मरीजों को नहीं मिल रहा फायदा: सिस्टम की खामी... 20 करोड़ में 50 बेड का इबोला ब्लॉक, 6 महीने में 6 संदिग्ध मरीज - Jaipur News
जयपुर42 मिनट पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी
- कॉपी लिंक

एम्स दिल्ली की तर्ज पर प्रताप नगर स्थित आरयूएचएस अस्पताल को रिम्स बनाने का सपना दिखाया जा रहा है। इसके लिए अप्रैल 2025 में करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाया गया। इसके बाद मार्च 2026 में इसे चिकित्सा विभाग को सौंप दिया गया। लेकिन सिस्टम की खामी के कारण 50 बेड का अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिटिकल केयर ब्लॉक (सीसीबी) में पिछले छह महीने में महज छह इबोला संदिग्ध मरीजों तक सिमटकर रह गया है। भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि आधुनिक सुविधाओं से लैस यह भवन अधिकांश समय खाली पड़ा है।
आरयूएचएस अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 2000 से 2500 मरीज आते हैं। इनमें से 200 से 240 लोग भर्ती होते हैं। इबोला के लिए रिजर्व रखने के कारण सामान्य गंभीर मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस इमरजेंसी से मरीजों को सीधे इलाज मिलना चाहिए, उसके प्रवेश द्वार पर वाहन पार्क किए हुए थे। सीएम भजनलाल शर्मा, चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, प्रमुख शासन सचिव (मेडिकल शिक्षा), आयुक्त (मेडिकल शिक्षा) के यहां पहुंचने के बाद भी इस तरफ ध्यान नहीं गया।
क्या है योजना; प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य संरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत आरयूएचएस जयपुर परिसर में 50 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाया गया है। भवन में मरीजों के लिए वेटिंग एरिया, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, 20-20 बेड के वार्ड और आईसीयू, जननी और बच्चों के इलाज की यूनिट, दो बेड की डायलिसिस यूनिट और फार्मेसी स्टोर है। यहां बायोकेमिस्ट्री और पैथोलॉजी जांच की सुविधा भी उपलब्ध है।
विशेषज्ञ बोले- सामान्य मरीजों को मिले लाभ
आरयूएचएस अस्पताल परिसर में बने क्रिटिकल केयर ब्लॉक को इबोला मरीजों के लिए रिजर्व रखने की बजाय सामान्य मरीजों के इलाज के लिए खोलना चाहिए। इससे एसएमएस अस्पताल पर मरीजों का भार कम होगा और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सकेगा। शिवदासपुरा में बने सैटेलाइट अस्पताल को इबोला के लिए रिजर्व करना चाहिए, ताकि क्रिटिकल केयर ब्लॉक की सुविधाओं का मरीजों को फायदा मिल सके।
क्रिटिकल केयर ब्लॉक को इबोला मरीजों को आइसोलेट करने के लिए रिजर्व रखा है। दूसरी जगह चिह्नित करने के लिए मीटिंग में चर्चा की जा रही है। जिससे मरीजों को फायदा मिल सकेगा। -डॉ. अनिल गुप्ता, अधीक्षक, आरयूएचएस अस्पताल
.