हरिद्वार- बिना मनोकामना 2400KM की कठिन तपस्या: घुटनों के बल 411 दिन में नेपाल पहुंचेंगे हरपाल, गंगाजल से करेंगे पशुपतिनाथ का जलाभिषेक - Haridwar News
हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर तक घुटनों के बल जाता शिवभक्त।
सावन और कांवड़ मेले में आस्था के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई दौड़ती कांवड़ लेकर शिवधाम की ओर बढ़ रहा है तो कोई खड़ी या लेटी कांवड़ से अपनी श्रद्धा जता रहा है। लेकिन हरिद्वार में एक शिवभक्त अपनी ऐसी कठिन तपस्या से लोगों का ध्यान खींच रहा है,
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मेरठ के 53 वर्षीय हरपाल नाथ रामराज हरिद्वार से गंगाजल लेकर नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर तक घुटनों के बल यात्रा कर रहे हैं। करीब 2,400 किलोमीटर लंबी यह यात्रा 411 दिनों में पूरी होगी। उनका कहना है कि यह यात्रा किसी इच्छा पूर्ति के लिए नहीं, बल्कि केवल भगवान शिव की सेवा और जलाभिषेक के संकल्प के लिए है।

घुटनों के बल चलकर कांवड़ ले जाता व्यक्ति।
बिना मनोकामना की तपस्या क्यों बन रही चर्चा का विषय?
कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु अक्सर किसी मनोकामना, पारिवारिक सुख-समृद्धि या संकट दूर होने की कामना के साथ जल लाते हैं। लेकिन हरपाल नाथ रामराज का कहना है कि उनकी कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं है। उनका उद्देश्य सिर्फ हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचना और भगवान शिव का जलाभिषेक करना है। यही बात उनकी यात्रा को बाकी कांवड़ यात्राओं से अलग बनाती है।

घुटनों के बल चल रहे, शरीर से बांध रखी है ट्रॉली
हरपाल अपनी पूरी यात्रा घुटनों के बल तय कर रहे हैं। उन्होंने शरीर से एक छोटी ट्रॉली बांध रखी है, जिसमें गंगाजल, कपड़े, दवाइयां और जरूरी सामान रखा है। घुटनों के सहारे धीरे-धीरे आगे बढ़ते इस शिवभक्त को देखकर रास्ते में लोग रुक रहे हैं, उनका अभिवादन कर रहे हैं और सुरक्षित यात्रा की शुभकामनाएं दे रहे हैं।
2400KM का सफर, 411 दिन का संकल्प
हरिद्वार से शुरू हुई यह यात्रा उत्तर प्रदेश के कई जिलों से होकर नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचेगी। लगभग 2,400 किलोमीटर लंबी इस यात्रा को पूरा करने में 411 दिन लगने का अनुमान है। वहां पहुंचकर हरपाल हरिद्वार से लाए गंगाजल से भगवान पशुपतिनाथ का जलाभिषेक करेंगे।

यह पहली नहीं, लगातार तीसरी कठिन कांवड़ यात्रा
हरपाल नाथ रामराज इससे पहले भी हरिद्वार से सोनभद्र तक करीब 1,800 किलोमीटर की कठिन कांवड़ यात्रा पूरी कर चुके हैं। यह उनकी लगातार तीसरी विशेष कांवड़ यात्रा है। उनका कहना है कि हर बार कठिन मार्ग चुनना उनके लिए शिवभक्ति का माध्यम है और भगवान की कृपा ही उन्हें यह तपस्या पूरी करने की शक्ति देती है।
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