सीताराम डाक कांवड़ यात्रा: रामेश्वरम से इंदौर तक 2100 किलोमीटर दौड़ते हुए करेंगे सफर, 10 अगस्त को पहुंचेंगे
सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है, पवित्र नदियों से जल पात्रों में भरकर कंधों पर कांवड़ लेकर यात्री भोलेनाथ को जल अर्पण करते हैं। सावन के महीने में कावड़ का और शिव मंदिरों में जल अर्पण का प्राचीन काल से खास महत्व है। यह हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। मालवा और निमाड़ में नर्मदा से जल लेकर कांवड़ यात्री उज्जैन महाकालेश्वर आते हैं। वहीं, इंदौर के विजय नगर क्षेत्र से बावड़ी वाले बालाजी मंदिर द्वारा डाक कांवड़ यात्रा आयोजित की जा रही है। यह तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम से 2100 किलोमीटर का सफर नॉन स्टॉप तय कर इंदौर पहुंचेगी। 10 अगस्त सोमवार को कांवड़ यात्री रामेश्वरम पहुंचेंगे और 15 अगस्त से यह सुपर फास्ट कांवड़ यात्रा आरंभ होगी, जो 21 अगस्त तक इंदौर पहुंचने की संभावना है।
300 कांवड़िये शामिल होंगे, एक घंटे में 12 किमी
इस सावन में रामेश्वरम से इंदौर की यह डाक कांवड़ यात्रा सबसे लंबी होगी। इसमें करीब 300 कांवड़ यात्री रहेंगे। 171 घंटे यानी सात दिन में यह यात्रा पूरी होगी। प्रति घंटे बारह किलोमीटर की गति से कांवड़ यात्रा चलेगी।
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2015 से आरंभ हुआ था सिलसिला, रामजी महाराज प्रणेता
इस डाक कांवड़ यात्रा का सिलसिला वर्ष 2015 से आरंभ हुआ था। मंदिर के महंत रामजी महाराज इस यात्रा के प्रेरणा स्त्रोत हैं, उन्ही के मार्गदर्शन में डाक कांवड़ यात्रा आयोजित की जाती है। रामजी महाराज का कहना है कि युवा भक्तों की टोली डाक कांवड़ में शामिल रहती है, जो तय दूरी से कांवड़ लेकर दौड़ती है। कांवड़ यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाता है। डाक कांवड़ यात्रा 11 से 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलती है।
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अब तक पांच डाक कावड़ यात्रा निकाल चुके
बावड़ी वाले बालाजी मंदिर समिति द्वारा अब तक पांच डाक कांवड़ यात्राएं निकाली जा चुकी हैं। वर्ष 2025 में अयोध्या से इंदौर 1100 किलोमीटर, वर्ष 2024 में द्वारका से इंदौर 1100 किलोमीटर, 2023 में गंगोत्री धाम से इंदौर 1500 किलोमीटर, 2022 में अमरकंटक से इंदौर 900 किलोमीटर और 2021 में ओंकारेश्वर से इंदौर 90 किलोमीटर की डाक कांवड़ यात्रा निकाली जा चुकी हैं। इस वर्ष अभी तक की सबसे लंबी दूरी की डाक कांवड़ यात्रा आयोजित की जा रही है।
क्या कहते हैं डाक कांवड़ यात्री
सुनील भिड़े और अनिल यादव आरंभ से डाक कांवड़ से जुड़े हैं। इनका कहना है कि सीताराम जी महाराज द्वारा काफी अच्छा इंतजाम किया जाता है। कांवड़ यात्रियों को कोई तकलीफ नहीं रहती है। उनकी सुविधाओं का पूर्ण ध्यान रखा जाता है।
चार प्रकार की होती है कांवड़ यात्रा
- सामान्य कावड़ यात्रा: इसमें कावड़ यात्री नदी से कांवड़ में जल भरकर शिव को अर्पित करते हैं। इसमें कांवड़ जमीन पर नहीं रखी जाती है, बल्कि रात्रि विश्राम के वक्त स्टैंड पर रखी जाती है।
- खड़ी कांवड़ यात्रा: खड़ी कांवड़ लेकर यात्री चलते हैं और मुख्य कांवड़ यात्री की मदद के लिए अन्य साथी रहते हैं।
- दंडवत कांवड़ यात्रा: ऐसी यात्रा भी कुछ क्षेत्रों में श्रद्धा भाव से की जाती है। इसमें जल लेकर यात्री गंतव्य स्थान जहां जल अर्पण करना है वहां तक दंडवत करते हुए जाता है।
- डाक कांवड़ यात्रा: इसमें यात्री जल लेकर दौड़ते हुए जल अर्पण के लिए पहुंचते हैं।