ब्र‍िटेन में पहली कमाई 20 पौंड, इंड‍िया से बनाया 400 छात्रों का नेटवर्क, पढ़ें इस Gen-Z की कहानी

ओडिशा के राउरकेला से निकलकर ब्रिटेन की शेफील्ड यूनिवर्सिटी तक का सफर तय करने वाले जेन-जी निकुंज अग्रवाल की कहानी किसी मिसाल से कम नहीं है. एक ओर जहां विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना देखने वाले छात्र शुरुआती दिनों में अकेलेपन और अनिश्चितता से घबराते हैं, वहीं निकुंज ने यूके की धरती पर कदम रखने से पहले ही 400 भारतीय छात्रों का एक ऐसा कम्युनिटी नेटवर्क तैयार कर दिया, जिसने कई युवाओं की राह आसान बना दी.

व्हाट्सएप ग्रुप से शुरू हुआ दोस्ती और मदद का कारवां

दिल्ली पब्लिक स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी करने वाले निकुंज अपने परिवार से विदेश जाकर पढ़ने वाले पहले सदस्य हैं. जब शेफील्ड यूनिवर्सिटी से उनका एडमिशन कन्फर्म हुआ, तो उन्होंने महसूस किया कि नए छात्रों के पास आपस में जुड़ने और व्यावहारिक जानकारी साझा करने का कोई साझा मंच नहीं है.

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उन्होंने एक अनऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और उसकी लिंक फेसबुक पेज पर शेयर कर दी. देखते ही देखते इस ग्रुप में ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन और पीएचडी के लगभग 400 छात्र जुड़ गए. कमरे खोजने, वीजा प्रक्रिया, सस्ते सामान की खरीदारी से लेकर बैंक अकाउंट खुलवाने तक के सारे सवालों के जवाब इस ग्रुप में मिलने लगे. कमाल तो तब हुआ जब इस ग्रुप के जरिए जुड़े 8 छात्रों ने भारत से एक ही फ्लाइट बुक की और साथ ही शेफील्ड पहुंचे.

पहली कमाई 20 पौंड 

इंटरनेशनल बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान निकुंज को शेफील्ड में थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल लर्निंग का अनुभव मिला. एक प्रोजेक्ट के तहत उन्हें 'यॉर्कशायर स्कल्पचर पार्क' के बिजनेस मॉडल को बेहतर बनाने का काम मिला, जिसमें रनर-अप रहने पर उन्हें 20 पौंड (लगभग 2100 रुपये) का इनाम मिला. निकुंज कहते हैं कि भले ही रकम छोटी थी, लेकिन यूके में हुई यह पहली कमाई उनके लिए आत्मविश्वास का बड़ा जरिया बनी.

स्कॉलरशिप और सिंगापुर में स्टडी का मौका

शेफील्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से निकुंज को पहले और आखिरी साल में 'इंटरनेशनल अंडरग्रेजुएट स्कॉलरशिप' भी मिली, जिसने उनके परिवार के आर्थिक बोझ को काफी हद तक कम किया. अपने 3 साल के कोर्स के दौरान उन्होंने एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत सिंगापुर की मशहूर 'नान्यांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी' (NTU) में भी पढ़ाई की. यूके की स्वतंत्र सोच और सिंगापुर के सख्त एकेडमिक माहौल ने उन्हें ग्लोबल बिजनेस को गहराई से समझने में मदद की.

विदेश जाने वाले नए छात्रों को निकुंज की टिप्स

हाल ही में अपनी डिग्री पूरी करने वाले निकुंज का मानना है कि विदेश जाकर पढ़ाई करना सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है. नए छात्रों को अपनी सलाह देते हुए वे कहते हैं कि भारत छोड़ने से पहले कुकिंग यानी खाना बनाना जरूर सीख लें. आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए जल्द से जल्द पार्ट-टाइम काम और स्टूडेंट डिस्काउंट्स का फायदा उठाएं. इसके अलावा कैंपस में अलग-अलग सोसायटियों का हिस्सा बनें और नए लोगों से मिलने में संकोच न करें.

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