श्योपुर में 24 घंटे से BSNL टावर पर बैठी महिला: जमीन विवाद में अटकी 782 करोड़ की पेयजल योजना; रातभर नीचे से जगाता रहा बेटा - Sheopur News
श्योपुर जिले के श्यारदा गांव में 782.11 करोड़ रुपए की श्योपुर-चंबल समूह पेयजल योजना के लिए जमीन खाली कराने की कार्रवाई के विरोध में एक महिला पिछले 24 घंटे से अधिक समय से बीएसएनएल टावर पर बैठी है। रविवार सुबह टावर पर चढ़ी रामा पत्नी बाबूलाल सोमवार सुब
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पूरी रात टावर के नीचे डटे रहे ग्रामीण
महिला के टावर पर चढ़ने के बाद प्रशासन देर रात तक समझाइश देता रहा, लेकिन सफलता नहीं मिली। रात में अधिकारी लौट गए, जबकि परिजन और ग्रामीण पूरी रात टावर के नीचे डटे रहे। महिला का 10 वर्षीय बेटा भी रातभर मां को आवाज लगाता रहा। ग्रामीण लगातार उसे जगाते रहे, ताकि वह नींद में टावर से नीचे न गिर जाए।

सीमांकन को लेकर बढ़ा विवाद
ग्रामीणों का कहना है कि तीन पट्टाधारियों की कुल 11 बीघा जमीन का सीमांकन होना बाकी है। उनका आरोप है कि वर्षों पहले गलत सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड की गड़बड़ी के कारण विवाद पैदा हुआ। उनका कहना है कि यदि सीमांकन में जमीन परियोजना क्षेत्र में निकलती है तो वे स्वयं कब्जा छोड़ देंगे।
प्रशासन ने दिया था आश्वासन
रविवार को विजयपुर एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व अमला और पुलिस बल सरकारी जमीन से कब्जा हटाने पहुंचे थे। देर शाम प्रशासन ने सोमवार को सीमांकन कराने का भरोसा दिया था, लेकिन सोमवार सुबह ग्रामीणों का आरोप था कि महिला के टावर से नीचे नहीं उतरने के कारण फिलहाल सीमांकन नहीं किया जाएगा।
श्योपुर-चंबल समूह पेयजल योजना के तहत 377 गांवों तक चंबल नदी का पानी पहुंचाया जाना है। जल शोधन संयंत्र (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) के लिए प्रस्तावित 7.5 हेक्टेयर जमीन पर विवाद के कारण परियोजना का काम प्रभावित हो रहा है। निर्माण एजेंसी अब तक करीब 130 किलोमीटर पाइपलाइन बिछा चुकी है और 86 में से 18 ओवरहेड टंकियों पर काम शुरू हो चुका है, लेकिन प्लांट का निर्माण रुका हुआ है।
बॉक्स-1: दो साल वन अनुमति में अटकी रही योजना
377 गांवों तक चंबल का पानी पहुंचाने वाली 782.11 करोड़ रुपए की श्योपुर-चंबल समूह पेयजल योजना का शिलान्यास करीब दो वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। टेंडर होने के बाद भी योजना आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि चंबल नेशनल पार्क (घड़ियाल अभयारण्य) क्षेत्र से बरैठा घाट पर इंटेकवेल बनाकर पानी लिफ्ट करने की अनुमति लंबित थी।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद यह बाधा दूर हुई, लेकिन अब श्यारदा में जल शोधन संयंत्र के लिए आवंटित 7.5 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा परियोजना की नई रुकावट बन गया है।
बॉक्स-2: श्यारदा के प्लांट पर टिकी पूरी योजना
पूरी परियोजना की ड्राइंग-डिजाइन श्यारदा में प्रस्तावित जल शोधन संयंत्र को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। निर्माण एजेंसी अब तक करीब 130 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का दावा कर चुकी है। 86 प्रस्तावित ओवरहेड टंकियों में से 18 पर काम शुरू हो चुका है।
इनमें 6 टंकियां तैयार हैं और 12 निर्माणाधीन हैं। लेकिन जल शोधन संयंत्र बने बिना आगे का वितरण नेटवर्क पूरी तरह शुरू नहीं हो सकेगा। यही वजह है कि 7.5 हेक्टेयर जमीन का विवाद पूरी 782.11 करोड़ रुपए की योजना पर भारी पड़ रहा है।
फैक्ट फाइल परियोजना लागत: 782.11 करोड़ रुपए लाभान्वित गांव: 377 विवादित जमीन: 7.5 हेक्टेयर प्रस्तावित निर्माण: जल शोधन संयंत्र (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) कब्जाधारी: 7 पट्टाधारी: 3 (कुल 11 बीघा) अब तक पाइपलाइन: 130 किमी ओवरहेड टंकियां: 86 प्रस्तावित, 18 पर काम शुरू