहा है।

पंजाब रोडवेज के जनरल मैनेजर अमित अरोड़ा, सहायक मैकेनिकल इंजीनियर अरुण कुमार और रोहित सूद नाजर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि रोडवेज डिपो-2 की यह पहल यह संदेश भी देती है कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े प्रोजेक्टों से नहीं, बल्कि उपलब्ध छोटी-छोटी जगहों को हरियाली में बदलने से भी शुरू किया जा सकता है। पंजाब में रोडवेज के कई डिपो और सरकारी संस्थानों के पास बड़ी मात्रा में खाली जमीन मौजूद है।

अक्सर इन जगहों पर ना तो नियमित सफाई हो पाती है और ना ही उनका कोई उपयोग हो पाता है। जालंधर डिपो-2 की पहल इस लिहाज से दूसरे सरकारी संस्थानों के लिए भी उदाहरण बन सकती है। यदि ऐसी जगहों पर छोटे-छोटे मिनी जंगल विकसित किए जाएं तो शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल सकती है। पंजाब रोडवेज के ज्यादातर डिपो के पास दर्जनों एकड़ खाली जगह है जो जंगली घास-बूटी, कबाड़, कुड़ा डंप बन चुकी है वहां पर पर्यावरण को बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की मुहिम शुरू की जा सकती है। हरियाली मुहिम की शुरूआत करते जनरल मैनेजर अमित अरोड़ा, रोहित सूद, अरुण कुमार व अन्य।

जंगलात विभाग के सदस्य गुरप्रीत सिंह और अजय कुमार ने बताया कि गार्ड ऑफिसर कुलदीप कौर की अगुआई में रोडवेज परिसर में मियावाकी तकनीक से मिनी जंगल तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पौधे लगाने के बाद इनकी भविष्य में देखभाल की जिम्मेदारी भी जंगलात विभाग की ओर से निभाई जाएगी, ताकि पौधे केवल लगाए ही न जाएं, बल्कि उनका संरक्षण भी सुनिश्चित हो।

उन्होंने कहा कि कोई भी सरकारी या निजी संस्थान अपनी उपलब्ध जमीन पर इसी तरह जंगल विकसित करवाना चाहता है तो वह जंगलात विभाग से संपर्क कर सकता है। खाली जमीन को हरियाली में बदलने की ऐसी पहल शहरों के पर्यावरण के लिए लंबे समय में काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।