सरकारी नौकरी के नाम पर 25 लाख की ठगी: फर्जी सर्विस बुक-स्टैंप से दिलाया भरोसा, 2023 में पीड़िता का किराएदार बना था आरोपी - Motihari (East Champaran) News
मोतिहारी में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर एक महिला से 25 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। महिला के मुताबिक, आरोपियों ने करीब 3 साल तक उसे झांसे में रखा।
.
पीड़िता का आरोप है, "मुझे सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर अलग-अलग किस्तों में करीब 17 लाख रुपए कैश लिए गए। बाद में मुझसे करीब 8 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए ले लिए गए।"
पीड़िता की पहचान छतौनी थाना क्षेत्र के खुदानगर मोहल्ला निवासी शबनम खातून के रूप में हुई है। सोमवार को उसने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। मंगलवार को पुलिस ने एक आरोपी असदुल्ला को गिरफ्तार किया है।
वहीं, मुख्य आरोपी बताए जा रहे अनवर जावेद समेत अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस की कार्रवाई में फर्जी दस्तावेज, 10-12 आईडी कार्ड और दो सर्विस बुक मिलने की बात सामने आई है।

ठगों ने सरकारी कार्यालय की मुहर, लेटर नंबर, ID कार्ड और सर्विस बुक तक तैयार करवा रखी थी
ठगी के लिए बड़े पदाधिकारियों के मुहर का इस्तेमाल
आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों पर उप विकास आयुक्त कार्यालय और जिला मलेरिया पदाधिकारी कार्यालय की मुहर तक इस्तेमाल की थी। सेवा पुस्तिका को भी इस तरह तैयार किया गया था कि पहली नजर में वह सरकारी दस्तावेज जैसी ही लगे।
महिला के मुताबिक, ठगों ने सरकारी कार्यालय की मुहर, लेटर नंबर, ID कार्ड और सर्विस बुक तक तैयार करवा रखी थी।

सेवा पुस्तिका को भी सरकारी दस्तावेज की तरह इस्तेमाल किया गया था।
2023 में किराएदार बनकर आया, फिर नौकरी का भरोसा दिया
पीड़ित शबनम खातून ने बताया, साल 2023 में आरोपी मेरे घर पर किराएदार बनकर आया था। इसी दौरान हम दोनों के बीच जान-पहचान हुई। बातचीत में आरोपी ने मुझसे पूछा आप क्या करती हैं? घर कैसे चलातीं हैं?
इसपर मैंने उससे कहा- मैं मच्छरदानी की सिलाई कर घर चलाती हूं।
इसके बाद आरोपी ने खुद को सरकारी नौकरी और अधिकारियों से जुड़े संपर्क वाला व्यक्ति बताते हुए कहा- मैं आपको सरकारी टीचर बना सकता हूं। इसके लिए अलग-अलग लोगों से संपर्क कराया जा सकता है।
आरोपी ने मुझसे कहा- मैं इससे पहले कई सरकारी विभागों में लोगों को नौकरी दिला चूका हूं। उसने मुझसे कहा- तुम पैसे जमा करो मैं तुम्हें सरकारी टीचर बनाता हूं।
50 हजार-20 हजार करके 17 लाख लेने का आरोप
शबनम ने मुझसे कभी 50 हजार, कभी 20 हजार तो कभी 30 हजार रुपए लिए। आरोपी एक साथ बड़ी रकम नहीं मांगता था। अलग-अलग जरूरत और प्रक्रिया का हवाला देकर रकम ली जाती थी।
वो कभी कहता था, तुम्हारे कागजात को तैयार करने के लिए ये पैसे ले रहा हूं। तो कभी किसी अधिकारी से संपर्क और नियुक्ति प्रक्रिया के नाम पर रुपए लिए जाते थे। वो मुझे सरकारी स्टैंप के साथ वाले पेपर्स भी दिखाता था।
इस तरह करते हुए उसमें करीब 17 लाख रुपए 3 सालों में मुझसे ले लिए। छोटी-छोटी रकम जोड़कर करीब 17 लाख रुपए ले लिए गए। 2025 के शुरुआत तक ऐसा ही चलता रहा।
इस दौरान मुझे कुछ पैसों की जरूरत थी, मैंने जब आरोपी अनवर जावेद से पैसे मांगने शुरू किए तो उसने कहा- अगर तुम्हें नौकरी चाहिए तो ये पैसे वापस नहीं मिलेंगे। अगर तुम ये पैसे वापस मांगोगी तो अधिकारी लोग गुस्सा हो जाएंगे।
बॉस की तबीयत खराब होने के नाम पर फ्लैट खाली किया
मुझे आरोपी की बातें थोड़ी अजीब लगने लगी इसी वजह से मैंने दोबारा उससे पैसा मांगा। मैंने कहा- मुझे नहीं चाहिए सरकारी नौकरी, तुम मुझे सिर्फ मेरे पैसे वापस कर दो।
इसके बाद वो पैसे लौटने के नाम पर कई तरह के बहाने करना शुरू कर दिया। इस बीच 2025 के सितंबर में उसने मेरा घर खाली करने के लिए भी कहा..
इसपर मैंने उससे कहा, मुझे मेरे सारे पैसे लौटा दो तभी तुम रूम छोड़कर जा सकते हो। इस दौरान आरोपी रोना शुरू कर दिया। उसने मुझसे कहा- मेरे बॉस की तबीयत बहुत खराब है, मुझे जाना पड़ेगा।
पीड़िता ने बताया, जब भी मैं पुलिस के पास जाने की बात कहती थी आरोपी मुझे धमकाता था। वह कहता था कि पुलिस में शिकायत की तो तुम्हारे बच्चों को उठा लिया जाएगा। पति के साथ मारपीट की जाएगी।
इन धमकियों के डर से मैं लंबे समय तक पुलिस के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। सोमवार 14 सितंबर को मैंने सुबह 11 बजे डीएसपी दिलीप कुमार से मिलकर पूरे मामले की शिकायत की। इसके करीब 14 घंटे के अंदर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

