सिर्फ मां का दूध ही संजीवनी: 25 फीसदी माताएं छह माह तक के बच्चों को नहीं पिलातीं अपना दूध, तीन साल में संख्या 5 फीसदी बढ़ी - durg-bhilai News
सिर्फ मां का दूध ही संजीवनी:25 फीसदी माताएं छह माह तक के बच्चों को नहीं पिलातीं अपना दूध, तीन साल में संख्या 5 फीसदी बढ़ी
भिलाई44 मिनट पहलेलेखक: अनुराग शर्मा
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- 80% माताएं सिर्फ अपना दूध पिला रही, 96% अपने दूध के साथ दूसरी वस्तुएं भी देती हैं
1 अगस्त से 7 अगस्त तक विश्व-स्तनपान सप्ताह है। स्वास्थ्य विभाग सप्ताहभर हर माता को अपने छह माह तक के बच्चे को पूर्ण स्तनपान (इसके अलावा कुछ नहीं) कराने की प्रेरणा देता है। क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार पूर्ण-स्तनपान नवजात के जीवन रक्षण, स्वास्थ्य वृद्धि, शारीरिक व मानसिक विकास, संक्रमण के विरुद्ध रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही भविष्य में जच्चा-बच्चों दोनों को शुगर, बीपी, कैंसर जैसे रोगों का जोखिम कम करता है।
नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे 2019-21 और 2023-24 का डेटा देखें तो तीन साल में 6 माह तक के नवजात को पूर्ण-स्तनपान कराने वाली माताएं बढ़ने की बजाय 5% घट गई हैं। 2019-21(एनएफएचएस-5) में अपने बच्चे को छह माह तक सिर्फ दूध पिलाने वाली माताएं 80.3 % थीं। 2023-24 (एनएफएचएस-6) में यह घटकर 75.8 % हो गई हैं। इसके इतर छह माह तक अपने दूध के साथ अन्य डिब्बा बंद वस्तुएं खिलाने वाली माताएं 95.8% हैं।
जबकि बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के छह माह तक बच्चे को मां के दूध के अलावा पानी, बाहर का दूध, अन्य कोई डिब्बा बंद वस्तु नुकसानदायक होती है। 6 माह के बाद 8 महीने तक बच्चे को मां के दूध के साथ घर की बनी सॉलिड खाद्य वस्तुएं देनी होती है। चिंताजनक की एनएफएचएस-6 के डेटा अनुसार प्रदेश में ऐसा करने वाली माताएं सिर्फ 60% हैं।
स्तनपान की बजाय बाहर के दूध का क्या-क्या नुकसान, जानिए
1. बाहर के दूध में सभी तत्व नहीं रहते: छह माह तक के बच्चों की सर्वांगिण विकास के लिए ढेर सारे तत्वों की जरूरत होती है। मां के दूध में ही वे सभी जरूरती तत्व उपलब्ध रहते हैं। सबसे बड़ी बात यह कि मां का दूध बिल्कुल फ्रेश होता है।
2. बाहर के दूध से गैस बनने की संभावना : मां के दूध की बजाय बॉटल से बाहर का दूध देने से बॉटल खाली होने पर बच्चा हवा भी शक कर लेता है। इससे उसे पेट-दर्ज के साथ डाइजेशन की परेशानी होने लगती है। बच्चा परेशान हो जाता है।
3. डिब्बा बंद पदार्थ, बासी, परेशानी बढ़ाते :बाजार में उपलब्ध डिब्बा बंद एक भी पदार्थ बच्चे के लिए लाभकारी नहीं होता है। क्योंकि उसकी मैनुफैक्चरिंग महीने पुरानी होती है। उसे खराब होने से बचाने ढेर सारे अन्य मिश्रण किए जाते हैं। इससे भूख शांत होती, इम्युनिटी बेहतर नहीं होती है।
4. बॉटल से दूध कान में जाने की आशंका :अक्सर सुना जाता कि दूध पीते समय बच्चे के कान में दूध चला गया। बच्चे को बॉटल का दूध पिलाने से ऐसा होने की आशंका हर पल बनी रहती है। लेकिन मां चाहे बच्चे को बैठकर दूध, पिलाए या लेट कर, उसके कान में दूध नहीं जा सकता। है।
5. दूध के लिए मां का पौष्टिक आहार जरूरी: गर्भावस्था में गर्भवती को 15 ग्राम अतिरिक्त प्रोटीन की जरूरत होती है, लेकिन डिलिवरी के बाद दूध पिलाने के लिए उसे 25 ग्राम अतिरिक्त प्रोटीन की जरूरत होती है। ऐसे में खान-पान बेहतर होने पर ही मां को बच्चे के लिए पर्याप्त दूध बनता है।
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