हरियाली अमावस्या 2026: नवग्रह दोषों से मुक्ति और पितृ कृपा का महाउपाय
विक्रम सम्वत 2083 श्रावण मास में कृष्ण पक्ष, अमावस्या, हरियाली अमावस्या का हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत विशेष महत्त्व है। इस वर्ष 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या का पावन पर्व मनाया जाएगा। विशेष बात यह है कि इस बार यह शुभ तिथि बुधवार के दिन पड़ रही है। ज्योतिष में बुध ग्रह को स्वयं प्रकृति, हरियाली और पेड़-पौधों का कारक माना जाता है। ऐसे में इस दिन पौधे लगाना या उनका दान करना न केवल नवग्रहों की अनुकूलता लाता है, बल्कि पितरों की आत्मा को भी शांति प्रदान करता है।
अपने आराध्य एवं नवग्रहों की प्रसन्नता के लिए कौन-सा पौधा दान करें?
शास्त्रों और वृक्ष आयुर्वेद के अनुसार, हमारे जीवन के सभी नौ ग्रह किसी न किसी पौधे या फूल के रंग से संबंध रखते हैं। पौधों के इस दान से आप केवल नवग्रह को ही नहीं बल्कि अपने आराध्य को भी प्रसन्न कर सकते हैं जैसे यदि आपके इष्ट परमपिता भगवान शिव है तो आप उनके मंदिर में बिल्व वृक्ष का दान कर सकते हैं यदि आपके आराध्य भगवान श्री हरि विष्णु है तो आप उनके मंदिर में तुलसी के पौधे का दान कर सकते हैं यदि आप भगवती पराअंबा की आराधना करते हैं तो उनके मंदिर में पान की बेल, लाल फूल, जैसे गुड़हल, चंपा, कनेर आदि के पौधों का दान कर सकते हैं यदि आपके आराध्य विघ्नहर्ता श्री गणेश है तो उनके मंदिर में दुर्वा का रोपण भी कर सकते हैं केवल आपके भाव सकारात्मक और प्रेम पूर्ण होना चाहिए।
सही पौधे का दान या रोपण करके आप संबंधित ग्रह के शुभ परिणाम प्राप्त कर सकते हैं:
सूर्य (Sun): मदार (आंकड़ा), गुड़हल या सिंदूरी/लाल फूल वाले पौधे
चंद्रमा (Moon): पलाश (ढाक), चमेली या हल्के गुलाबी/सफेद सुगंधित फूल
मंगल (Mars): खैर (कत्था), लाल चंदन या लाल पुष्प वाले पौधे
बुध (Mercury): तुलसी, बेलपत्र, अपामार्ग या कोई भी हरा-भरा पौधा
गुरु (Jupiter): केला, पीपल, हल्दी या पीले पुष्प वाले पौधे
शुक्र (Venus): गूलर या सुगंधित सफेद पुष्पों वाले पौधे
शनि (Saturn): शमी, पीपल या नीले/बैंगनी फूल (जैसे अपराजिता)
राहु (Rahu): दूर्वा (घास), चंदन या बैंगनी/जामुनी फूल वाले पौधे
केतु (Ketu): कुशा (कुश), अश्वगंधा या जामुनी पुष्पों के पौधे
पौधा दान एवं रोपण की प्रामाणिक विधि:
पौधा दान करते समय सही भावना और विधि का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि इसका पूर्ण पुण्य प्राप्त हो सके:
1. शुद्धि व चयन: प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। दान के लिए हमेशा एक स्वस्थ, हरा-भरा और गमले में लगा पौधा ही चुनें।
2. पूजन: पौधे की जड़ में थोड़ा जल अर्पित करें। इसके बाद रोली-अक्षत का तिलक लगाकर धूप-दीप दिखाएं।
3. स्थान का चयन: पौधे को किसी मंदिर, सार्वजनिक पार्क, नदी तट, गौशाला या किसी ज़रूरतमंद श्रद्धालु को सौंपें।
संकल्प की विधि:
दान से पूर्व दाएं हाथ में जल, अक्षत, पुष्प और एक सिक्का लेकर अपने मन में यह भाव या संकल्प बोलें:
"हे परमेश्वर/पितृदेव, मैं (अपना नाम बोलें), गोत्र (अपने गोत्र का नाम बोलें), आज इस पावन हरियाली अमावस्या पर अपने पितरों की शांति, नवग्रहों की अनुकूलता और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए इस (पौधे का नाम) का दान कर रहा/रही हूँ। कृपया मेरे इस दान को स्वीकार कर मुझे आशीर्वाद दें।"
संकल्प के पश्चात जल और सामग्री को गमले के पास या भूमि पर छोड़ दें।
विशेष सुझाव: यदि आप दान किए जाने वाले पौधों को अपने आराध्य देव के मंदिर में अर्पित करते हैं, तो उन पौधों के फूलों का उपयोग देव-पूजा में होगा, जिससे आपको कई गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होंगे।
हरियाली अमावस्या पर करें ये अतिरिक्त शुभ कार्य
• गौशाला सेवा: अमावस्या के दिन गौशाला में गायों को हरा चारा, हरा अनाज और नमक का दान करना बेहद शुभ होता है। इससे विशेष रूप से राहु ग्रह के नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं और बेजुबान पशुओं को आश्रय व भोजन मिलता है।
• पितृ दोष शांति: पीपल, बरगद, शमी या तुलसी का रोपण करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और पितृ-दोष से राहत मिलती है।
इस हरियाली अमावस्या पर अपनी भावना को शुद्ध रखकर प्रकृति का संरक्षण करें और नवग्रहों की कृपा प्राप्त करें! प्रस्तुति: श्री गीतांजलि ज्योतिष केंद्र, इंदौर।
