213 करोड़ का सिकंदरपुर लेक फ्रंट बना 'धोबी घाट': CM सम्राट चौधरी ने किया था उद्घाटन, जाते ही बदली तस्वीर; पाथ-वे-साइकिल ट्रैक पर सूखने लगे कपड़े - Muzaffarpur News
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मुजफ्फरपुर1 घंटे पहले
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मुजफ्फरपुर की सबसे महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में शामिल सिकंदरपुर लेक फ्रंट का उद्घाटन दो दिन पहले सीएम सम्राट चौधरी ने किया। इसके तुरंत बाद ही इसकी तस्वीर बदल गई। मंगलवार को लेक फ्रंट का पाथ-वे, साइकिल ट्रैक, रेलिंग और साइन बोर्ड फिर से कपड़ों से पटा नजर आया।
धोबी समुदाय ने दोबारा यहां कपड़े धोने और सुखाने का काम शुरू कर दिया, जबकि करबला रोड पर फुटपाथी दुकानदारों का भी कब्जा लौट आया। इससे लेक फ्रंट की सुंदरता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
रविवार को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने करीब 213.14 करोड़ रुपये की लागत से तैयार सिकंदरपुर लेक फ्रंट का उद्घाटन किया था। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर पिछले एक सप्ताह से पूरे परिसर की विशेष साफ-सफाई कराई गई थी। लेक फ्रंट के सामने की सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराया गया और सालों से चल रहे धोबी घाट को भी अस्थायी रूप से हटा दिया गया था।

लेक फ्रंट का उद्घाटन दो दिन पहले सीएम सम्राट चौधरी ने किया था।
रस्सियां बांधकर कपड़े सुखाए जाने लगे
लेकिन उद्घाटन के अगले ही दिन सोमवार को हालात फिर पहले जैसे हो गए। लेक फ्रंट के पाथ-वे और साइकिल ट्रैक पर रस्सियां बांधकर कपड़े सुखाए जाने लगे। रेलिंग, साइन बोर्ड और अन्य सार्वजनिक संरचनाओं पर भी कपड़े टंगे नजर आए। इससे सुबह-शाम टहलने और घूमने आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
इतना ही नहीं, करबला रोड पर भी फुटपाथी दुकानदारों ने फिर से कब्जा जमा लिया। परिसर के कई हिस्सों में कचरा फैला मिला, जिससे स्मार्ट सिटी परियोजना की रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
घूमने आए लोगों ने जताई नाराजगी
जीरोमाइल निवासी रविंद्र कुमार ने बताया कि वे मरीन ड्राइव घूमने पहुंचे थे, लेकिन यहां जगह-जगह कचरा फैला हुआ था। पाथ-वे पर कपड़े सुखाए जा रहे थे, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा कि उद्घाटन के समय जैसी व्यवस्था दिखी थी, वह केवल एक दिन तक ही सीमित रही। मुख्यमंत्री के जाते ही पूरी व्यवस्था गायब हो गई।
स्थानीय निवासी राजन कुमार ने कहा कि लेक फ्रंट के आसपास नियमित साफ-सफाई नहीं होती। ठेला लगाने वाले लोग कचरा फैला देते हैं, जिससे पूरे इलाके में गंदगी का माहौल बना रहता है।

सिकंदरपुर लेक फ्रंट पर कपड़े सुखाए जा रहे हैं।
धोबी बोले- निगम ने सिर्फ दो दिन के लिए रोका था
धोबी समुदाय का कहना है कि उनके सामने भी मजबूरी है। संजय कुमार रजक ने बताया कि उनका परिवार अंग्रेजों के समय से यहां कपड़े धोने का काम करता आ रहा है। निगम ने कपड़े धोने के लिए जगह तो बना दी है, लेकिन सुखाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में मजबूरी में उन्हें पाथ-वे और आसपास की जगहों पर कपड़े सुखाने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा, “नगर निगम के अधिकारियों ने कहा था कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के कारण सिर्फ दो दिन तक यहां कपड़े नहीं सुखाने हैं। अब कार्यक्रम खत्म हो गया है, इसलिए हम फिर से अपना काम कर रहे हैं। जब तक सरकार कपड़े सुखाने की अलग व्यवस्था नहीं करेगी, तब तक हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।”
गणेश प्रसाद रजक ने भी कहा कि उनके पूर्वज अंग्रेजों के समय से इसी घाट पर कपड़े धोते और सुखाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि नया धोबी घाट तो बना है, लेकिन वहां कपड़े सुखाने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में रोजी-रोटी चलाने के लिए उन्हें पुराने तरीके से ही काम करना पड़ रहा है।

धोबी समुदाय का कहना है कि उनके सामने भी मजबूरी है।
रखरखाव पर उठे सवाल
स्मार्ट सिटी की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल सिकंदरपुर लेक फ्रंट को शहर की पहचान के रूप में विकसित किया गया है। लेकिन उद्घाटन के अगले ही दिन पाथ-वे पर कपड़े, लौटता अतिक्रमण और फैली गंदगी ने परियोजना के रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित सफाई, अतिक्रमण नियंत्रण और धोबी समुदाय के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो लेक फ्रंट की खूबसूरती लंबे समय तक बरकरार रखना मुश्किल होगा।
इस मामले में नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह ने बताया कि मरीन ड्राइव पर शिफ्ट में आदमी नियुक्त किया गया है, जो सफाई व्यवस्था और इन चीजों पर ध्यान देंगे।
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