2.68 करोड़ से मरम्मत का सच: पहली बारिश में ही बेल्हारी बांध का तटबंध धंसा, दरारों से रिस रहा पानी खेतों में घुसा - kabirdham News

.

ग्राम पंचायत छोटू पारा के पास जंगलों के बीच बेल्हारी बांध स्थित है। करीब 56 साल पहले बना यह बांध इन दिनों खतरे में है। बांध के जीर्णोद्धार (मरम्म्मत) नहरों को पक्का करने के लिए 2.68 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन काम पूरा होने से पहले ही बारिश में तटबंध के कई हिस्से धंस गए।

जगह-जगह गहरी दरारें पड़ गई हैं और मिट्टी का कटाव हो रहा है। तटबंध से रिस रहा पानी खेतों में पहुंचने लगा है। इससे बांध पर निर्भर 162 एकड़ (करीब 65 हेक्टेयर) फसल पर नुकसान का खतरा पैदा हो गया है। बड़ा सवाल ये है कि बांध को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपए का काम कराया जा रहा है, उसी दौरान उसका तटबंध बारिश में कमजोर कैसे पड़ गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना जल संसाधन विभाग को पहले ही दी थी। लेकिन रिसाव रोकने या तटबंध को मजबूत कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता मनोज पराते का कहना है कि तटबंध क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है। नए सिरे से इसकी मरम्मत कराई जाएगी।

बांध मजबूत करने का काम जारी, उसी में धंस रहा तटबंध बेल्हारी बांध का निर्माण करीब 1970 में हुआ था। लंबे समय से बांध और उससे जुड़ी सिंचाई व्यवस्था में सुधार की जरूरत थी। इसके लिए शासन ने 2.68 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है। इस राशि से बांध का जीर्णोद्धार और 6200 मीटर (करीब 6.2 किलोमीटर) लंबी नहर की सीसी लाइनिंग का काम कराया जा रहा है। निर्माण कार्य अभी जारी है। इसी बीच बारिश में तटबंध में दरारें आ गई है।

बांध से 162 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है बेल्हारी बांध से छोटूपारा, बेल्हारी, पीपरटोला, कुटकी पारा, महराटोला, सिंगरा पारा व आसपास गांवों की करीब 162 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है। किसानों के लिए यह बांध लंबे समय से महत्वपूर्ण जल स्रोत है। अभी खेतों में फसल खड़ी है और इसी समय बांध के तटबंध से पानी रिसकर खेतों की ओर जा रहा है। तटबंध का कटाव बढ़ा तो खेतों में पानी भर सकता है।

पहले बांध बचाएं, फिर निर्माण कार्य आगे बढ़ाएं ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से मौके पर विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम भेजकर पूरे तटबंध की जांच कराने की मांग की है। साथ ही रिसाव और कटाव वाले हिस्सों की तत्काल मरम्मत, प्रभावित खेतों का सर्वे और जीर्णोद्धार कार्य की गुणवत्ता जांच कराने की मांग की है। अभी सिर्फ तटबंध का एक हिस्सा प्रभावित हुआ है। इसे दुरुस्त करना जरूरी है।