सीबीडीटी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स बढ़ाकर 384 किया

सीबीडीटी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स बढ़ाकर 384 किया

सीबीडीटी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स बढ़ाकर 384 किया

author-image

IANS

16 Jul 2026

16:50 IST

New Update

CBDT raises Cost Inflation Index to 384 for 2026-27

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 16 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (सीआईआई) को 376 से बढ़ाकर 384 कर दिया है। यानी इसमें पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। सीबीडीटी की ओर से जारी अधिसूचना 15 जुलाई 2026 से प्रभावी है और यह 1 अप्रैल 2026 से होने वाली कर गणनाओं पर लागू होगी।

कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स का उपयोग किसी संपत्ति की खरीद कीमत को महंगाई के अनुसार समायोजित (इंडेक्सेशन) करने के लिए किया जाता है। इससे लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ (लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स) पर टैक्स की गणना अधिक वास्तविक तरीके से की जाती है। खासकर जमीन और मकान जैसी संपत्तियां बेचने वाले करदाताओं को इसका लाभ मिलता है, क्योंकि महंगाई के हिसाब से खरीद मूल्य बढ़ जाने से टैक्स योग्य लाभ कम हो जाता है।

सरकार का उद्देश्य इंडेक्सेशन के जरिए संपत्ति की वास्तविक लागत को महंगाई के अनुरूप मान्यता देना है, क्योंकि कई मामलों में वर्षों पहले खरीदी गई संपत्तियों की मूल कीमत काफी कम होती है। ऐसे में केवल खरीद और बिक्री मूल्य के अंतर पर टैक्स लगाना करदाताओं के लिए उचित नहीं माना जाता।

हालांकि, वित्त अधिनियम 2024 के तहत किए गए बदलावों के बाद 23 जुलाई 2024 या उसके बाद बेची जाने वाली अधिकांश दीर्घकालिक पूंजीगत संपत्तियों पर इंडेक्सेशन का लाभ समाप्त कर दिया गया है। अब ऐसे मामलों में इंडेक्सेशन के बिना 12.5 प्रतिशत की समान (फ्लैट) टैक्स रेट लागू होती है।

इसके बावजूद, कुछ मामलों में कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स अभी भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। यदि कोई भारतीय निवासी व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) ऐसी जमीन या भवन बेचता है, जिसे 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदा गया था, तो उसके पास दो विकल्प होंगे। वह या तो 12.5 प्रतिशत टैक्स बिना इंडेक्सेशन के दे सकता है या फिर 20 प्रतिशत टैक्स इंडेक्सेशन लाभ के साथ चुन सकता है। करदाता जिस विकल्प में कम टैक्स देय होगा, उसे चुन सकेगा।

इस बीच, सीबीडीटी के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 13 जुलाई तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (नेट डारेक्ट टैक्स कलेक्शन) सालाना आधार पर 16.4 प्रतिशत बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है।

आंकड़ों के मुताबिक, शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में 22 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है और यह लगभग 2.40 लाख करोड़ रुपए रहा। वहीं, गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह करीब 12 प्रतिशत बढ़कर 3.85 लाख करोड़ रुपए हो गया।

इसके अलावा, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) संग्रह में 44 प्रतिशत से अधिक की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 26,000 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया।

–आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.