सड़क-हादसे में घायल की मदद करने पर मिलेंगे 25 हजार: सम्मान और प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा, पुलिस नहीं करेगी पूछताछ - Kota News

कोटा20 मिनट पहले

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सड़क हादसे में घायल इंसान की मदद को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार ने राहवीर (गुड सेमेरीटीन) योजना शुरू की है। इसके तहत अब घायल की मदद करने वाले व्यक्ति को न सिर्फ समाज में सम्मान मिलेगा बल्कि सरकार की ओर से 25000 रुपए नगद प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी, साथ ही प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा। एक व्यक्ति एक साल में अधिकतम 5 बार यह सम्मान प्राप्त कर सकता है।

इसके लिए प्रशासन की ओर से जागरुकता मुहित भी चलाई जा रही है। पहले सड़क हादसे में घायल को देखकर लोग कोर्ट कचहरी के डर से आगे बढ़ जाते थे और मदद के लिए आगे नहीं आते थे। इसी सोच को बदलने के लिए सरकार ने यह मुहिम चालू की है।

चिकित्सा विभाग इस योजना को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के प्रयास कर रहा है ताकि घायलों को समय पर मदद मिल सके

चिकित्सा विभाग इस योजना को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के प्रयास कर रहा है ताकि घायलों को समय पर मदद मिल सके

एक साल में 1.25 लाख तक का सम्मान

सीएमएचओ डॉ. नरेन्द्र नागर ने बताया कि सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि की तर्ज पर यह वित्तीय मदद सीधे पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) के माध्यम से भेजी जाएगी। सबसे खास बात यह है कि एक जागरूक नागरिक को एक साल में अधिकतम 5 बार यानी 1.25 लाख तक का यह सम्मान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

डॉ नागर ने बताया कि हादसे के बाद का पहला 1 घंटा यानी गोल्डन आवर किसी भी घायल व्यक्ति की सांसें बचाने के लिए सबसे कीमती समय होता है। सड़क हादसों में होने वाली मौतों की सबसे बड़ी वजह घायलों को समय पर अस्पताल न पहुंचा पाना है।

अस्पताल पहुंचने पर पुलिस और डॉक्टर केवल मददगार का नाम-पता दर्ज कर प्राथमिक सत्यापन करेंगे।

अस्पताल पहुंचने पर पुलिस और डॉक्टर केवल मददगार का नाम-पता दर्ज कर प्राथमिक सत्यापन करेंगे।

पुलिस सिर्फ प्राथमिक सत्यापन करेगी

राह-वीर' योजना का सीधा मकसद इसी झिझक को खत्म करना है। मिशन निदेशक (एनएचएम) एवं आयुक्त ट्रॉमा डॉ. जोगाराम ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर इस योजना को हर नागरिक तक पहुंचाने और प्रशासनिक समन्वय बनाने के आदेश दिए हैं।

अस्पताल पहुंचने पर पुलिस और डॉक्टर केवल मददगार का नाम-पता दर्ज कर प्राथमिक सत्यापन करेंगे। कोई जबरन पूछताछ नहीं की जाएगी। जिला स्तर पर गठित मूल्यांकन समिति प्राप्त मामलों की समीक्षा कर अपनी स्वीकृति देगी। स्वीकृति होती ही 25,000 की राशि सीधे मददगार के बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी।

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