200 करोड़ की मशीनों का 1200 करोड़ किराया देंगे: खाद्यान्नों की जांच के लिए फूड ग्रेन एनालाइजर मशीनों में बड़ा फर्जीवाड़ा - Bhopal News

किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले गेहूं, चना, धान, मूंग समेत अन्य खाद्यान्नों की जांच के लिए मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन (एमपीएससीएससी) एआई आधारित ऑटोमेटिक फूड ग्रेन एनालाइजर मशीनें किराए पर लेने जा रहा है। लेकिन करीब 200 करोड़

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इसके लिए एमपीएससीएससी ने 3 फरवरी 2026 को टेंडर जारी किया था। शुरुआत में 2500 और बाद में 4000 मशीनें लेने की योजना है। टेंडर के अनुसार मशीनें 7 साल तक किराए पर रहेंगी और हर साल कम से कम 120 दिन का किराया दिया जाएगा। 7 साल पूरे होने पर मशीनों का स्वामित्व कॉर्पोरेशन को मिलेगा। कॉर्पोरेशन का यह मॉडल इसलिए भी सवालों में है, क्योंकि भारतीय खाद्य निगम ऐसी मशीनें खरीद चुका है, जबकि मप्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड भी प्रदेश की मंडियों के लिए 139 मशीनों की खरीदी का टेंडर जारी कर चुका है। यानी दूसरी सरकारी एजेंसियां खरीदी का मॉडल अपना रही हैं, जबकि एमपीएससीएससी किराए का रास्ता चुन रहा है।

इधर, टेंडर की 180 दिन की वैधता पूरी होने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इसकी वैधता बढ़ाने पर ईडी (फाइनेंस) गोपाल सिंह ने आपत्ति दर्ज कराई थी। सूत्रों के मुताबिक इसके बाद बढ़े दबाव के बीच वे अवकाश पर चले गए। किसानों से जुड़े इस बड़े बदलाव से पहले न तो कोई ट्रायल किया गया और न ही पायलट प्रोजेक्ट।

टेंडर की 3 बड़ी बातें, जिन पर उठ रहे सवाल

सूत्रों के मुताबिक टेंडर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि किराए के मॉडल में अधिकतम कमीशन का खेल हो सके।

1. खरीदी नहीं, किराया क्यों? : विशेषज्ञों के मुताबिक 4000 मशीनें करीब 200 करोड़ रुपए में खरीदी जा सकती हैं। एक मशीन की अधिकतम कीमत करीब 5 लाख रुपए है, जिसमें रखरखाव और एआई लाइसेंस भी शामिल है। इसके बावजूद 3500-4000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 7 साल में करीब 1200 करोड़ रुपए किराया व एक मशीन पर 30 लाख रुपए से ज्यादा भुगतान की तैयारी है।

2. सात साल का अनुबंध क्यों? : टेंडर में 7 साल का अनुबंध व साल में न्यूनतम 120 दिन का किराया तय है। अगर जरूरत कम हुई या खाद्यान्न खरीदी व्यवस्था बदली तो भुगतान करना पड़ेगा।

3. पात्रता की शर्तें किसके लिए? : टेंडर में एआई आधारित फूड ग्रेन एनालाइजर मशीनों की आपूर्ति व संचालन का 5 साल का अनुभव और पिछले 3 वर्षों में कम से कम 50 मशीनें सप्लाई करने की शर्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो सकती है।