गोरखपुर के कैंपियरगंज में सपा का नया दांव: नवीन यादव पर भरोसा, 2012 से बढ़ता गया हार का अंतर - Gorakhpur News

  • Hindi News
  • Local
  • Uttar pradesh
  • Gorakhpur
  • Campierganj Gorakhpur SP Strategy | Naveen Yadav Akhilesh Yadav Election

गोरखपुर1 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

गोरखपुर की प्रमुख विधानसभा सीट कैंपियरगंज में जीत के लिए समाजवादी पार्टी लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन अब तक उसे सफलता नहीं मिल सकी है। 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अलग-अलग रणनीति अपनाने के साथ प्रत्याशी भी बदले, लेकिन हर चुनाव में जीत का अंतर बढ़ता गया।

इस बार नवीन यादव कैंपियरगंज से सपा की ओर से दावेदारी कर रहे हैं। उनका दावा है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें कैंपियरगंज से चुनाव लड़ने के लिए कहा है। नवीन यादव का कहना है कि पार्टी ने अब तक के चुनाव परिणामों की समीक्षा के बाद इस सीट पर अपनी रणनीति में बदलाव किया है।

आर्थिक पक्ष को माना सबसे बड़ी कमजोरी

सपा नेताओं के मुताबिक, कैंपियरगंज में पार्टी के प्रत्याशियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक संसाधनों की रही है। उनका मानना है कि चुनावी मुकाबले में सपा प्रत्याशी अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले आर्थिक रूप से कमजोर रहे हैं।

इसी कमी को दूर करने के लिए इस बार नवीन यादव को मैदान में उतारने की तैयारी की जा रही है। पार्टी को उम्मीद है कि मजबूत संगठन और पर्याप्त संसाधनों के साथ इस बार कैंपियरगंज में चुनावी समीकरण बदले जा सकते हैं।

कैंपियरगंज से इस बार नवीन यादव का चुनाव लड़ने का दावा है। उनका विरोध भी चल रहा है।

कैंपियरगंज से इस बार नवीन यादव का चुनाव लड़ने का दावा है। उनका विरोध भी चल रहा है।

जानिए कौन है सपा का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी

सपा का प्रत्याशी हो या किसी अन्य दल का उम्मीदवार, कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र में उसका सीधा मुकाबला विधायक और पूर्व मंत्री फतेहबहादुर सिंह से होता है। फतेहबहादुर सिंह पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीर बहादुर सिंह के पुत्र हैं और उन्हें राजनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है।

फतेहबहादुर सिंह खुलकर कहते हैं कि एक चुनाव में जीत का प्रमाण पत्र मिलते ही वह अगले चुनाव की तैयारी में जुट जाते हैं। वह हर चुनाव को नया चुनाव मानकर मैदान में उतरते हैं और इस बात पर निर्भर नहीं रहते कि वह कई बार के विधायक हैं।

उनकी चुनावी रणनीति और लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने की चर्चा होती रहती है। संसाधनों की उपलब्धता और मजबूत चुनावी प्रबंधन के चलते उनके प्रतिद्वंद्वी कई बार मुकाबले में कमजोर पड़ जाते हैं। यही वजह है कि कैंपियरगंज में सपा के सामने फतेहबहादुर सिंह को चुनौती देना बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जाता है।

फतेहबहादुर सिंह 7 बार से विधायक हैं। पूर्व मंत्री भी रहे हैं।

फतेहबहादुर सिंह 7 बार से विधायक हैं। पूर्व मंत्री भी रहे हैं।

बढ़ता गया जीत का मार्जिन

कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र में जीत का मार्जिन लगातार बढ़ता गया। 2012 में जब यह विधानसभा अस्तित्व में आयी तो पहली प्रत्याशी के रूप में चिंता यादव चुनाव लड़ीं। वह जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी थीं। उन्हें 62 हजार 948 वोट मिले थे। फतेहबहादुर सिंह इस चुनाव में एनसीपी के टिकट पर मैदान में थे।

एनसीपी का यहां कोई खास जनाधार नहीं है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने 71 हजार 906 वोट पाकर जीत हासिल की। जीत का अंतर 8 हजार 757 वोटों का था। इस चुनाव में भाजपा के बृजेश यादव को 14 हजार 800 वोट मिले थे।

2017 के चुनाव में चिंता यादव सपा व कांग्रेस के गठबंधन से चुनाव मैदान में उतरीं थीं। उन्हें टिकट कांग्रेस से मिला था। इस चुनाव में फतेहबहादुर सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। चिंता को 58 हजार 782 वोट मिले तो फतेहबहादुर सिंह को 91 हजार 636 वोट मिले थे। जीत का अंतर 32 हजार 854 हो गया।

2022 के चुनाव में सपा ने यहां से प्रत्याशी बदल दिया। काजल निषाद को मैदान में उतारा गया। काजल को 79 हजार 376 वोट मिले। जबकि फतेहबहादुर सिंह को इस बार 1 लाख 22 हजार 32 वोट मिले। जीत का अंतर 42 हजार 656 वोट हो गया।

सपा नेता नवीन यादव का दावा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें कैंपियरगंज से चुनाव लड़ने को कहा है।

सपा नेता नवीन यादव का दावा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें कैंपियरगंज से चुनाव लड़ने को कहा है।

अब नवीन यादव पर दांव

इस बार अखिलेश यादव नवीन यादव पर दांव लगाने जा रहे हैं। नवीन यादव पुराने सपाई हैं। इनका परिवार व्यवसाय से जुड़ा है। नवीन यादव उद्यमी हैं। पार्टी मान रही है कि सुविधा और संसाधनों के मामले में नवीन यादव कैंपियरगंज में टक्कर दे सकते हैं।

हालांकि अभी उनकी ही पार्टी में उनका विरोध हो रहा है लेकिन उनका कहना है कि सभी लोग मान जाएंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद भी सबको मनाएंगे। उनका निर्देश सभी मानते हैं। एक सपा नेता ने बताया कि अब तक जितने प्रत्याशी यहां से लड़े हैं, आर्थिक मामले में नवीन यादव, उनसे कहीं अधिक मजबूत हैं। ऐसे में सपा इस बार यहां कड़ी टक्कर दे सकती है।

जानिए किस वर्ग के कितने वोटर हैं

कैंपियरगंज में लगभग 1 लाख निषाद वोटर हैं। लगभग 60 हजार यादव, 32000 सैंथवार/कुर्मी, 40 हजार ब्राह्मण, 19 हजार वैश्य, ठाकुर 5 हजार, एससी 40 हजार, मुस्लिम 15 हजार, लगभग 10 हजार अन्य पिछड़ा वर्ग।

.