कई लोगों के आई-कार्ड, ज्वाइनिंग लेटर-सेवा पुस्तिका बरामद
सदर एसडीपीओ अरुण कुमार ने बताया, गिरफ्तार आरोपी के पास से अलग-अलग विभागों के कई लोगों के आई-कार्ड, ज्वाइनिंग लेटर और सेवा पुस्तिका बरामद हुई हैं। इन दस्तावेजों को देखकर पुलिस को शक है कि ठगी का नेटवर्क काफी सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था।
पुलिस अब बरामद सभी आई-कार्ड और अन्य दस्तावेजों की संबंधित विभागों से जांच कराएगी। यह पता लगाया जाएगा कि दस्तावेज असली हैं या फर्जी और उनका इस्तेमाल किन लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देने में किया गया। साथ ही यह भी जांच होगी कि इन दस्तावेजों और विभागीय मुहरों की जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची।
बरामद आई-कार्ड, ज्वाइनिंग लेटर और सेवा पुस्तिका से पुलिस को इस बात की आशंका है कि ठगी के इस नेटवर्क में सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली की जानकारी रखने वाले लोगों की भूमिका हो सकती है। हालांकि, किसी सरकारी कर्मचारी की संलिप्तता अभी जांच में साबित नहीं हुई है।
सदर एसडीपीओ अरुण कुमार ने बताया, बरामद सभी दस्तावेजों का संबंधित विभागों से सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों ने इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किस तरह किया और क्या इस पूरे नेटवर्क में किसी सरकारी कर्मचारी या विभागीय व्यक्ति की भी भूमिका थी।
अधिकारी की अपील-नौकरी के नाम पर पैसा मांगने वाले से पहले सत्यापन करें
अधिकारी ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के नौकरी दिलाने के दावे पर तुरंत भरोसा नहीं करें। सरकारी नौकरी के नाम पर कोई व्यक्ति संपर्क करता है तो सबसे पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट, एप या ऑफिस से इसकी पुष्टि करें।
उन्होंने कहा कि किसी भी वैकेंसी के लिए निर्धारित परीक्षा या टेस्ट की प्रक्रिया होती है। कोई व्यक्ति अगर यह कहता है कि बिना परीक्षा पैसे लेकर नौकरी लगवा देगा तो ऐसे व्यक्ति के झांसे में न आएं।
उन्होंने कहा, “हमारे पास इस मामले से जुड़े पर्याप्त एविडेंस हैं। लोगों से हमारी अपील है कि किसी के झांसे में न आएं। आज के समय में कोई भी सरकारी वैकेंसी निकलती है तो उसकी परीक्षा या निर्धारित टेस्ट के बाद ही नियुक्ति होती है। पैसे लेकर सीधे नौकरी दिलाने के दावे पर भरोसा न करें। अगर ऐसी कोई सूचना मिलती है तो तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग से संपर्क कर उसकी सत्यता की जांच करें।”