यूपी चुनाव 2027 से पहले मायावती का बड़ा राजनीतिक दांव: ईशान आनंद को बनाया राजनीतिक उत्तराधिकारी, आकाश आनंद पर कही यह बड़ी बात - Up18 News

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। उन्होंने रविवार को उन तमाम कयासों और अटकलों पर विराम लगा दिया, जिनमें भाई आनंद कुमार की बेटी दीपिका को बसपा सुप्रीमो का उत्तराधिकारी बनाए जाने की चर्चाएं चल रही थीं।

मायावती ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान आनंद को ही पार्टी में आगे बढ़ाया जाएगा और इसके अलावा परिवार के किसी अन्य सदस्य को बसपा में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी।

​भाई-बहनों और नजदीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठना होगा: मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि किसी को भी राजनीति में सफल होना है और समाज के लिए सही मायनों में कुछ करना है, तो उन्हें मेरे निजी अनुभवों से सीख लेते हुए भाई-बहनों और करीबी रिश्तेदारों के मोह त्यागने होंगे। पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करना ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने पार्टी के संस्थापक एवं जन्मदाता मान्यवर श्री कांशीराम जी का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीति में आने के बाद उन्होंने कभी भी अपने किसी करीबी रिश्तेदार को राजनीतिक लाभ नहीं दिया। उन्होंने अपने सभी रिश्तेदारों को केवल निःस्वार्थ भाव से पार्टी संगठन में कार्य करने की ही अनुमति दी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने अपना खुद का परिवार न बसाकर अपनी पूरी जिंदगी ‘बहुजन समाज’ के कल्याण के लिए समर्पित कर दी थी। उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए मैंने भी अपना संपूर्ण जीवन बहुजन समाज के नाम कर दिया है।

​मजबूरी में भाई-बहनों को अपने साथ रखना पड़ा

मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार और उनके बच्चों को पार्टी में शामिल करने और जिम्मेदारियां देने के पीछे की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि एक महिला होने के नाते मुझे मजबूरी में अपने किसी न किसी भाई-बहन को हमेशा अपने साथ रखना पड़ा। इसी कड़ी में पिछले काफी वर्षों से मेरे छोटे भाई श्री आनंद कुमार मेरी सेवा में कार्यरत हैं। उनके विशेष आग्रह और दबाव पर ही मुझे उनके बड़े बेटे श्री आकाश आनंद को राजनीति में आगे लाना पड़ा था। लेकिन आकाश आनंद की शादी के बाद से उनका रवैया और गतिविधियां ऐसी रहीं कि कुछ समय पहले उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा। मायावती ने तीखे शब्दों में कहा कि अब वे अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव और जंजाल में पूरी तरह घिर चुके हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें दोबारा पार्टी में वापस लेना बहुजन समाज पार्टी के साथ एक बहुत बड़ा विश्वासघात होगा, और पार्टी विरोधी ऐसा अनुचित कार्य मैं कभी नहीं कर सकती।

आनंद कुमार के परिवार को लेकर लिया गया अंतिम फैसला

​मायावती ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि अब उनके सामने यह बड़ी दुविधा थी कि आनंद कुमार के परिवार से किसे पार्टी में आगे बढ़ाया जाए और किसे नहीं। इस विषय पर हर पहलू पर बहुत ही गंभीरता से विचार करने के बाद उन्होंने अंतिम निर्णय ले लिया है। उन्होंने तय किया है कि परिवार में से केवल उसी सदस्य को आगे लाया जाएगा जो आकाश आनंद के नक्शेकदम पर बिल्कुल न चले। जहां तक आनंद कुमार की बेटी का सवाल है, तो उनकी शादी के बाद यदि उनका मामला भी आकाश आनंद जैसा ही साबित हुआ, तो यह पार्टी हित में बिल्कुल सही नहीं होगा। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए यह उचित समझा गया है कि आकाश आनंद और उनकी बहन—दोनों को ही पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी से पूरी तरह दूर रखा जाए। इस फैसले में अब भविष्य में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा।

​ईशान आनंद संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारियां

बसपा सुप्रीमो ने स्पष्ट किया है कि आनंद कुमार के परिवार में से केवल उनके छोटे बेटे श्री ईशान आनंद को ही पार्टी में सम्मानित जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा। ऐसा प्रतीत होता है कि ईशान आनंद का रवैया श्री आकाश आनंद और उनकी बहन की तरह कभी नहीं रहेगा, हालांकि भविष्य के बारे में अभी से निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। मायावती ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि यदि भविष्य में ईशान आनंद ने भी पार्टी विरोधी कोई गंभीर कृत्य किया, तो उन्हें भी तुरंत पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसी स्थिति आने पर भी आनंद कुमार के परिवार से किसी अन्य सदस्य को पार्टी की कोई छोटी या बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

दलित और निष्ठावान कार्यकर्ता को मिलेगी प्राथमिकता

मायावती ने अपनी इस महत्वपूर्ण पोस्ट के अंत में यह भी जोड़ा कि पार्टी के भीतर से ही किसी समर्पित, मिशनरी और वफादार दलित वर्ग के कार्यकर्ता को आगे लाया जाएगा। देश और जनहित से जुड़े जरूरी मुद्दों के साथ-साथ इन तमाम संगठनात्मक विषयों पर चर्चा के लिए आगामी 23 सितंबर को बसपा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अखिल भारतीय (All-India) बैठक बुलाई गई है, ताकि पार्टी के सभी लोग पूरी ऊर्जा और जी-जान से आगामी कार्यों में जुट जाएं।